
विरोध के बाद क्रूज और कार्गो के लिए वैकल्पिक मार्ग की तलाश शुरू
भागलपुर में रत्तीपुर घाट के पास बैरिया धार के मुहाने पर ड्रेजिंग के विरोध के बाद जहाज परिचालन के लिए नया रास्ता खोजा जा रहा है। भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने गंगानदी में सर्वे किया। मुहाने की गहराई दो मीटर है, जबकि जहाज चलाने के लिए चार मीटर की जरूरत है।
भागलपुर, वरीय संवाददाता। रत्तीपुर घाट के पास बैरिया धार के मुहाने पर ड्रेजिंग कर गाद और मिट्टी हटाने के विरोध के बाद जहाज परिचालन के लिए वैकल्पिक रास्ते की तलाश शुरू हो गई है। भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण की ओर से गंगानदी में भागलपुर होकर कहलगांव व सुल्तानगंज की ओर जहाज की आवाजाही के लिए सोमवार को दिनभर सर्वे किया गया। प्राधिकरण के अनुसार इस समय गंगा की मुख्य धार व बैरिया धार से पानी का बहाव हो रहा है। मुहाने की गहराई महज दो मीटर है। जबकि जहाज के परिचालन के लिए कम से कम चार मीटर गहराई जरूरी है।
गंगा की मेन धारा से मानिक सरकार घाट के बीच चार किलोमीटर लंबे बैरिया धार के अधिकांश हिस्से की गहराई औसतन चार से छह मीटर है। सिर्फ मुहाने की गहराई कम होने के कारण यहां ड्रेजिंग शुरू किया गया था। ड्रेजिंग के अभाव में इस होकर जहाज का परिचालन अब संभव नहीं है। बाढ़ खत्म होने के बाद इसकी गहराई कम हो गई है। वहीं एक माह बाद इस होकर पानी बहना भी बंद हो जाएगा। ऐसे में कोलकाता से पटना के बीच टूरिस्ट क्रूज व गुड्स कार्गो का परिचालन के लिए रास्ता तय करना होगा। 26 नवंबर को गुजरेगा गंगा विलास टूरिस्ट क्रूज : प्राधिकरण के पदाधिकारी रवि कौशिक ने बताया कि कहलगांव की ओर से आने वाले जहाज को सबौर के बाबूपुर घाट के पास से नवगछिया अनुमंडल के महादेवपुर घाट की ओर से निकाला जाएगा। लेकिन नवगछिया हाईलेवल के पास गंगानदी की सतह व विक्रमशिला सेतु के बीच जगह कम है। पानी कम होने के बाद ही ऊंचे जहाज इस होकर निकल सकते हैं। जबकि बरारी घाट के पास नदी व पुल के बीच काफी गैप है। लेकिन बरारी घाट पर धारा बंद होने से इस होकर जहाज नहीं चल सकता है। इसी समस्या के निदान के लिए बैरिया धार को जीवित रखने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। बता दें कि 26 नवंबर को गंगा विलास पर्यटक क्रूज भागलपुर पहुंचेगा। प्राधिकरण जहाज के ठहराव के लिए उपयुक्त घाट के चयन में लगा हुआ है।

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