
पल्स पोलिया उन्मूलन अभियान 16 से, 6.65 लाख बच्चों को मिलेगी दो बूंद जिंदगी की
भागलपुर में पल्स पोलियो उन्मूलन अभियान 16 से 20 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें 6.65 लाख बच्चों को खुराक दी जाएगी। जागरूकता रैली सराय से शुरू हुई, जिसमें बच्चों ने 'दो बूंद दवा, पोलियो हवा' के नारे लगाए। रैली का उद्घाटन डॉ. फार्रूक अली और अमित कुमार ने किया।
अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सराय से निकली जागरूकता रैली भागलपुर, वरीय संवाददाता बीत रहे साल में पल्स पोलियो उन्मूलन का अभियान आगामी 16 दिसंबर से जिले में शुरू होगा। 16 दिसंबर से 20 दिसंबर तक चलने वाले इस अभियान के दौरान जिले के 6 लाख 65 हजार बच्चों को पल्स पोलियो की खुराक (दो बूंद जिंदगी की) दी जाएगी। इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से गुरुवार को सराय स्थित सफाली युवा क्लब परिसर से जागरूकता रैली निकाली गई। रैली को छपरा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. फार्रूक अली, यूनिसेफ के एसएमसी अमित कुमार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
रैली सराय चौक, मंदरोजा चौक, महादेव सिंह कॉलेज, इवनिंग कॉलेज होते हुए सफाली युवा क्लब परिसर में आकर समाप्त हो गई। रैली के दौरान बच्चों ने ‘दो बूंद दवा, पोलियो हवा’ के नारे लगाया। इस मौके पर पीसीआई के आनंद कुमार, जेएसआई के रिंकेश कुमार, यूनिसेफ बीएमसी अजीत कुमार, पीतांबर कुमार सिन्हा, सफाली युवा क्लब की सदस्य गुलफशा परवीन, डॉ. विजयालक्ष्मी आदि की मौजूदगी रही। ‘थैलेसीमिया के बच्चों का हिमोग्लोबिन रहना चाहिए 9.5 एमजी प्रति डीएल’ - मायागंज अस्पताल के पीजी शिशु रोग विभाग में आयोजित थैलेसीमिया पर सेमिनार भागलपुर, वरीय संवाददाता पटना से आए पीडियाट्रिक हीमैट्रोलॉजिस्ट एंड अंकोलॉजिस्ट डॉ. अमित कुमार ने कहा कि थैलेसीमिया के शिकार बच्चों का हिमोग्लोबिन हमेशा ही 9.5 एमजी प्रति डीएल से ऊपर रखना चाहिए। जैसे ही इससे नीचे हीमोाग्लोबिन आता है, खून चढ़वाना सुनिश्चित करें। डॉ. अमित, मायागंज अस्पताल के पीजी शिशु रोग विभाग में थैलेसीमिया पर आयोजित सेमिनार को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने लोगों को थैलेसीमिया के कारण, लक्षण व इलाज के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने आयरन लोड पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिन बच्चों के खून में आयरन की मात्रा बढ़ती है, उन्हें समय-समय पर चिलेशन थेरेपी देना अनिवार्य है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन बच्चों का एचएलए मैचिंग हो जाता है, उनके लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक प्रभावी और लगभग पूर्णतः उपचारात्मक विकल्प है। सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए पीजी शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अंकुर प्रियदर्शी ने बताया कि शिशु रोग विभाग द्वारा थैलेसीमिया मरीजों के लिए विभाग के समीप ही थैलेसीमिया डे केयर सेंटर संचालित किया जा रहा है, जहां रोजाना औसतन 8-10 बच्चे ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए आते हैं। यहां बच्चों को ल्यूको-फ़िल्टर के माध्यम से सुरक्षित रूप से ब्लड चढ़ाया जाता है। साथ ही चिलेशन थेरेपी की दवाई डे केयर सेंटर में नियमित रूप से उपलब्ध रहती है। सेमिनार में फैकल्टी सदस्य, एसएमओ, रेजीडेंट डॉक्टर और पीजी छात्रों की मौजूदगी रही।

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