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आओ राजनीति करें: राजनीति के मुद्दे पर महिलाओं ने बेबाकी से रखी अपनी राय

BHAGALPUR: aao rajneeti karein

1 / 5परबत्ती स्थित हिंदुस्तान कार्यालय में 'आओ राजनीति करें' विषय पर आयोजित संवाद में अपने-अपने विचार रखने पहुंची शहर की विभिन्न संस्थाओं की महिलाएं।

BHAGALPUR: aao rajneeti karein

2 / 5महिलाएं शिक्षित होंगी तो खुद उन्हें अधिकार की जानकारी मिल जाएगी। तब वह किसी के कहने पर वोट नहीं डालेंगी। अंजना प्रकाश,रोटरी पिंक विक्रमशिला लड़कियों को घर से बाहर निकलने पर ही उन्हें तमाम जानकारियां मिल सकेंगी। नैनी रानी अग्रवाल,लायंस क्लब फेमिना

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3 / 5सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय होना चाहिए। पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार लाने की विशेष पहल हो। मोनिका महेशिका, सचिव, रोटरी पिंक शहर में तो बेटियां पढ़ रही हैं, लेकिन गांव में शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सुरक्षा भी अहम है। श्वेता कुमारी, उप निर्वाचन अधिकारी

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4 / 5समाज को विकसित करने के लिए बेटियां की पढ़ाई जरूरी है तभी वह समाज व देश को आगे बढ़ाने में योगदान देंगी। प्रीति कुमारी, अधिवक्ता लड़कियां साक्षर होकर ही सामाजिक कुरीतियों को दूर कर सकती हैं। सरकार को बेटियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि उनके अंदर असुरक्षा की भावना नहीं रहे। प्रीति पाण्डेय, रोटरी पिंक की पूर्व सचिव

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5 / 5महिलाओं में जागरूकता लाने की जरूरत है। इगो छोड़कर महिलाओं को एक-दूसरे के साथ कदम मिलाकर चलना चाहिए। समाज में कोई महिला अगर आगे बढ़ रही है तो उसे प्रोत्साहित करें। - अरुणिमा सिंह, अध्यक्ष, उड़ान जैसे-जैसे बेटियां साक्षर होती जाएंगी, उसकी समस्याएं खुद-ब-खुद कम होती जाएंगी। - गुंजन, सक्षम फाउंडेशन

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आओ राजनीति करें विषय पर हिंदुस्तान अखबार के कार्यालय में बुधवार को संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न संगठनों, वर्गों व आंदोलनों से जुड़ी महिलाओं ने भाग लिया।

इस दौरान आधी आबादी ने राजनीति के तौर-तरीकों पर न केवल बेबाकी से अपनी राय रखी, बल्कि बेटियों को राजनीति के लिए मानसिक रूप से तैयार होने के लिए आगे आने की वकालत भी की। इनलोगों ने पति, बेटे और पिता की इच्छा पर वोट डालने पर चिंता जाहिर की। कहा कि महिलाओं को अपनी मर्जी से वोट डालना चाहिए। साथ ही महिलाओं से हक की लड़ाई के लिए आगे आने की अपील की।
 
कार्यक्रम में लायंस क्लब ऑफ सिल्क सिटी की अध्यक्ष अलका दुग्गड़ ने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ मुद्दा अगर चुनाव में बने तो घर का बजट बनाने वाली महिलाएं देश के बजट में अपनी सशक्त मौजूदगी दर्ज करा सकेंगी। रोटरी क्लब विक्रमशिला पिंक की सदस्य अनीता अनवर ने कहा कि बेटियां जब तक नहीं पढ़ेंगी, तब उन्हें समाज का पितृ समाज अपनी इच्छा से बरगलाता रहेगा। फेमिना भागलपुर की अध्यक्ष सारिका खेतड़ीवाल की चिंता स्कूलों में बेटियों के लिए बेहतर शिक्षा के संसाधन व बदतर शौचालय और माहौल को लेकर रही।
 
उन्होंने कहा कि स्कूलों में काम करने पर एनजीओ पर लगाये गये प्रतिबंध को हटाना चाहिए, ताकि हम जैसी महिलाएं बेटियों की बेहतरी के लिए कुछ काम कर सकें। अधिवक्ता शशिकला ठाकुर ने कहा कि हम महिलाएं अपने वोट की वैल्यू समझती ही नहीं हैं।  घर के सदस्य अपने मन मुताबिक वोट डलवा देते हैं। हमें वादाखिलाफी के खिलाफ वोटिंग करने का हुनर सीखना होगा। रॉक एंड रॉल स्कूल की प्राचार्य पूनम पांडेय ने कहा कि अक्सर महिलाओं को घर से बाहर निकलते वक्त घर के पुरुष सदस्यों से ह्यअब कहां चल दी।ह्ण जैसे सवाल सुनना पड़ता है। इन सवालों से आधी आबादी को मुक्ति चाहिए, ताकि हम भी स्वछंद होकर अपने तय तरीके से वोट कर सकें और राजनीति भी।
 
जिला निर्वाचन विभाग की ब्रांड एंबेसेडर ऋचा झा ने कहा कि घर की दहलीज में रह रही महिलाओं को स्वरोजगार के जरिये उन्हें समाज के बीच स्थापित करना होगा, ताकि वे अपने हक, वोट व अपनी भूमिका को जान सकें। जब हम एक साड़ी को खरीदने के लिए दर्जनों साड़ियों को देखते-परखते हैं तो प्रत्याशी चुनते वक्त हम किसी और का कहा क्यों माने। गंगा समग्र अभियान की प्रदेश कार्यकारणी सदस्य श्वेता सिंह ने कहा कि जब पुरुष चुनाव नहीं लड़ पाता है, तब वह अपनी जगह पर मां, बेटी, पत्नी व बहू को चुनाव लड़ाता है। महिलाओं को विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बनाना होगा। हमें चुनाव चिह्न के आधार पर नहीं, बल्कि अच्छे प्रत्याशी को चुनना होगा। 

सक्षम फाउंडेशन की अध्यक्ष संगीता तिवारी ने कहा कि महिलाओं को उद्योग, सड़क और योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधक बन रहे भ्रष्टाचारमुक्त राजनीति की वकालत करनी होगी। योग हेल्थ क्लब की सचिव अनीता सिंह कौशिक ने कहा कि महिलाओं के लिए सत्ता में भागीदारी के लिए बने रोस्टर को ईमानदारीपूर्वक क्रियान्वयन की राजनीति करनी होगी। जीवन जागृति सोसाइटी से जुड़ी अंशु सिंह ने कहा कि हमें फीमेल टू फीमेल कनेक्ट की राजनीति करनी होगी, न कि एक-दूसरे की राह में रोड़ा अटकाने की राजनीति। धर्म, जाति के भंवर से निकलकर महिला राजनीति करनी होगी। हमें स्वतंत्र होकर अपना वोट करना होगा। 

बेबाक बातचीत में निकले ये मुद्दे

  • घर का बजट बनानेवाली महिलाओं की देश के बजट में हो भागीदारी
  • महिलाएं सिर्फ वोट देने का ही माध्यम न बनें
  • राजनीति के लिए जरूरी है कि महिलाएं अपने वोट का मूल्य जानें
  • सुरक्षा, शिक्षा, सशक्तीकरण से होगी राजनीति में सक्रियता
  • लीक से हटकर अपने हक-हकूक के लिए मुखर हो महिला
  • महिला को आत्मनिर्भर बनाने की राजनीति हो
  • हमें सुनने की जरूरत नहीं, अब हमलोगों को सुने जमाना


मिले सुझाव

  • महिला सशक्तीकरण के लिए बेटियों को परिवार से ही मिले बेहतर शिक्षा व आजाद माहौल
  • वोट के लिए खुद जागें और समाज की महिलाओं को भी जगाने का प्रयास करें 
  • अपने-अपने घर से ही करें अपने हक-हकूक को हासिल करने की शुरुआत
  • अपनों के लिए और अपने लिए जीने की राजनीति करें महिलाएं पढ़ेंगी तभी आगे बढ़ेंगी बेटियां
  • महिलाएं घर के पुरुषों का नहीं बल्कि राजनीति का विकल्प बनें 

क्या कहना है महिलाओं का
रोटरी पिंक विक्रमशिला से जुड़ीं मृदुला घोष ने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा जरूरी है। आज महिलाओं के साथ घिनौनी हरकत की जा रही है। ऐसी परिस्थितियों से बेटियों में भय का माहौल है। उसके लिए भयमुक्त होकर कहीं भी पढ़ाई, नौकरी या व्यवसाय करने का माहौल बनाएं।

सक्षम फाउंडेशन की क्रांति पाठक ने बताया कि सरकार को प्रत्येक गांवों में स्कूल खोलना चाहिए। बेटियां जब पढ़ेंगी तभी समाज आगे बढ़ेगा। लड़कियों की सुरक्षा के लिए उन्हें स्कूली स्तर पर जूडो-कराटे का प्रशिक्षण दिया जाए। इससे उनके अंदर आत्मविश्वास आ सके।

लायंस क्लब भागलपुर की सीमा हिम्मतशिका ने कहा कि बेटी के प्रति लोगों को जागरूक होना होगा। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे को साकार करने की जरूरत है। अगर बेटियां पढ़ती हैं तो खुद उसे अधिकार की जानकारी मिल जाएगी। वह स्वतंत्र होकर निर्णय ले सकती है।

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  • Web Title:aao rajneeti karein: When womens told their opinions on the issue of politics