
चुनाव बाद भी पटरी पर नहीं लौटा कूड़ा उठाव अभियान
संक्षेप: भगवानपुर गांव में घरों से कचरा उठाने का अभियान शिथिल हो गया है। चुनावों के बाद भी नियमित कचरा उठाव नहीं हो पा रहा है, जिससे गांव की गलियों में कचरा फेंका जा रहा है। स्वच्छता मिशन के तहत घर-घर जाकर कचरा उठाने का प्रावधान है, लेकिन उपकरणों की मरम्मत न होने से कार्य प्रभावित हो रहा है।
गांव की खाली जगह व गलियों में ग्रामीण फेंक रहे घरों का कचरा घर-घर से कचरा उठाव कराने का अभियान अभी भी पड़ा शिथिल (पेज चार) भगवानपुर, एक संवाददाता। विधानसभा चुनाव में अफसरों के व्यस्तता से मुक्ति मिलने के बाद भी वार्डों में नियमित कचरा उठाव कराने का अभियान पटरी पर नहीं लौट सका। इस कारण घरों में जमा कचरा अब गांव की खाली जगह और गलियों में फेंका जा रहा है। जबकि स्वच्छता मिशन के तहत घर-घर जाकर कचरा उठाव करने का प्रावधान है। इसके लिए घर-घर गीला व सूखा कचरा रखने के लिए बाल्टी दी गई है। लेकिन, जानकार बताते हैं कि कचरा उठाव करनेवाले ठेला और ई रिक्शा की मरम्मत नहीं किए जाने से नियमित कूड़ा उठाव कार्य नहीं हो रहा है।

प्रखंड स्वच्छता कार्यालय के अफसर और पंचायत के मुखियों की अनदेखी से इस मिशन को गति देने पर खर्च किए गए लाखों रुपयों का लाभ नहीं मिल रहा है। कचरे का उठाव करने के लिए ई रिक्शा, ठेला, बेलचा, खांची, सफाई कर्मियों के लिए टोपी और ड्रेस की खरीदारी की गई। सफाई कर्मी और पर्यवेक्षक की बहाली की गई। उनका मानदेय निर्धारण किया गया। स्वच्छता कर्मियों को ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मानदेय देने का सरकार ने प्रावधान बनाया है। उपकरण की मरम्मत के लिए अलग से राशि आवंटित की जाती है। फिर भी स्वच्छता मिशन को गति नहीं मिल रही है। वार्ड सदस्यों ने बताया कि नियमित कूड़ा उठाव कराने की जिम्मेदारी पंचायत स्वच्छता पर्यवेक्षक की है। लेकिन, वह और सफाई कर्मी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। जबकि गीला और सूखा कचरा के निस्तारण के लिए लाखों रुपयों की लागत से भवन का निर्माण कराया गया है। फोटो- 18 नवंबर भभुआ- 12 कैप्शन- घर-घर जाकर उठाव नहीं किए जाने से भगवानपुर गांव में खाली जगह पर फेंका गया कचरा।

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