बोले पूर्णिया : पूजा पंडाल मार्गों पर जाम से श्रद्धालुओं को दिक्कत

बोले पूर्णिया : पूजा पंडाल मार्गों पर जाम से श्रद्धालुओं को दिक्कत

संक्षेप:

मधुबनी का 118वां दुर्गा पूजा महोत्सव पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। 1907 में स्थापित इस पूजा में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। हालांकि ट्रैफिक जाम और शौचालय जैसी समस्याएं...

Sep 29, 2025 02:34 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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प्रस्तुति : मुकेश कुमार श्रीवास्तव मधुबनी का 118वां दुर्गा पूजा महोत्सव इस बार भी पूरे हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। 1907 में स्थापित यह पूजा आज न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं बल्कि आसपास के जिलों के लोगों के लिए भी आस्था और आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। हालांकि ट्रैफिक जाम और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी अब भी चुनौती बनी हुई है, लेकिन समिति और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से इन समस्याओं का समाधान संभव है। श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सुव्यवस्था के साथ यह महोत्सव धार्मिक विश्वास के साथ-साथ स्थानीय विकास और सांस्कृतिक समृद्धि का संदेश भी दे रहा है।

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पूर्णिया जिला स्थित ऐतिहासिक सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति, मधुबनी इस वर्ष लगातार 118वीं बार मातारानी की भव्य पूजा और आयोजन का केंद्र बनी हुई है। वर्ष 1907 में स्थापित इस पूजा का इतिहास न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करता है। आज यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक धरोहर और स्थानीय विकास का प्रतीक बन चुका है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार प्रारंभ में यह पूजा चुनापुर में हुआ करती थी। बताया जाता है कि एक समय माता रानी ने अपने भक्त को स्वप्न में दर्शन देकर आदेश दिया कि उनकी पूजा मधुबनी में स्थापित की जाए। इसके बाद भक्तों ने आपसी परामर्श से माता का डोला चुनापुर से मधुबनी आमंत्रित किया। जिस स्थान पर आज दुर्गा मंदिर स्थित है, वहीं माता का डोला अवतरित हुआ। बाद में स्थानीय जमींदार ने यह भूमि दान कर मंदिर की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। तभी से यह क्षेत्र आस्था और विश्वास का प्रतीक बन गया। यहां यह मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई कोई भी मन्नत मां अवश्य पूर्ण करती हैं और कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। यही कारण है कि वर्षों से श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मधुबनी का दुर्गा पूजा महोत्सव नवरात्र के पूरे नौ दिनों तक चलता है। सुबह से देर रात तक वातावरण में मंत्रोच्चार, शंखनाद, ढाक-ढोल और घंटियों की गूंज श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर देती है। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजकर मां के दरबार में पहुंचती हैं और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करती हैं। इसकी सबसे खास विशेषता है यहां की महाआरती, जो पहली पूजा से लेकर दशमी तक प्रतिदिन आयोजित होती है। इसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं और पूरा वातावरण भक्ति रस में सराबोर हो जाता है। माता के जयकारे, शंखध्वनि और भजनों की गूंज एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण सबसे बड़ी चुनौती ट्रैफिक व्यवस्था की रहती है। मंदिर मोहल्ले के बीच स्थित है और सड़कें संकरी होने के कारण पूजा और महाआरती के समय जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। समिति के सचिव कपिलदेव प्रसाद ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उचित ट्रैफिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़े और किसी तरह की दुर्घटना से बचाव हो सके। दूसरी बड़ी समस्या है शौचालय और पेयजल सुविधा की कमी। प्रतिदिन हजारों लोग यहां जुटते हैं, लेकिन आसपास सार्वजनिक शौचालय और स्वच्छ पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं है। समिति ने नगर निगम से अपील की है कि पूजा अवधि के दौरान चलंत शौचालय और पेयजल टैंकर उपलब्ध कराए जाएं। इससे स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधा दोनों सुनिश्चित हो सकेंगी। नवरात्र के सप्तमी से यहां विशाल मेला आयोजित किया जाता है। यह मेला पूरे क्षेत्र को उत्सवमय बना देता है। झूले, खिलौनों की दुकानें, मिठाई और खाने-पीने के स्टॉल बच्चों और परिवारों के लिए बड़े आकर्षण का केंद्र रहते हैं। भक्ति और सांस्कृतिक रंग में पूरी तरह है रंग जाता इस दौरान भजन संध्या, देवी जागरण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाती हैं, जिससे माहौल पूरी तरह भक्ति और सांस्कृतिक रंग में रंग जाता है। पूरे नौ दिनों में स्थानीय कलाकारों और भजन मंडलियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। धार्मिक गीत-संगीत से वातावरण गूंज उठता है और लोग देर रात तक पूजा स्थल पर बने रहते हैं। यहां की एक महत्वपूर्ण पारंपरिक प्रथा है बलि प्रथा। हर साल नवरात्रि में लगभग 500 बकड़ों की बलि दी जाती है। इसे स्थानीय परंपरा और आस्था का अभिन्न अंग माना जाता है। आसपास के गांवों से भारी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल होते हैं। भले ही आधुनिक दृष्टिकोण से इस परंपरा पर सवाल उठते हों, लेकिन यहां के लोग इसे माता का आशीर्वाद पाने का माध्यम मानते हैं। मधुबनी दुर्गा पूजा स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक देता है। पूजा के दौरान लगने वाले अस्थायी बाजार से छोटे व्यावसायी और दुकानदारों की आय में कई गुना वृद्धि होती है। फूल, प्रसाद, पूजा सामग्री, मिठाई और खिलौनों की बिक्री में भारी इजाफा होता है। स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्त्र भी इस दौरान खूब बिकते हैं, जिससे कारीगरों को अच्छा लाभ मिलता है। यह आयोजन क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए मौसमी उत्सव से आगे बढ़कर एक बड़े आर्थिक सहारे के रूप में स्थापित हो चुका है। समिति के सचिव कपिलदेव प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि बढ़ती भीड़ और चुनौतियों को देखते हुए समिति प्रशासन के साथ निकट समन्वय बनाए हुए है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे पूजा के दौरान अनुशासन और अनुशासित व्यवहार बनाए रखें। समिति का कहना है कि प्रशासन यदि ट्रैफिक प्रबंधन, स्वच्छता और पेयजल की समस्या पर ध्यान दे, तो सभी श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है। आज मधुबनी दुर्गा मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान का केंद्र भी है। यहां लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालु धार्मिक ऊर्जा के साथ-साथ सामाजिक एकता का संदेश भी लेकर जाते हैं। इस तरह यह आयोजन आस्था और आधुनिकता का संगम प्रस्तुत करता है। पूर्णिया की ऐतिहासिक सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति, मधुबनी का यह महोत्सव 118 वर्षों की अनूठी परंपरा को जीवित रखते हुए समाज को धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से मजबूत कर रहा है। हर वर्ष बढ़ती आस्था और सहभागिता इस पूजा को और भव्य बनाती है। यह महोत्सव सचमुच इस तथ्य को मजबूत करता है कि धार्मिक आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक धरोहर और स्थानीय प्रगति का आधार भी होते हैं। इनकी भी सुनिए वर्ष 1907 में स्थापित यह पूजा न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए बल्कि आसपास के जिलों के लोगों के लिए भी आस्था का केंद्र बन चुकी है। - विश्वनाथ झा ,अध्यक्ष जिला प्रशासन से उचित ट्रैफिक प्रबंधन की व्यवस्था करने की मांग करते है। ताकि श्रद्धालुओं को मां की दर्शन करने में कोई परेशानी का सामना न करना पड़े। - कपिलदेव प्रसाद, सचिव महाआरती का अद्भुत नजारा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर देता है। मधुबनी का दुर्गा पूजा महोत्सव इस बार भी पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। - मनोरंजन कुमार सिन्हा यहां की ऐतिहासिक परंपरा, भव्य महाआरती, सांस्कृतिक आयोजन और भक्तिमय वातावरण लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। - राजेश केशरी मधुबनी दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर देता है। वही ट्रैफिक और शौचालय जैसी बुनियादी समस्याएं अब भी चुनौती बनी हुई हैं। - संजय कुमार सिन्हा आने वाले दिनों में यहां श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। इसलिए बेहतर व्यवस्था और सुविधाओं पर ध्यान देना आवश्यक है। -उदय श्रीवास्तव मंदिर मोहल्ले के बीच स्थित है और सड़क संकरी होने के कारण पूजा एवं महाआरती के समय यहां अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। ट्रैफिक दुरूस्त करने की जरूरत। -श्याम सुन्दर यह दुर्गा पूजा पहले चुनापुर में होती थी। बताया जाता है कि एक समय माता रानी ने स्वप्न में अपने भक्तों को दर्शन देकर इस पूजा को मधुबनी में स्थापित करने का आदेश दिया था। -विनोद सिन्हा हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इस वर्ष भी हजारों की संख्या में महिला-पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग सुबह से ही पूजा में शामिल होने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं। - मनोज कुमार यही कारण है कि यह स्थान आज भी पूरे क्षेत्र के लिए श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। मधुबनी दुर्गा मंदिर के बारे में यह मान्यता है कि यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। - श्रीकांत सिन्हा, उपाध्यक्ष भक्तों ने माता रानी को चुनापुर से आमंत्रित कर का डोला में लेकर मधुबनी इसी स्थान पर लाया था। जहां डोला स्वत: पींड का रूप ले लिया, तभी से यहां मां दुर्गा की पूजा होती आ रही है। - तारानंद सहाय पहली पूजा से प्रारंभ होकर दशमी तक चलने वाली महाआरती में हजारों लोग शामिल होते हैं। महिला-पुरुष माता के जयकारे लगाते हैं, शंखनाद और घंटियों की ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। -सुवीर कुमार सप्तमी से मला का भव्य आयोजन किया जाता है। इस दौरान पूरा क्षेत्र मेले के रूप में तब्दील हो जाता है। बच्चों के लिए झूले, खिलौनों और खाने-पीने के स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं। - मनोज कुमार सिन्हा पूजा के दौरान लगने वाले अस्थायी बाजार में छोटे व्यापारी और दुकानदार अच्छी कमाई कर लेते हैं। फूल, प्रसाद, मिठाई और पूजा सामग्री की बिक्री में खासा इजाफा होता है। - डा. संजीव कुमार यहां की एक और खास परंपरा है बलि प्रथा। प्रतिवर्ष नवरात्रि के दौरान लगभग 500 बकड़ों की बलि दी जाती है। आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोग विशेष रूप से इस परंपरा में शामिल होने आते हैं। - गौतम वर्मा इस प्रकार के धार्मिक आयोजन न केवल लोगों की आस्था को मजबूत करते हैं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी नई जान फूंकते हैं। छोटे दुकानदारों की बिक्री में कई गुना वृद्धि हो जाती है। - प्रिंस सिन्हा बोले िजम्मेदार मधुबनी दुर्गा पूजा समिति के सभी सदस्यों को दुर्गा पूजा एवं दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं। समिति द्वारा उठाए गए मुद्दों के समाधान के लिए प्रशासन गंभीर है। ट्रैफिक समस्या के निवारण के लिए ट्रैफिक डीएसपी से वार्ता कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। वहीं, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर आयुक्त को चलंत शौचालय एवं शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाएगा। मां दुर्गा के दरबार में दर्शन और पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए हर स्तर पर समुचित प्रबंध किए जा रहे हैं। - विजय कुमार खेमका, विधायक , पूणिया सदर विधान सभा क्षेत्र शिकायत 1. मंदिर की सड़क संकरी होने के कारण पूजा और महाआरती के समय घंटों तक जाम लग जाता है। 2. आसपास पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं है, लोग सड़क किनारे गाड़ियां खड़ी कर देते हैं। 3. पूजा स्थल के आसपास शौचालय नहीं होने से श्रद्धालुओं को काफी परेशानी होती है। 4. इतने बड़े आयोजन में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को निजी पानी की बोतलों पर निर्भर रहना पड़ता है। 5. पर्याप्त पुलिस बल या स्वयंसेवक तैनात नहीं होते। सुझाव 1. पूजा स्थल के आसपास वन-वे ट्रैफिक सिस्टम और बैरिकेडिंग लगाई जाए। ताकि जाम से बचा जा सके। 2. नजदीकी खाली मैदान या स्कूल परिसर को पूजा अवधि में पार्किंग के लिए इस्तेमाल किया जाए। 3. नगर निगम की ओर से मोबाइल टॉयलेट लगाए जाएं और नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। 4. सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था के लिए टैंकर और वाटर फिल्टर प्वाइंट लगाए जाएं। 5. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त संख्या में ट्रैफिक पुलिस और स्वयंसेवकों की ड्यूटी लगाई जाए।