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सड़क किनारे गांव होने पर भी बुनियादी सुविधाएं नदारद

सड़क किनारे गांव होने पर भी बुनियादी सुविधाएं नदारद

संक्षेप:

ताला गांव के ग्रामीणों ने बिजली, पेयजल, सिंचाई और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई है। गांव में प्राथमिक विद्यालय है, लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को दूर जाना पड़ता है। यहां पानी की आपूर्ति सिर्फ चार घरों तक सीमित है।

Nov 18, 2025 10:31 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भभुआ
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बिजली, पेयजल, सिंचाई, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए अधिकारी व जनप्रतिनिधि तक से ग्रामीण लगा चुके हैं गुहार विकास की संभावनाओं वाले ताला गांव के ग्रामीण झेल रहे हैं समस्या पांचवीं कक्षा के बाद की पढ़ाई के लिए तय करनी पड़ती है लंबी दूरी (पेज चार की बॉटम खबर) अधौरा, एक संवाददाता। भगवानपुर-अधौरा मुख्य सड़क के किनारे ताला गांव है। इस गांव में बुनियादी सुविधाएं तक नदारद हैं। अधौरा का ताला गांव प्रखंड मुख्यालय से 16 किमी. दूर है। इस गांव में विकास की असीम संभावनाएं हैं, पर ठोस पहल नहीं हो रही है। समस्याओं के समाधान के लिए ग्रामीणों ने अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक से गुहार लगाई।

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लेकिन, समस्याएं जस की तस बरकरार हैं। ग्रामीण शमीमुद्दीन मियां कहते हैं कि उनका गांव मुख्य पथ के किनारे बसा है। यहां छोटा बाजार भी है, जिसमें 25-30 दुकानें हैं। इनमें कपड़ा, रेडीमेड, किराना, बर्तन, चाय, नाश्ता, पान आदि की दुकान के अलावा आटा चक्की, छोटी राइस मिल भी है। यह गांव अधौरा व भगवानपुर के करीब मध्य में है। यहां बेहतर बाजार स्थापित हो सकता है। सरकार जड़ी-बूटी का क्रय केंद्र खोलकर ग्रामीणों को रोजगार और गांव के बगल से गुजरी नदी में बांध बनाकर सिंचाई का प्रबंध कर सकती है। यहां सहायक पुलिस थाना भी स्थापित किया जा सकता है। पूर्व मुखिया वीरेंद्र खरवार ने बताया कि इस गांव में बिजली, पेयजल, सिंचाई, शिक्षा की समस्या है। ताला से होकर 33 हजार वोल्ट का बिजली तार गुजरा है। लेकिन, इस गांव में बिजली की आपूर्ति नहीं होती है। यहां का सोलर प्लांट से मिलनेवाली बिजली भी तीन वर्षों से बंद है। पैक्स अध्यक्ष असलम अंसारी कहते हैं कि ताला से गुजरे तार से अधौरा, बभनी, चैनपुरा, पटपर गांवों को बिजली आपूर्ति की जाती है। यहां के युवक पंजाब, हरियाणा, दिल्ली जैसे शहरों में जाकर मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। अगर उन्हें यहीं पर रोजगार देने का प्रबंध हो जाता तो, उन्हें दूसरी जगह नहीं जाना पड़ता। बीच में बच्चे छोड़ देते हैं पढ़ाई पूर्व पैक्स अध्यक्ष महेंद्र सिंह बताते हैं कि ताला गांव में प्राथमिक विद्यालय है। आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को 5 किमी. दूर भड़ेहरा या फिर 20 किमी. की दूरी पर स्थित करर गांव में जाना पड़ता है। भड़ेहरा जाने के लिए जंगल होकर व करर के लिए रोजाना 30 रुपया बस भाड़ा खर्च करना पड़ता है। छोटे बच्चे जंगल से होकर पढ़ने जाना नहीं चाहते और रोज 30 रुपए भाड़ा पर खर्च करना सभी के लिए आसान नहीं है। ऐसे में कुछ बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। प्राथमिक विद्यालय को अपग्रेड कर दिया जाता तो बेहतर होता। सिर्फ चार घरों में होती है पानी की आपूर्ति ग्रामीण उदय नाथ यादव, संजय प्रजापति बताते हैं कि गांव में नल-जल योजना से टंकी स्थापित है, पर सिर्फ चार घरों में पानी की आपूर्ति होती है। क्योंकि पाइप नहीं है। जबकि इस गांव के करीब 120 घरों में 1000 आबादी निवास करती है। इस गांव में यादव, मुस्लिम, अजजा वर्ग के 40-40 घर हैं। अभी तो जैसे-तैसे पानी का प्रबंध कर लिया जा रहा है, पर गर्मी के दिनों में पेयजल संकट उत्पन्न हो जाता है। कोट सोलर प्लांट से बिजली आपूर्ति करने पर ताला गांव के ग्रामीण 30 रुपया मासिक शुल्क नहीं दे रहे थे। जबकि इसे संचालित करने के लिए कर्मियों को मानदेय देना होता है। प्लांट में स्थानीय लोग छेड़छाड़ करते थे। इसलिए ताला का सोलर प्लांट बंद है। रोहित शर्मा, एलएनटी कंपनी, संचालक