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आओ राजनीति करें: हालात तो बदले हैं, लोगों को अब बेटियां बोझ नहीं लगतीं...

aao rajneeti karein at bhagalpur

1 / 5भागलपुर के विक्रमशिला कॉलोनी में आओ राजनीति करें कार्यक्रम में मौजूद अतिथि।

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2 / 5आओ राजनीति करें में रंजु देवी और पिंकी झा अपने विचार रखतीं।

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3 / 5आओ राजनीतिक करें में अमिता कौशिक और पिंकी बागड़िया अपनी बात रखीं।

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4 / 5आओ राजनीतिक करें में अंजना सिंह और मनीषा सिंह अपनी बात रखीं।

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5 / 5आओ राजनीतिक करें में मंजु देवी और निखार ने अपनी बात रखीं।

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आओ राजनीति करें मुहिम के तहत हिन्दुस्तान का लश्कर शुक्रवार को विक्रमशिला कॉलोनी पहुंचा। यहां चाय चौपाल लगी, जहां चाय की चुस्कियों के बीच चुनाव पर चर्चा हुई। महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर भी लोगों की राय जानी गई। चाय चौपाल में में महिलाओं से संबंधित मुद्दे ज्यादा उठे। आधी आबादी भी अपने हक को लेकर जागरूक दिखीं।  

इसके तहत महिलाओं ने कहा कि हालात तो बदले हैं, लोगों को बेटियां अब बोझ नहीं लगतीं। अब बेटियों को पढ़ाने का माहौल है। कई स्तर पर सरकारी प्रोत्साहन है, लेकिन उससे भी बढ़कर लोगों की सोच बदली है। अब ऐसा नहीं लगता कि बेटियों की शादी करना ही जिम्मेदारी है, बल्कि ज्यादातर मां-बाप बेटियों को बेटों की तरह ही पढ़ा रहे हैं। उसकी हर हसरत पूरी करना चाहते हैं। महिलाओं की इस बात पर वहां जमा पुरुषों ने तालियां भी बजायी।

 पिंकी बागड़िया बोलीं, पहले बेटियों को घर से बाहर भेजने में चिंता होती थी। ट्यूशन जाने में साथ जाना होता था। अब ऐसे हालात नहीं हैं। पिंकी झा ने कहा कि पहले समाज के अधिकांश परिवार में महिलाओं पर बेटा होने का दबाव होता था। अब बेटियों के जन्म पर भी खुशियां मनायी जाती है। आदर्श स्थिति का दावा तो नहीं, लेकिन अब बेटियों के जनने पर महिलाएं दुत्कार और नफरत की वजह नहीं बनतीं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना को महिलाएं सार्थक मान रहीं हैं, लेकिन सुरक्षा और निचले स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में सरकारी मशीनरी की सक्रियता में सुधार चाहती हैं। लोगों ने कहा कि सरकार की योजननाओं में महिलाओं के लिए अवसर बढ़ाने पर विचार हो। राजनीतिक भागीदारी बढ़े।

पंचायत और निकायों में स्वछंदता बढ़े
चाय चौपाल में जब महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी की बात उठी तो पंचायत और निकाय में आरक्षण की निंदा नहीं की, लेकिन डमी जनप्रतिनिधि का मसला जरूर उठा। लोगों ने कहा कि जहां कोई महिला स्वयं स्वछंद होकर नेतृत्व कर रहीं, वहां की स्थिति अच्छी है लेकिन कई जगहों पर आरक्षण से जीती महिला हैं, लेकिन बागडोर पुरुष के हाथ में है। यह नजारा आरक्षण का माखौल की तरह लगता। यह नहीं हो तब वैसीं महिलाएं सामने आएंगी जो वास्तव में नेतृत्व कर सकती हैं। कार्यक्रम में रवीन्द्र कुमार सिंह, मनोज बुधिया, अजय कुमार, प्रकाश गोयनका, रमण सिंह, गुलाशन भारद्वाज, कुमार विकास, रीतेश कुमार सिंह, रोहित कुमार, विकास सिंह, प्रांजित सिंह, मनोज मिश्रा, मानस कुमार सिंह, गंगेश गुंजन, राजेश टंडन व सूरज शर्मा भी थे।

सरकारी स्तर पर तत्परता की है कमी
चाय चौपाल में जुटे लोगों ने कहा कि महिलाओं के हक में कानून कई बने हैं, लेकिन क्रियान्वयन में तत्परता की कमी है। दहेज उन्मूलन अधिनियम लागू तो हुआ लेकिन यह देखना जरूरी है कि हर स्तर पर इसका अनुपालन हो रहा है या नहीं। अब आदर्श विवाह का चलन बढ़ा है, लेकिन अभी इसके लिए और कारगर कदम उठाने की जरूरत है। प्रशासनिक स्तर पर दहेज लोभियों पर नकेल लगाने की कवायद हो। इसके लिए और क्या हो सकता है, यह सोचने की जरूरत है।

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  • Web Title:Aao rajneeti karein: circumstances have changed and now daughters have not feel burdened