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हिंदी न्यूज़ बिहार भभुआकोरोना काल में डंडे-बंदूक वाली पुलिस का दिखा था मानवीय चेहरा (पेज चार की सेकेंड लीड खबर)

कोरोना काल में डंडे-बंदूक वाली पुलिस का दिखा था मानवीय चेहरा (पेज चार की सेकेंड लीड खबर)

हिन्दुस्तान टीम,भभुआNewswrap
Tue, 30 Mar 2021 07:50 PM
कोरोना काल में डंडे-बंदूक वाली पुलिस का दिखा था मानवीय चेहरा (पेज चार की सेकेंड लीड खबर)

खुद की जिंदगी की परवाह किए बगैर आमजनों की मदद के लिए हर वक्त रहे तैयार

यूपी-बिहार की सीमा, कंटेनमेंट जोन में रहनेवालों, राहगीरों की कर रहे थे मदद

01 पुलिस अफसर की मौत व कई हो गए थे संक्रमित

इंट्रो

लॉकडाउन के दौरान पुलिसकर्मियों ने खुद की जिंदगी की परवाह किए बगैर आमजनों की हर संभव मदद करने हर वक्त तत्पर रहे। लाठी-बंदूक वाली पुलिस का इस मानवीय चेहरा लोगों का विश्वास जीता। संक्रमितों की खोजबीन से लेकर उन्हें रिकवर करने, पड़ोसियों को भरोसा दिलाने, संक्रमण को बढ़ने से रोकने, भय-दहशत के बीच जरूरी वस्तुओं की सप्लाई चेन को दुरुस्त करने, जरूरतमंदों को राशन दिलाने में मदद की।

भभुआ। हिन्दुस्तान प्रतिनिधि

अक्सर पुलिस की नकारात्मक छवि वाली जानकारी विभिन्न माध्यमों से सामने आती रही है। लापरवाही व अमानवीय व्यवहार के किस्सों ने आम आदमी व पुलिस के बीच गहरी खाईं बना रखी है। लेकिन, पुलिस का यह नकारात्मक चरित्र पूरी तरह सच नहीं है। एक सच यह भी है कि पुलिस भी समाज को जोड़ने का काम करती है। बुरे वक्त में दोस्त व सहयोगी की भूमिका में दिखती है। दंगे-फसादों से उलझती और सुलझाती पुलिस का भी एक मानवीय चेहरा है। लॉकडाउन के दौरान कई पुलिस अफसर व जवान कोरोना से संक्रमित हो गए थे। एक पुलिस अफसर की तो संक्रमण के कारण मौत हो गई थी। पीड़ितों व जरूरतमंदों की सेवा में बढ़ी व्यस्तता से पुलिस अफसर व जवान परिवार से दूर रहे। वह इतनी कठिन ड्यूटी करते रहे, लोगों में उनके प्रति विश्वास बढ़ गया। लॉकडाउन के दौरान जिले के हर कोने में पुलिस ने काम किया। उनके काम का अपना अलग महत्व रहा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन के दौरान पुलिस को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया पर शोध किया था, जिसमें पुलिस का मानवीय चेहरा सामने आया था। इसे पुलिस अनुसंधान और अपराध ब्यूरो की ओर से कोविड-19 महामारी के दौरान संघर्ष में भारतीय पुलिस की भूमिका को लेकर जारी बुकलेट में स्थान दिया गया। कैमूर पुलिस ने लॉकडाउन के दौरान अलग-अलग स्तर पर लोगों की मदद करने के साथ कोरोना के संक्रमण के खतरे को कम करने में महती भूमिका निभाई।

पुलिस का मानवीय चेहरा

लॉकडाउन में खाकी वर्दी आमजनों को कोरोना एडवाइजरी को लेकर शिक्षित करती नजर आई थी। यूपी-बिहार की सीमा पर कोई खाना खिला रहा है था, तो कोई बुजुर्गों को सहारा दे रहा था। इस संकट के समय में पुलिस का एक मानवीय चेहरा सबके सामने आया था। तब लोग खाकी से खौफ नहीं खाते थे। उनका सम्मान कर रहे थे। प्रवासियों ने उनकी मानवता को याद रखा तो कुछ ने सम्मानित भी किया। नई पीढ़ी भी उनके अच्छे कार्य के लिए उन्हें याद रखेगी। पुलिस भी दोस्त बनकर काम करना चाहती है।

कोरोना संक्रमितों की खोजबीन में जुटा रहा प्रशासन

लॉकडाउन में कोरोना संक्रमितों की तलाश में पुलिस के अलावा प्रशासनिक अफसर व कर्मी तक ने भी अहम भूमिका निभायी है। मेडिकल टीम के साथ गांवों में जाकर पीड़ितों को एम्बुलेंस से लाकर आइसोलेट करने, संक्रमित के संपर्क में आए लोगों के बारे में पता कर उनके सैंपल की जांच कराने, उनकी सुरक्षा में दिनरात पुलिस ड्यूटी करती रही। वह कभी बैरक में सो जाते तो कभी कुर्सी पर ही झपकी लेकर नींद पूरी करने की कोशिश करते रहे। यही हाल प्रशासनिक अफसरों के भी थे।

पुलिस का बदला चेहरा

पैदल चलनेवाले मरीजों को अस्पताल पहुंचाती रही पुलिस

अनुशासन के लिए कड़ाई करने वाली पुलिस का कोरोना संक्रमण काल में बदला चेहरा भी सामने आया है। बिना मास्क लगाए और शारीरिक दूरियां न बनाने पर जुर्माना लगाने का नियम है। लेकिन, मजबूर लोगों की परेशानी को समझ पुलिस उन्हें समझाने का काम करती रही। दवा दिलवाने, सब्जी खरीदवाने, किराना सामग्री, दूध आदि जरूरी चीजों की खरीदारी करने आए लोगों को छूट देती थी। लेकिन, बेवजह घूमने वालों के साथ सख्ती से अपनाती थी। लॉकडाउन के काफी दिनों से घरों में रहकर आमजन परेशान रहे। हर कोई इसे पहली बार फेस कर रहा था। ऐसे में पुलिस की मदद को लोग आज भी याद करते हैं। कई बार ऐसा हुआ कोई साधन नहीं मिला तो मरीज पैदल ही रास्ता नापने लगे। लेकिन, रास्ते में मिले ऐसे लोगों को पुलिस अपने वाहन से अस्पताल पहुंचाने का काम करती रही।

जरूरतमंदों को नि:शुल्क राशन

प्रवासियों व अन्य को राशन दिलवाने में करती रही मदद

लॉकडाउन के दौरान कामकाज ठप हो जाने से प्रवासियों व गरीबों के समक्ष पेट पालने की समस्या उत्पन्न हो गई। तब सरकार ने उन्हें नि:शुल्क राशन देने की घोषणा की और लोगों की कतार पीडीएसी डीलर की दुकानों पर लग गई। ज्यादा भीड़ लगने से हर किसी को समय पर दाल-चना नहीं मिल पाता। तब पुलिस उन्हें कतार में खड़ा कराकर उक्त चीजें मुहैया कराने में मदद करती थी। इसके अलावा यूपी-बिहार की सीमा पर गैर प्रांत से आए लोगों के बीच भोजन, नाश्ता, पानी, सेनेटाइजर, मास्क का वितरण प्रशासन के अलावा सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक दलों व अन्य संस्थानों द्वारा भी किया जाता था, जिसमें पुलिस मदद करती नजर आती थी। अग्रणी बैंक के जिला प्रबंधक अंजनी प्रसाद बताते हैं कि बैंक की ओर से प्रवासियों को भोजन, नाश्ता, सेनेटाइजर, मास्क आदि का वितरण किया जाता था।

कोरोना डायरी

1. कोरोना काल में आम मरीजों को अस्पताल पहुंचाने व कोरोना संक्रमित को उनके घर से लाकर आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराने का काम कर रहे थे। पुलिस द्वारा गरीबों में पांच क्विंटल चावल, मास्क व सेनेटाइजर बांटे गए। मनिहारी में कैंप लगाकर भी जरूरतमंदों में उक्त चीजों का वितरण करवाया गया।

रामानंद मंडल, इंस्पेक्टर

फोटो- रामानंद मंडल

2. शहर में फेस मास्क की जांच के दौरान लोगों को कोरोना एडवाइजरी की जानकारी देने, हमेशा हेलमेट पहनकर व सीटबेल्ट लगाकर यात्रा करने की सलाह देने का काम करते थे। बेवजह घर से बाहर निकलनेवाले लोगों को दंडित भी किया जाता था, ताकि कोरोना एडवाइजरी का पालन कराया जा सके।

रणवीर कुमार, अपर थानाध्यक्ष

फोटो- रणवीर कुमार

3. लॉकडाउन के दौरान पेट्रोलिंग ड्यूटी में अक्सर कोई वृद्ध, मरीज, असहाय मिल जाते थे, जिन्हें अस्पताल जाने, दवा लाने व अन्य जरूरी काम से पैदल जाना पड़ता था। क्योंकि उस समय कोई यात्री वाहन नहीं चलते थे। ऐसे में मानवता के नाते उन्हें पुलिस गाड़ी से शहर तक लाया जाता था।

संतोष कुमार, दारोगा

फोटो- संतोष कुमार

4. किसी महिला के कोरोना संक्रमित होने पर मेडिकल टीम के साथ उनके घर से उन्हें लाकर आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराना पड़ता था। मन में एक अजीब किस्म का डर बना रहता था। फिर भी मरीजों की सेवा में काम करती रही। कंटेनमेंट जोन में भी मेरी ड्यूटी लगती थी। घर व उसमें रहनेवालों की निगरानी करती थी।

रुबी कुमारी, दारोगा

फोटो- रुबी कुमारी

5. माइक्रो कंटेनमेंट जोन में ड्यूटी करना खतरे से खाली नहीं था। फिर भी मैंने अपना कतव्य समझ ड्यूटी करती रही। कंटेनमेंट जोन की मॉनिटरिंग, किसी के आने-जाने पर पाबंदी, सब्जी के ठेलों को लोगों के घरों तक पहुंचवाने जैसा कार्य करना पड़ता था। मरीज के संपर्क में आए लोगों के सैंपल लेने में मदद करनी होती थी।

देवमति काजी, एएसआई

फोटो- देवमति काजी

फोटो-30 मार्च भभुआ- 9

कैप्शन- यूपी-बिहार की सीमा खजूरा के पास लॉकडाउन में ट्रक से आए प्रवासी मजदूरों की मदद करते कर्मी।

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