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Hindi News बिहार भभुआअधिकतर गांव के कुओं का अस्तित्व खतरे में-

अधिकतर गांव के कुओं का अस्तित्व खतरे में-

रामपुर, एक संवाददाता। इन दिनो कुआं जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। करीब तीन दशक पहले तक अधिकांश गांवों में पेयजल एवं सिंचाई के लिए सबसे उपर्युक्त कुआं था। इसी का परिणाम था कि पहले हर गांव में 5से 6...

अधिकतर गांव के कुओं का अस्तित्व खतरे में-
हिन्दुस्तान टीम,भभुआSun, 23 Jun 2024 08:30 PM
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रामपुर, एक संवाददाता। इन दिनो कुआं जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। करीब तीन दशक पहले तक अधिकांश गांवों में पेयजल एवं सिंचाई के लिए सबसे उपर्युक्त कुआं था। इसी का परिणाम था कि पहले हर गांव में 5से 6 कुआं देखने को मिलता था। जिससे जल निकाल कर लोग अपनी-अपनी जरूरत पुरी करते थे। अब का आलम यह है कि हर गांव में दो से चार कुआं मरम्मत के आभाव में वजूद समाप्ति के कगार पर है। सुविधा भोगी जनमानस रस्सी के सहारे बाल्टी से पानी खींचना अब मुसीबत लगने लगा है। अधिकांश लोग चापाकल एवं समरसेबल पर निर्भर हो गए हैं। इसके परिणाम की बात तो दूर गांव में भी लोग अब नल के जल पर निर्भर हैं। इसके चलते हर गांव में दो से चार कुआं उपयोग व मरम्मत के अभाव में अस्तित्व खतरें में है।

फोटो परिचय

23-भभुआ-12-प्रखंड के खरेंदा शिव मंदिर के पास बदहाल कुआं

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