
जिले में उर्दू शिक्षकों की भारी कमी, बच्चों की तालीम पर छाया संकट
युवा पेज की लीड खबर युवा पेज की लीड खबर जिले में उर्दू शिक्षकों की भारी कमी, बच्चों की तालीम पर छाया संकट उर्दू स्कूलों से लेकर
युवा पेज की लीड खबर जिले में उर्दू शिक्षकों की भारी कमी, बच्चों की तालीम पर छाया संकट उर्दू स्कूलों से लेकर सामान्य विद्यालयों तक शिक्षकों की कमी, शिक्षण व्यवस्था प्रभावित रिक्तियों पर बहाली नहीं होने से पिछड़ रही छात्रों की पढ़ाई, शिक्षा विभाग से है उम्मीद भभुआ, नगर संवाददाता। जिले में उर्दू शिक्षकों की लगातार कमी बच्चों की तालीम पर सीधा असर डाल रही है। कैमूर जिले के उर्दू विद्यालयों के साथ-साथ सामान्य प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में भी उर्दू विषय पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को उपयुक्त शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं। उर्दू पढ़ाने के लिए आवश्यक संख्या में शिक्षक उपलब्ध न होने से न केवल कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि बच्चों की सीखने की गति भी धीमी पड़ गई है।

कई विद्यालयों में स्थिति ऐसी है कि एक-एक शिक्षक से कई कक्षाओं की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना मुश्किल हो गया है। जिला शिक्षा कार्यालय के अनुसार, वर्तमान में कुल 252 उर्दू शिक्षक जिले में कार्यरत हैं। इनमें कक्षा 1 से 5 तक के लिए 166 शिक्षक, कक्षा 6 से 8 के लिए 30 शिक्षक, कक्षा 9 व 10 के लिए 31 शिक्षक, जबकि कक्षा 11 व 12 के लिए 24 शिक्षक नियुक्त हैं। यह संख्या जिले की आवश्यकता की तुलना में काफी कम है, जिसके कारण विद्यालयों में नियमित शिक्षण सुचारू रूप से नहीं चल पा रहा है। जिले में कुल 1384 विद्यालय हैं, जिनमें प्राथमिक, मध्य, उच्च तथा उच्च माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। इनमें से 1182 विद्यालय प्राथमिक और मध्य स्तर के हैं, जबकि 166 विद्यालय उच्च माध्यमिक श्रेणी में आते हैं। इतने बड़े शिक्षा तंत्र में उर्दू विषय पढ़ाने के लिए उपलब्ध शिक्षकों की संख्या बेहद कम मानी जा रही है। जिन विद्यालयों में उर्दू माध्यम के छात्र अधिक हैं, वहां स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। रिक्तियों के अनुरूप नहीं हुई बहाली अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा विभाग द्वारा वर्षों पहले रिक्तियों के अनुरूप बहाली की प्रक्रिया पूरी की जानी थी। लेकिन नियुक्ति नहीं होने के कारण आज भी कई पद खाली पड़े हुए हैं। उर्दू विषय पढ़ने वाले बच्चों को अक्सर किसी अन्य विषय के शिक्षक पर निर्भर रहना पड़ता है, जो विषय की विशेषज्ञता न होने के कारण प्रभावी तरीके से पढ़ा नहीं पाते। स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों ने बताया कि कक्षा 1 से 8 तक के स्तर पर बच्चों की भाषा की नींव मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ उर्दू शिक्षक अनिवार्य हैं। ऐसे में शिक्षकों की कमी बच्चों के शैक्षिक विकास में बाधा उत्पन्न कर रही है। कई स्कूलों में बच्चों को बुनियादी उर्दू पढ़ने और लिखने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि नियमित कक्षाएं नहीं हो पा रही हैं। जिले के शिक्षकों का यह भी कहना है कि शिक्षा विभाग यदि जल्द ही रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करे, तो उर्दू पढ़ने वाले हजारों बच्चों को राहत मिलेगी। अन्यथा आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। उर्दू शिक्षक न होने के कारण कई बच्चे अपने भाषा विषय में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनके कुल शैक्षणिक परिणाम प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञ शिक्षक ही बढ़ा सकते हैं उर्दू अभिभावकों और शिक्षकों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग जिले की वास्तविक जरूरतों का आकलन करते हुए त्वरित कार्रवाई करे, ताकि सभी विद्यालयों में विषय-विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध कराए जा सकें। उर्दू विषय के प्रति छात्रों की रुचि और उनकी भाषा-आधारित पढ़ाई को सुरक्षित रखने के लिए शिक्षकों की बहाली समय की आवश्यकता है। जिले के उर्दू माध्यम के छात्रों की तालीम तभी मजबूत होगी जब प्रत्येक विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध होंगे। फोटो- 11 दिसंबर भभुआ-07 कैप्शन- भगवानपुर प्रखंड के सिंघी विद्यालय के प्रयोगशाला में प्रयोग करते बच्चे

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