DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   बिहार  ›  भभुआ  ›  कोरोना काल में भी नहीं सुधरी स्वास्थ्य उपकेंद्रों की हालत (पेज चार की बॉटम खबर)

भभुआकोरोना काल में भी नहीं सुधरी स्वास्थ्य उपकेंद्रों की हालत (पेज चार की बॉटम खबर)

हिन्दुस्तान टीम,भभुआPublished By: Newswrap
Mon, 24 May 2021 08:10 PM
कोरोना काल में भी नहीं सुधरी स्वास्थ्य उपकेंद्रों की हालत (पेज चार की बॉटम खबर)

बीमार होने पर बिना जांच कराए झोला छाप डॉक्टर से इलाज करा रहे मरीज

तबीयत गंभीर होने के बाद परिजन सरकारी अस्पताल में लेकर जाते हैं मरीज को

07 स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं कैमूर जिले में

भगवानपुर। एक संवाददाता

कोरोना काल में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित स्वास्थ्य उपकेंद्रों की आवश्यकता बढ़ गई है। क्योंकि गांव के लोग इन दिनों सर्दी, खांसी, बुखार, बदन दर्द आदि से पीड़ित हो जा रहे हैं। ऐसे में वह सरकारी अस्पतालों से जांच कराने के बजाय मरीज झोला छाप डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं। ऐसे में कुछ लोगों की तबीयत ज्यादा खराब हो जा रही है। तब उनके परिजन उन्हें लेकर सरकारी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। ऐसे मरीज न तो कोरोना की जांच कराते हैं और न अन्य किसी तरह के टेस्ट। कुछ मरीज तो दुकान से दवा लेकर खा रहे हैं। अगर गांवों का अस्पताल नियमित संचालित होता तो ऐसे मरीज अस्पताल में जा सकते हैं।

भगवानपुर प्रखंड के कई गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं। लेकिन, उसमें बीमारी जांच या मरीजों के इलाज की कोई खास सुविधा नहीं है। हां, गर्भवती महिलाओं व बच्चों का टीकाकरण जरूर किया जाता है। ऐसे अस्पतालों में न डॉक्टर की ड्यूटी लगती है और न मरीजों को इलाज हो पाता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरकार इसे व्यवस्थित कर दे तो पीएचसी, सीएचसी, रेफरल, अनुमंडल व सदर अस्पताल से मरीजों की भीड़ कम लगेगी और डॉक्टरों द्वारा बीमारी की जांच भी अच्छे से की जा सकेगी।

कारण भगवानपुर प्रखंड के जैतपुर कला, पढ़ौती, पहाड़िया, रामगढ़ में स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं। इन अस्पतालों के भवन भी हैं। लेकिन, कोरोना काल में भी यहां स्वास्थ्य की जांच व इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। हालांकि एएनएम कभी-कभी आती हैं। अगर दवाएं उपलब्ध रहती है तो बीमारी के लक्षण के आधार पर दवाएं भी दे देती हैं। लेकिन, जांच कर इलाज का प्रबंध नहीं होने से मरीजों को परेशानी होती है। जब वह झोला छाप डॉक्टर से इलाज कराते हैं, तो उनकी जेब भी ढीली होती है।

कभी-कभी खुलते हैं ग्रामीण अस्पताल

ग्रामीण रामचंद्र प्रसाद, अरविंद कुमार बताते हैं कि उक्त गांवों के स्वास्थ्य उपकेंद्र कभी-कभी ही खुलते हैं। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, भगवानपुर प्रखंड में कुल सात स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं। इनमें से अब तक चार स्वास्थ्य उपकेंद्रों का अपना भवन बन सका है। लोगों का कहना है कि अगर सरकारी भवन में स्थापित उप स्वास्थ्य केंद्रों में संसाधनों का प्रबंध किया गया होता तो मरीजों को अपनी बीमारी जांच व इलाज कराना आसान हो जाता। कोरोना काल में सैंपल टेस्ट व वैक्सीनेशन में भी काम आता। लेकिन, ऐसा नहीं हो सका है।

फोटो- 24 मई भभुआ- 4

कैप्शन- भगवानपुर प्रखंड के पढ़ौती गांव के स्वास्थ्य उपकेंद्र में सोमवार को लटकता ताला।

संबंधित खबरें