Baba Siddheshwar Temple A Historical and Religious Hub in Purnia Seeks Government Recognition बोले पूर्णिया : मैनी मठ मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल का मिले दर्जा, Bhagalpur Hindi News - Hindustan
Hindi NewsBihar NewsBhagalpur NewsBaba Siddheshwar Temple A Historical and Religious Hub in Purnia Seeks Government Recognition

बोले पूर्णिया : मैनी मठ मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल का मिले दर्जा

पूर्णिया शहर में स्थित बाबा सिद्धेश्वर मंदिर, जो लगभग ढाई एकड़ में फैला है, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व का केंद्र है। स्थानीय लोग इसे राजकीय धार्मिक स्थल का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं ताकि इसके...

Newswrap हिन्दुस्तान, भागलपुरFri, 12 Sep 2025 04:32 AM
share Share
Follow Us on
बोले पूर्णिया : मैनी मठ मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल का मिले दर्जा

प्रस्तुति: भूषण

पूर्णिया शहर और हरदा के बीच नगर निगम क्षेत्र के वार्ड-9 में स्थित मैनी मठ बाबा सिद्धेश्वर मंदिर इतिहास और धार्मिक महत्व से भरा है। लगभग ढाई एकड़ में फैला यह मंदिर नेशनल हाईवे और हरदा नदी के किनारे अवस्थित है। कहा जाता है कि इसकी स्थापना शिव भक्त और देश के प्रसिद्ध व्यापारी चंदू सौदागर ने कराई थी। पुराने समय में यहां बड़े अनुष्ठान होते थे और मूर्तियों का विसर्जन नदी में किया जाता था। नंदनी नामक नदी इस क्षेत्र से गुजरती थी, जो व्यापारिक जलमार्ग के रूप में उपयोग होती थी। स्थानीय लोग इसे राजकीय धार्मिक पर्यटन स्थल का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं ताकि इसका संरक्षण और विकास हो सके।

पूर्णिया शहर में हरदा नदी और नेशनल हाईवे 31 के किनारे स्थित मैनी मठ बाबा सिद्धेश्वर मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। यह मंदिर लगभग ढाई एकड़ में फैला हुआ है और इसे पूर्णिया का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है। प्रारंभिक काल में यहां बड़े धार्मिक अनुष्ठान होते थे और प्रतिमाओं का विसर्जन नदी में किया जाता था। कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना शिव भक्त और प्रदेश के प्रसिद्ध व्यापारी चंदू सौदागर ने की थी। तब इस इलाके में नंदनी नामक नदी बहती थी, जो उनके व्यापारिक मार्ग का हिस्सा थी। इसके किनारे व्यापारियों के लिए रात्रि विश्राम की व्यवस्था होती थी। आरंभिक वर्षों में इस स्थान पर शिव पूजा होती थी, जिससे इसका धार्मिक महत्व बढ़ता गया। मंदिर परिसर में शिव मंदिर के अलावा पार्वती मंदिर, माता वैष्णवी, चैती दुर्गा, राधा कृष्ण, मनसा देवी और बजरंगबली के मंदिर भी शामिल हैं। इन सभी मंदिरों में दर्शनार्थियों की तीव्र आस्था है। शिव मंदिर की दीवार लगभग 30 इंच मोटी है, जो इसकी प्राचीनता और भव्यता को दर्शाती है। यहां हर साल हजारों श्रद्धालु आते हैं और कई धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। विशेषकर शादी के लिए यह मंदिर क्षेत्र में विख्यात है। कम खर्च में यहां शादी करने की सुविधा उपलब्ध है, जिसकी वजह से पूरे जिले से लोग यहां विवाह के लिए आते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है और मंदिर के पास आकर श्रद्धालुओं की मन्नतें पूरी होती हैं।

हालांकि, मंदिर के विकास और संरक्षा को लेकर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर अपेक्षित ध्यान नहीं मिला है। मंदिर परिसर की बाउंड्री ऊंची नहीं होने के कारण सामाजिक तत्वों के घुसने का खतरा बना रहता है। मुख्य द्वार पर तो बड़ा ग्रिल गेट है, लेकिन चारों तरफ पर्याप्त रोशनी और निगरानी व्यवस्था नहीं होने के कारण सुरक्षा कमजोर है। नगर निगम की ओर से साफ-सफाई के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं, जबकि सालाना कम से कम 100 जोड़ों की शादी इसी जगह होती है। मंदिर परिसर में सुविधा की कमी के कारण श्रद्धालुओं में असंतोष है। मंदिर में अभी भी कई जरूरी सुविधाओं की कमी है। रोशनी की अपर्याप्त व्यवस्था, साफ-सफाई की अनियमितता और सुरक्षा प्रबंधों में कमजोरी प्रमुख समस्याएं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मंदिर को राजकीय धार्मिक स्थल या पर्यटन स्थल के रूप में मान्यता दी जाए तो इसके संरक्षण और विकास में मदद मिलेगी। यह न केवल पर्यटकों के आवागमन को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी सुधार लाएगा। पर्यटकों के आने से स्थानीय व्यापारियों और होटलों को फायदा होगा, जिससे बेरोजगारी कम होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हाल ही में मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में मखाना फोड़ने वाले लोगों ने मंदिर कमेटी की अनुमति से धर्मशाला बनाने का काम शुरू किया है, जो अभी प्रारंभिक अवस्था में है। मंदिर परिसर में तीन विशालकाय पेड़ हैं, जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतिनिधित्व माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यहां संतान न होने वाले विवाहित दंपत्तियों का तीनों पेड़ों के साथ गले लगाने पर संतान प्राप्ति होती है। इसी वजह से यह स्थल विशेषकर निःसंतान दंपत्तियों के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बना हुआ है।

माता वैष्णवी व माता मनसा देवी से मांगते हैं मन्नत

मंदिर परिसर में इस समय भी प्रेमी जोड़ों का बढ़ता आना देखा जा रहा है, जो अमावस्या की रात यहां आकर माता वैष्णवी व माता मनसा देवी से मन्नत मांगते हैं। लोगों का मानना है कि उनकी मुरादें शीघ्र पूरी होती हैं, जिससे यह मंदिर प्रेमी युगलों के लिए भी प्रमुख स्थल बन गया है। सावन के महीने में दूर-दराज से भी श्रद्धालु यहां आते हैं। स्थानीय सेवकिया पुजारी बाबा छकुंदी दास कहते हैं कि मंदिर कमेटी ने आधिकारिक रूप से सरकार के पर्यटन विभाग और न्यास बोर्ड को पत्र लिखा है, लेकिन अबतक विशेष सफलता नहीं मिली। मंदिर की स्थापना से जुड़े अभिलेख और जमीन दानकर्ता का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है, जिससे इतिहास के कुछ पहलू अस्पष्ट रह गए हैं।

स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन का अवसर

मंदिर का परिसर अभी भी लगभग ढाई एकड़ में फैला हुआ है। कहा जाता है कि पहले मंदिर के पास 14 बीघा जमीन थी, जो समय के साथ अन्य हाथों में चली गई है। मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के कई फायदे हो सकते हैं। इससे स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जा सकता है। सड़कों, होटलों और अन्य आधारभूत संरचनाओं का विकास होगा, जिससे पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मंदिर का पर्यटन स्थल बनना स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन का भी अवसर प्रदान करेगा। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। मंदिर के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को संरक्षित रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

जनता की आवाज

यह मंदिर काफी ज्यादा श्रद्धालुओं के लिए विश्वास का केंद्र है। बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं। लेकिन व्यवस्था के अभाव में लोग जैसे-तैसे पूजा पाठ कर चले जाते हैं।

-अजय कुमार

इस मंदिर परिसर की सजावट नए तरीके से करने की जरूरत है। ताकि नया लुक हो और नेशनल हाईवे से ही लोगों को यह मंदिर एक रमणीक स्थल जैसा दिखे।

-रौशन

इस मंदिर के विकास के लिए एक बार बैठक की गई है और अब फिर से मंदिर कमेटी के साथ विचार विमर्श किया जाएगा और पर्यटन विभाग एवं न्यास बोर्ड से संपर्क किया जाएगा।

-मोतीलाल दास

मंदिर के चारों ओर बाउंड्री मजबूत होना चाहिए। नदी के किनारे वाले पोर्शन में सीधी बननी चाहिए ताकि छठ के समय पूजा करने में सुविधा हो ।

-विक्की कुमार झा

इस मंदिर का रजिस्ट्रेशन न्यास बोर्ड से नहीं है। इसके लिए सबसे पहले प्रयास किया जाना चाहिए। ताकि मंदिर राज्य और देश की मुख्य धारा से जुड़ पाए।

-डॉ विनोद कुमार

मंदिर में सेवा देने के लिए मंदिर कमेटी बनी है। इस कमेटी की देख रेख में सब काम होता है लेकिन अलग से कोई सहयोग नहीं मिलने के कारण विकसित नहीं हो पा रहा है।

-बाबा छकुंदी दास

मंदिर में हमेशा दो सुरक्षा गार्ड लगा रहना चाहिए। ताकि कहीं से किसी अवांछित का प्रवेश न हो और यहां का माहौल हमेशा भय मुक्त बना रहे।

-संतोष पासवान

मंदिर के आगे खाली जगह पर पूजन सामग्री की दुकान हर हाल में होनी चाहिए। ताकि यहां आकर पूजा अनुष्ठान करने वाले को किसी तरह की परेशानी ना हो।

-लाल बहादुर दास

इस मंदिर में तीन-चार सीजन में मेले लगते हैं। उसे समय 24 घंटे पुलिस पहरा की जरूरत पड़ती है। इस विषय पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए ताकि सहज माहौल मिले।

-बृज मोहन दास

चैती दुर्गा मेला के अलावा यहां पर शिवरात्रि और जन्माष्टमी पर रात दिन लोगों की भीड़ रहती है। विशाल मेला लगता है। महिलाओं की बड़ी भीड़ लगती है।

-कुमारी पूजा

यहां मेला के समय जितने भी लोग दुकान लगाने आते हैं उनकी सुरक्षा के लिए मंदिर कमेटी की ओर से स्वयंसेवक रहते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से व्यवस्था नहीं रहती।

-राजू

इस पौराणिक मंदिर को हर हाल में पर्यटन स्थल बनाना जरूरी है। इसके लिए इस मंदिर के पास तमाम संसाधन है। मंदिर में राजकीय समारोह भी आयोजित होने चाहिए।

-मणि कुमार

शहर में इतना पुराना और ख्याति प्राप्त मंदिर है, लेकिन अधिकांश लोगों को इसकी महत्ता के बारे में कुछ भी पता नहीं है। इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

-पप्पू मंडल

हम लोगों को लगता है कि इस बार अगर प्रधानमंत्री पूर्णिया आएंगे तो इस मंदिर पर भी उनका ध्यान आकर्षण किया जाना चाहिए।

-हरबोल मंडल

अब इस मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर देश के मंच पर इसे उभारेंगे। इसके लिए पूरी ताकत झोंक दी जाएगी। समाज के बुद्धिजीवियों ने भी सहयोग का आश्वासन दिया है। स्थानीय विधायक और मेयर ने भी समर्थन देना शुरू कर दिया है।

दिनेश यादव, अध्यक्ष, मंदिर कमेटी

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पहले ही विधायक निधि से विश्रामालय का निर्माण कराया गया है। इसके अलावा, नदी के किनारे सीढ़ी बनवाने की योजना भी विचाराधीन है। हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि इस मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा मिले और इसे राजनीतिक तथा प्रशासनिक समर्थन और सुरक्षा भी प्रदान की जाए।

विजय खेमका, विधायक, पूर्णिया सदर

शिकायत

1. अति प्राचीन मंदिर का न्यास बोर्ड की नहीं होती देखरेख। इसके कारण परेशानियों का करना पड़ता है सामना।

2. बाबा सिद्धेश्वर मंदिर की जमीन का हो रहा अतिक्रमण।

3. बाबा सिद्धेश्वर मंदिर की बाउंड्री भी अति सुरक्षित नहीं।

4. मंदिर परिसर के चारों ओर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं।

5. सुरक्षा गार्ड नहीं रहने से रात में शादी विवाह का आयोजन करने वालों को लगा रहता है डर।

सुझाव

1. विकास और सुधार के लिए न्यास बोर्ड से रजिस्ट्रेशन जरूरी।

2. मंदिर परिसर के चारों ओर वेपर लाइट और स्ट्रीट लाइट की जरूरत। जिससे सुरक्षा मिले।

3. शादी-विवाह और आयोजन के समय पुलिस पहरा की सख्त जरूरत।

4. पूरे मंदिर परिसर के चारों ओर ऊंची दीवार का बाउंड्री होना जरूरी। इससे सुरक्षित रहेगा।

5. मंदिर परिसर में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की अति आवश्यकता।

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।