जीवित्पुत्रिका व्रत आज, संतान के दीर्घायु की करेंगी कामना

जीवित्पुत्रिका व्रत आज, संतान के दीर्घायु की करेंगी कामना

संक्षेप:

भभुआ में महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका व्रत की तैयारी की। बाजार में नोनी साग 80 रुपए, कंदा 100 रुपए किलो और सतपुतिया 5 रुपए पीस बिकी। महिलाओं ने व्रत के लिए जरूरी सामान की खरीदारी की और 24 घंटे का निर्जला...

Sep 13, 2025 08:56 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भभुआ
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नोनी साग 80 व कंदा 100 रुपए किलो और सतपुतिया पांच रुपए पीस बिका बाजार में खीरा की भी मांग दिखी, व्रती महिलाओं ने मिष्ठान भोजन किया ग्रहण (पेज चार) भभुआ, एक प्रतिनिधि। महिलाओं ने शनिवार को नहाय-खाय के साथ जीवित्पुत्रिका व्रत शुरू किया। इस पर्व को लेकर महिलाओं ने नोनी की साग, सतपुतिया, खीरा, कंदा, मड़ुआ का आटा आदि जरूरी चीजों की खरीदारी की। भभुआ शहर के बाजार में नोनी की साग 80 रुपए और कंदा 100 रुपए किलो बिक रहा था। जबकि सतपुतिया पांच रुपए पीस बिकी। बाजार में खीरा की मांग खूब दिखी। मड़ुआ का आटा किसी-किसी दुकान पर बिक रहा था।

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व्रती महिलाओं को इस आटा के लिए कई दुकानों का चक्कर लगाना पड़ा। फल का दाम भी बढ़ा था। व्रती रविवार को व्रत रख संतान की सलामती व दीर्घायु की कामना करेंगी। सरोवरों में स्नान कर भगवान जीऊतवाहन तथा चील व सियारिन की कथा सुनेंगी। घरों की साफ-सफाई व धुलाई के बाद 24 घंटे का निर्जला व्रत रखेंगी। महिलाओं ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। पर्व को लेकर महिलाओं ने बाजार से साड़ी, शृंगार के सामान के अलावा दान-पुण्य की सामग्री की खरीदारी की। अधिकतर महिलाएं सोने व चांदी की जिउतिया को रेशम की डोर में गुथवाते देखी गईं। शहर के एकता चौक, पटेल चौक, जेपी चौक, कचहरी पथ, सीवों चौक में जिउतिया गुथनेवाली कई अस्थायी दुकानें खुली थीं, जहां महिलाओं की भीड़ लगी थी। व्रती माताएं समूह में सरोवरों में जाएंगी और डुबकी लगाने के बाद पूजा-अर्चना करेंगी। फिर भगवान जीऊतवाहन तथा चील व सियारिन की कथा सुनेंगी। अगले दिन रविवार को प्रसाद ग्रहण कर पारण करेंगी। यह व्रत काफी कठिन वाला है। बिना कुछ खाए-पीए 24 घंटों तक संतान के सुख, समृद्धि व दीर्घायु होने की कामना करेंगी। व्रत को ले क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य इस वर्ष जीवित्पुत्रिका व्रत को मनाए जाने को लेकर पंचांगों एवं शास्त्रों तथा लोकमत में विषमता दिखाई दे रही है। ज्योतिषाचार्य पंडित वागीश्वरी प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि पंचांगों में छपे निर्णय एवं जीवित्पुत्रिका व्रत कथा के अनुसार, सप्तमी युक्त अष्टमी का व्रत निषेध माना जाता है। सिंधु ग्रंथ में भी इसका उल्लेख किया गया है। पंचांगों के संपादक ने सप्तमीयुक्त अष्टमी व्रत करने के लिए निर्देशित किया है। जबकि ऐसा किसी प्रामाणिक ग्रंथ में नहीं है। उन्होंने बताया कि मैथिली निबंध इस तथ्य की पुष्टि करता है कि गोधूलि बेला में यदि अष्टमी भोग कर रही है, तो जीवित्पुत्रिका व्रत मनाया जा सकता है। ऐसे में लोकमत को ध्यान में रखते हुए 14 सितंबर को ही जीवित्पुत्रिका व्रत मनाया जाएगा। इस बात को जगद्गुरु शंकराचार्य ने भी लिखा है कि लोक विरुद्धं करणीयं यद्यपि शास्त्र प्रशस्त। फोटो- 13 सितंबर भभुआ- 3 कैप्शन- जीवित्पुत्रिका को लेकर शनिवार को शहर के मुंडेश्वरी सिनेमा हॉल के पास नोनी की साग व झिंगा की खरीदारी करते लोग।