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5 अगस्त, 2020|7:21|IST

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लावारिस मजदूर की बिगड़ी तबीयत, डीएम से गुहार

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स्टेशन मोड़ के पास शारदा ब्रजराज हाई स्कूल के सामने चाय की बंद दुकान की चौकी पर जिंदगी की भीख मांग रहा मजदूर

मजदूर की हालत देख पसीजा एक सरकारी कर्मी का कलेजा

पहले लाया भोजन, खाना नहीं खाए जाने पर पिलाया गया दूध

ग्राफिक्स

02 माह से फुटपाथ पर जीवन की जंग लड़ रहा है विधाश पाल

03 दिनों से खराब लगातार बिगड़ती जा रही है मजदूर की हालत

मोहनियां। हिन्दुस्तान संवाददाता

लॉकडाउन में एक कुशल मजदूर जिंदगी व मौत की जंग लड़ रहा है। तीन दिनों में उसे अब खाना भी नहीं खाया जा रहा है। उसकी हालत लगातार बिगड़ते देख समाजसेवियों ने डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी से गुहार लगायी। डीएम के व्हाटएसप पर मजदूर का लोकेशन, तस्वीर व स्थिति भेजने के बाद अब कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के जाधवपुर जिले के सेवेनझील रोड का 55 वर्षीय कुशल मजदूर विधाश पाल 25 वर्षों से मोहनियां के पासवान टोली मुहल्ले में रहता था। जाधवपुर विश्वविद्यालय से स्नातक विधाश ने बताया कि वह फोटो स्टेट मशीन की रिपेयरिंग का कार्य करता था। इससे वह प्रति माह करीब दस हजार रुपये कमा लेता था। वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण के दौर में लॉकडाउन से उसका रोजगार छीन गया और मकान मालिक को किराया नहीं मिलने पर उसे अप्रैल माह के अंत में घर से निकाल दिया। मई व जून दो महीने स्टेशन रोड में फुटपाथ पर सोता और किसी की नजर पड़ गई तो कुछ खाने को मिल जाता। जुलाई महीने में जगजीवन स्टेडियम के पास फुटपाथ पर रहता था।

उसने बताया कि दोबारा लॉकडाउन में जब दुकानें बंद हुईं तो शारदा ब्रजराज हाई स्कूल के सामने बंद पड़ी एक चाय दुकान के सामने रखी चौकी पर सोने की शरण मिल गयी। बिलखते विधाश ने बताया कि एक सरकारी बाबू हमारे लिये भगवान बनकर आए हैं जो अपने घर से लाकर हमें खाना खिलाते थे। इधर तीन दिनों से तबीयत खराब हो जाने से खाना नहीं खाया जा रहा है तो वह दूध लाकर दे रहे हैं। लघु सिचाई विभाग में क्लर्क के पद पर कार्यरत सुनील कुमार पांडेय बताते हैं कि विधाश पाल पढ़ा-लिखा इंसान है, जो परिस्थितियों का मारा अपनी जिंदगी की भीख मांग रहा है। बकौल सुनील यदि इस कुशल मजदूर का शीघ्र इलाज नहीं कराया गया तो उसकी जान खतरे में दिखाई पड़ रही है।

अनुमंडल अस्पताल में नहीं घुसने दिया सुरक्षा गार्ड

मोहनियां। स्टेशन मोड पर चाय की दुकान पड़ी चौकी पर पड़े विधाश पाल ने बताया कि बुधवार को वह किसी तरह घसीटते हुए अनुमंडल अस्पताल गया था। लेकिन उसकी फटीहाल हालत देखकर वहां तैनात सुरक्षा गार्ड ने अंदर नहीं जाने दिया। फिर आकर उसी चौकी पर सो गया। पूरे बदन में दर्द की शिकायत है। दो दिन पहले गिर जाने से चलने पर पैर में दर्द हो रहा है। बुखार भी महसूस हो रहा है। इस संबंध में पूछने पर अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. चन्देश्वरी रजक ने बताया कि ऐसा नहीं हो सकता कि कोई अस्पताल में आये और गार्ड उसे अंदर न आने दे। यदि किसी लावारिस की तबीयत खराब है और सड़क के किनारे पड़ा है तो पुलिस उसे लाती है और उसका यथासंभव इलाज किया जाता है। ज्यादा तबीयत खराब होने पर सदर अस्पताल भभुआ रेफर करना पड़ता है। हिसं

मदद में भटक रहे हैं आधा दर्जन विक्षिप्त

मोहनियां। लॉकडाडन में मोहनियां में आधा दर्जन विक्षिप्त सड़क पर भटक रहे हैं। इन पर किसी की निगाह नहीं है। लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारण वाले इस सिस्टम में कोई संवेदनशील भी दिखाई नहीं पड़ा रहा। न तो सरकारी तंत्र आगे आ रहा है और न ही कोई स्वयंसेवी संस्था। मानवता की दुहाई देने वाले लोग सहानुभूति के एक-दो शब्द कहकर निकल जाते हैं। कोरोना संक्रमण के इस दौर में मदद करने की इच्छा रखने वाले भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इक्के-दुक्के लोग घर से खाना लाकर उन्हें देते हुए कभी-कभी दिख रहे हैं। ज्यादातर विक्षिप्तों की संख्या स्टेशन रोड में है। जगजीवन स्टेडियम के गेट के दक्षिण एक विक्षिप्त युवती कई दिनों से पड़ी है। संकटमोचन मंदिर व कर्नाटक बाबा मंदिर के पास दो लावारिस को कभी भी देखा जा सकता है। स्टेशन परिसर के पास काली मंदिर के बगल में दो विक्षिप्त युवक पड़े रहते हैं।

कोट

विक्षिप्त लावारिसों के लिये नगर पंचायत में अलग से कोई एलॉटमेंट नहीं है। फिर भी मानवीय दृष्टिकोण से इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जायेगा। बीमार कुशल मजदूर के इलाज के लिये अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक से बात करता हूं।

डॉ. संजय उपाध्याय, कार्यपालक पदाधिकारी, नपं मोहनियां

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कैप्शन-स्टेशन मोड़ के पास शारदा ब्रजराज हाईस्कूल के सामने लॉकडाउन में बंद पड़ी चाय की दुकान की चौकी पर गुरुवार को बीमार हालत में पड़ा कुशल मजदूर।

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  • Web Title:Unclaimed laborer deteriorates health pleads with DM