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भभुआबिहार में तानाशही व अघोषित आपातकाल की स्थिति (पेज पांच)

हिन्दुस्तान टीम,भभुआPublished By: Newswrap
Mon, 24 May 2021 08:10 PM
बिहार में तानाशही व अघोषित आपातकाल की स्थिति (पेज पांच)

अस्पतालों व सामुदायिक रसोई का जायजा लेने से सांसदों व विधायकों को रोकना हिटलरशाही

विधायक ने राज्य सरकार को आधा दर्जन चिट्ठियां लिखकर नीतिगत मामलों पर उठाये सवाल

रामगढ़। एक संवाददाता

राजद के युवा विधायक सुधाकर सिंह ने कहा है कि बिहार में इन दिनों तानाशाही व अघोषित आपातकाल की स्थिति है। सांसद व विधायकों को अस्पताल की व्यवस्था व सामुदायिक रसोई का जायला लेने पर प्रतिबंध लगाना हिटलरशाही है। दरअसल, सरकार अपनी कमी छिपाने के लिये जनप्रतिनिधियों को वहां जाने से रोक रही है। ऐसा करके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी कमी पर पर्दा नहीं डाल सकते। इस मामले में विधायक ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा है, जिसमें हवाला दिया है कि मोहनियां की एसडीओ ने जब बताया कि जनप्रतिनिधियों को अस्पताल व सामुदायिक रसोई का जायजा लेने से रोकने का निर्देश प्राप्त हुआ है तो वे आश्चर्य में पड़ गये। मुख्य सचिव को फौरन पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया।

कोरोना संक्रमण काल में अपनी चिट्ठियों को लेकर सुर्खियों में रहे विधायक सुधाकर सिंह ने सोमवार को फिर छह चिट्ठियां लिखी। चिट्ठियों के माध्यम से उन्होंने कई मुद्दे को लेकर सरकार को कठघरे में खड़े किए, कमियां गिनाईं व कुछ मांगे रखी। ग्रामीण विकास की रफ्तार प्रभावित न हो इसके लिए उन्होंने पंचायती राज के प्रतिनिधियों का कार्यकाल छह माह बढ़ाने की मांग की। उन्होंने पंचायती राज मंत्री को लिखे पत्र में कहा कि पंचायतों का कार्यकाल 15 जून को खत्म होने जा रहा है। देश और दुनिया में जारी कोविड संक्रमण की वजह से ससमय पंचायत चुनाव संभव नहीं है। ऐसे में पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल छह माह या जब तक निर्वाचन प्रक्रिया पूरी न हो जाए, तब तक कार्यकाल बढ़ा दिया जाए। इससे ग्रामीण विकास के कार्यों की सही निगरानी भी होती रहेगी।

विधायक ने सामुदायिक रसोई व अस्पतालों के जायजा लेने पर पर जनप्रतिनिधियों को प्रतिबंधित करने के आदेश को इमरजेंसी करार दिया। उन्होंने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा कि यह फैसला घोर आश्चर्य वाला और निंदनीय है। विधायिका के माध्यम से ही कार्यपालिका का निर्माण होता है। विधायक, सांसद, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद को प्रतिबंधित करना ठीक नहीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या मुख्यमंत्री व मंत्री महामानव हैं, जो जायजा लेंगे और जिनपर कोविड संक्रमण का असर नहीं होगा। इसके अलावा उन्होंने खरीफ सीजन में बिचड़े डालने व चौकस खेती के लिए सरकारी नलकूपों के जीर्णोद्धार की मांग रखी।

विधायक के अनुसार 51 नलकूपों में से अधिकांश का जीर्णोद्धार हो चुका है। इसे पुन: विद्युत ऊर्जा से लैस करने के लिए गैरकानूनी तरीके से विद्युत बोर्ड द्वारा पैसे की मांग की जा रही है। जबकि डिपॉजिट हेड से पैसे का भुगतान हो चुका है। इसलिए किसान हित में एक हफ्ते में इन नलकूपों को विद्युत उर्जा का अधिष्ठापन किया जाए। ऐसा नहीं हुआ तो किसानों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।

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