काजवलीचक बम धमाका मामले में राज्य सरकार चार साल बाद भी सदन में जवाब नहीं दे पाई है। वर्ष 2022 में विस्फोटक से 15 लोगों की मौत हुई थी और आठ लोग जख्मी हुए थे
गृह विभाग को विधानसभा में उठाए गए सवाल के जवाब के लिए मांगी रिपोर्ट घटना

भागलपुर, मुख्य संवाददाता। काजवलीचक बम धमाका मामले में राज्य सरकार चार साल बाद भी सदन में जवाब नहीं दे पाई है। वर्ष 2022 में विस्फोटक से 15 लोगों की मौत हुई थी और आठ लोग जख्मी हुए थे। इस मामले को विधायक पवन कुमार यादव ने 8 मार्च 2022 को शून्यकाल में एनजीटी के आदेश के पालन में हो रही देरी का मामला उठाया था। इस मामले में गृह विभाग को जवाब देना है, लेकिन तीन स्मार के बाद भी जिला प्रशासन ने विभाग को रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई है। मामले की गंभीरता को लेकर गृह विभाग (विशेष शाखा) ने जिला पदाधिकारी को अवैध विस्फोटक से घटित इस घटना में मृत एवं घायल निर्दोष लोगों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए तीन दिनों के अंदर रिपोर्ट देने को कहा है।
बता दें कि बम विस्फोट की घटना के चार साल बाद भी मृतक के आश्रितों और निर्दोष घायलों को एनजीटी के निर्देश के बावजूद मुआवजा नहीं मिल पाया है। घटना को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ में छपी खबर पर स्वत: संज्ञान लेते हुए मुआवजे की राशि तय कर दी थी और भागलपुर के डीएम को एक माह के अंदर मुआवजे की राशि पीड़ित को देने को कहा था। इस आदेश के खिलाफ प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर किया था। शीर्ष अदालत ने एसएलपी पर निर्णय देते हुए एनजीटी को पुन: सुनवाई करने को कहा था। क्या है मामला : तातारपुर थानाक्षेत्र के काजवलीचक स्थित एक आतिशबाज के घर तीन मार्च 2022 की रात 11.30 बजे हुए भीषण धमाके में 15 लोगों की मौत हुई थी। मौके पर 14 की मौत हुई थी। घटना में शीला देवी, नंदिनी देवी, प्रियांशु कुमार, गणेश प्रसाद सिंह, अयांश कुमार, आरती कुमारी, लीलावती देवी, राहुल कुमार उर्फ रोहित, उर्मिला देवी, पिंकी देवी, मून कुमार, महेंद्र मंडल, राजकुमार साह, सुनील मंडल उर्फ संजय मंडल उर्फ गोरका और आयशा की मौत हुई थी। आयशा की मौत उपचार के दौरान सिलीगुड़ी में मौत हुई थी।
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