हादसे के शिकार की रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करने में अररिया सबसे पीछे
पूर्णिया के अररिया जिला ने सड़क हादसे की रिपोर्टिंग में बेहद कम प्रगति की है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के पोर्टल पर अररिया ने केवल 32.64% लक्ष्य हासिल किया है। जबकि पूर्णिया और कटिहार ने बेहतर प्रदर्शन किया है। ई-डार अपलोडिंग में विभागों के बीच समन्वय की कमी को मुख्य कारण बताया गया है।

पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से बनाए गए पोर्टल पर सड़क हादसे के शिकार व्यक्तियों की रिपोर्ट अपलोड करने में सीमांचल का अररिया जिला सबसे पीछे है। गत महीने हुई समीक्षा बैठक के दौरान यह मामला सामने आया है कि आई-रेड से ई-डीएआर पर अररिया ने महज 32.64 प्रतिशत ही लक्ष्य प्राप्त किया है। यहां आई- रेड पर 922 मामले अपलोड हुए, जबकि ई- डीएआर पर महज 301 डाटा ही अपलोड किए गए। उसी प्रकार पूर्णिया ने आई- रेड पर अपलोडेड 1265 डाटा के विरूद्ध ई- डीएआर पर 301 डाटा अपलोड कर 71.63 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया था।
उसी तरह कटिहार जिले में आई- रेड पर अपलोडेड 807 डाटा के मुकाबले ई- डीएआर पर 553 डाटा अपलोड कर 68 प्रतिशत के आसपास लक्ष्य हासिल कर लिया था। वहीं किशनगंज में आई- रेड पर अपलोडेड 361 मामले के विरूद्ध ई- डीएआर पर 184 लोगों का डाटा अपलोड किया गया है। इसके पीछे पोर्टल पर ई- डार अपलोड करने के लिए बनाए गए चार स्टैक हॉल्डरों परिवहन विभाग, पुलिस विभाग, सड़क तथा स्वास्थ्य विभाग के आपसी समन्वय में कमी को सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है। इसके लिए प्रमंडल स्तर पर हर माह समीक्षा बैठक कर जिलों को निर्देश दिए जा रहे हैं। ---:क्या है आई- रेड:-देश भर में हादसे के शिकार व्यक्तियों को मुआवजा का लाभ देने के साथ संबंधित स्थानों सड़क हादसे के कारणों के विश्लेषण के लिए केन्द्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वर्ष 2022 के अप्रैल से एक पोर्टल डेवलप किया है। जिसमें रोड एक्सिडेंट का डाटा बेस अपलोड किया जाता है। इसके लिए पुलिस की ओर से एफआईआर, पीड़ित से संबंधित दस्तावेजों जैसे आधार कार्ड, बैंक डिटेल, चालक का डिटेल तथा वाहन मालिक का डिटेल अपलोड करना होता है। इसके साथ परिवहन विभाग की ओर से दुर्घटनाग्रस्त वाहन के भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट, स्वास्थ्य विभाग की ओर से हादसे के शिकार व्यक्ति की सिविल सर्जन के स्तर से मेडिकल रिपोर्ट जैसे घायल की स्थिति एवं मृतको की पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा पथ निर्माण की ओर से जहां दुर्घटना घटित होती है, वहां की सड़क की स्थिति की ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज की जानी है। इसके बाद सभी रिपोर्ट की ई-डार यानि इलेक्ट्रोनिक डिटेल एक्सीडेंट रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड हो जाते हैं।----: ऐसे मिलती है मदद:-पोर्टल पर ई- डार अपलोड होने से दुर्घटना के शिकार व्यक्ति या उसके परिजनों को मुआवजा के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं होती है। नन हिट एंड रन से जुड़े मामले परिवहन विभाग के न्यायाधिकरण में स्वत: चले जाते हैं। जिससे पीड़ित पक्ष को मुआवजा मिलने में सहुलियत हो जाती है। इसके साथ ही साथ आइ्र- रेड पर पथ निर्माण विभाग की ओर से दाखिल प्रपत्र के चलते सम्बन्धित स्थान पर हादसे के लिए जिम्मेदार सड़क की स्थिति के अध्ययन में सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग विभाग को सहायता मिलती है। जिससे सड़क के कारण दुर्घटनाओं पर ब्रेक लगाने के उपाय ढू़ढने में मदद मिलती है।-बोले अधिकारी:- -जिले में लंबित मामलों का तेजी से निबटारा किया जा रहा है। खासकर नए मामलों में महज एक मामला लंबित है। -मनीषा कुमारी, एमवीआई पूर्णिया।
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