पूर्णिया: सदगुरू आचार्य श्री धर्म स्वरुप साहब की मूर्ति का निर्माण सांसद कराएंगे
पूर्णिया में जीवन ज्योति केंद्र संत कबीर नगर में 46वें सद्गुरु कबीर सत्संग महोत्सव का आयोजन हुआ। सांसद प्रवक्ता राजेश यादव ने कार्यक्रम में भाग लिया और कबीर साहब के विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज में प्रेम, करुणा और समरसता का संदेश दिया। श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत जीवन ज्योति केंद्र संत कबीर नगर (पूर्णिया कोर्ट परिसर) में सत्संग समिति एवं आश्रम के संत ब्रह्मचारीगण द्वारा आयोजित 46वें सद्गुरु कबीर सत्संग महोत्सव (महाकुंभ) में सांसद प्रवक्ता राजेश यादव ने सहभागिता कर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत एवं कबीर पंथ से जुड़े अनुयायी उपस्थित रहे, जहां आध्यात्मिक वातावरण में सत्संग और विचार-विमर्श का आयोजन किया गया। मौके पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने भी मोबाइल से जनता को संबोधित करते हुए अगले वर्ष सदगुरू आचार्य श्री धर्म स्वरुप साहब के स्मारक पर मूर्ति निर्माण की बात कही।
उन्होंने अगले साल मूर्ति अनावरण की भी बात कही। महोत्सव के दौरान सांसद प्रवक्ता राजेश यादव ने सत्संग को संबोधित करते हुए सद्गुरु कबीर साहेब के अमूल्य विचारों और उपदेशों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कबीर साहेब ने समाज को जाति, धर्म और पाखंड से ऊपर उठकर मानवता, प्रेम, करुणा और सामाजिक समरसता का मार्ग दिखाया। उनके दोहे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और समाज को सही दिशा देने की क्षमता रखते हैं। वर्तमान समय में जब समाज कई तरह की चुनौतियों और वैचारिक विभाजन से गुजर रहा है, ऐसे में कबीर साहेब का दर्शन हमें आपसी भाईचारे, सहिष्णुता और प्रेम का संदेश देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे कबीर साहेब के विचारों को केवल सुनें नहीं, बल्कि अपने जीवन में उतारें, ताकि एक बेहतर, संवेदनशील और समतामूलक समाज का निर्माण हो सके। कार्यक्रम के अंत में सांसद प्रवक्ता राजेश यादव ने सत्संग समिति एवं आश्रम के संत ब्रह्मचारीगण को इस भव्य और अनुशासित आयोजन के लिए धन्यवाद दिया तथा भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज को जोड़ने और जागरूक करने की अपील की। श्रद्धालुओं ने भी इस अवसर पर आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का अनुभव किया। इस मौके पर आचार्य संत जितेन्द्र साहब, संजीव सुभम आदि मौजूद रहे।

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