
एआई इंसानों का मददगार, समाज हित में हो इसका इस्तेमाल
फोटो मारवाड़ी कॉलेज में आत्मनिर्भर भारत के लिए एआई विषय पर सेमिनार आयोजित डिग्री
भागलपुर, कार्यालय संवाददाता। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आज के दौर की जरूरत है, लेकिन इसका उपयोग समाज के फायदे के लिए रचनात्मक तरीके से होना चाहिए। एआई को इंसानी बुद्धिमत्ता की मदद के लिए डिजाइन किया गया है, न कि उसे बदलने के लिए। यह बातें सोमवार को मारवाड़ी कॉलेज में आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में मुख्य वक्ता और टीएमबीयू के पीजी भौतिकी विभाग के डॉ. कमल प्रसाद ने कही। एआईसीटीई की एमआईसी गतिविधि के तहत आयोजित इस सेमिनार का विषय आत्मनिर्भर भारत के लिए एआई: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की ओर एचईआई प्री-समिट जुड़ाव था। डॉ. प्रसाद ने छात्रों को बिग डेटा एनालिटिक्स, पायथन, न्यूरल नेटवर्क मॉडल और मशीन लर्निंग जैसे उभरते क्षेत्रों की जानकारी दी।
उन्होंने मिथकों को तोड़ते हुए कहा कि एआई नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि मिथिला पेंटिंग जैसी स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, चुनाव विश्लेषण और जलवायु अध्ययन में भी एआई का बेहतरीन उपयोग हो सकता है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे अपने रेगुलर डिग्री कोर्स के साथ कोर्सेरा जैसे प्लेटफॉर्म से एआई में सर्टिफिकेट कोर्स जरूर करें, ताकि करियर में आगे बढ़ सकें। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. संजय कुमार झा ने एआई के ऐतिहासिक विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक, एआई की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा में एआई के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम का समन्वय वनस्पति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. कुमार मनोज ने किया। उन्होंने अतिथियों का स्वागत किया और धन्यवाद ज्ञापन दिया। सेमिनार में संस्थान की इनोवेशन काउंसिल के सदस्यों और फैकल्टी के साथ 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और एआई की बारीकियों को समझा।

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