भीषण गर्मी में हाइपर थर्मिया के शिकार होने लगे नवजात

हिन्दुस्तान, भभुआ
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कैमूर में बढ़ती गर्मी के कारण नवजात बच्चों में हाइपर थर्मिया की समस्या सामने आ रही है। मंगलवार को एसएनसीयू में 16 नवजात भर्ती हुए, जिनमें से कई बच्चे गर्मी से संबंधित बीमारियों से जूझ रहे थे। चिकित्सक ने बताया कि 35.5 से 36.5 डिग्री का तापमान बनाए रखना बेहद जरूरी है, अन्यथा जीवन को खतरा हो सकता है।

भीषण गर्मी में हाइपर थर्मिया के शिकार होने लगे नवजात

बोले डॉक्टर, अधिक गर्मी होने या शरीर से पर्याप्त गर्मी बाहर न निकल पाने व पानी की कर्मीसे शिशु हाइपर थर्मिया से पीड़ित हो रहे बच्चों के शरीर का तापमान 35.5 डिग्री से 36.5 डिग्री रहना चाहिए कैमूर में मंगलवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस है ग्राफिक्स 16 नवजात मंगलवार को भर्ती थे एसएनसीयू वार्ड में 07 बच्चे पीडियाट्रिक वार्ड में किए गए थे भर्ती (पेज तीन की लीड खबर) भभुआ, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। जिले में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी व तीखी धूप के कारण नवजात हाइपर थर्मिया बीमारी के शिकार होने लगे हैं। एसएनसीयू वार्ड में मंगलवार को 16 शिशु भर्ती थे।

इनमें से नौ नवजात गर्मीजनित बीमारी यानी सर्दी, खांसी, बुखार, उल्टी, दस्त, सुस्ती से पीड़ित तथा शेष पीलिया, निमोनिया, कम वजन, समय से पहले जन्म लेने वाले शिशु शामिल थे। पीडियाट्रिक वार्ड में भी 7 बच्चे भर्ती थे। इनमें से पांच बच्चे गर्मी से पीड़ित थे। मंगलवार को इन बच्चों का इलाज बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना द्विवेदी कर रही थीं। एसएनसीयू में करीब 53 बच्चों के स्वास्थ्य की जांच डॉ. अर्चना द्विवेदी द्वारा की गई। उन्हें आवश्यक दवाएं अस्पताल से मुहैया कराई गई। पूछने पर बाल रोग विशेषज्ञ डा. त्रिभुवन नारायण ने बताया कि एसएनसीयू में भर्ती नवजातों में कम वजन व कम समय में पैदा होने वाले, जन्म के बाद नहीं रोने वाले, पीलिया रोग, हाइपर थर्मिया, निमोनिया से पीड़ित हैं, जिनका इलाज किया जा रहा है। चिकित्सक ने बताया कि इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी व तेज धूप के कारण अधिक बच्चे हाइपर थर्मिया बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं, जो जानलेवा स्थिति है। उन्होंने बताया कि अगर तत्काल बच्चे के शरीर के तापमान को सामान्य नहीं किया गया तो उनकी जान भी जा सकती है। इन दिनों गर्मी में नवजात के शरीर का तापमान 35.5 डिग्री से 36.5 डिग्री रहना चाहिए। इससे कम रहने पर शरीर की सभी क्रियाएं धीमी होने लगती हैं, जिससे बच्चा अधिक रोता है और पूरा दूध भी नहीं पी पाता है। इस कारण वह सुस्त हो जाता है। जिस कमरे में बच्चों को रखें, उसका दरवाजा व खिड़की बंद करें, ताकि बच्चा गर्म हवा व गर्मी का शिकार न हो सके। लेकिन, मंगलवार को कैमूर का अधिकतम तापमान 42 डिग्री था। एसएनसीयू में उपलब्ध संसाधन सदर अस्पताल के एसएनसीयू में नवजात के शरीर के तापमान को सामान्य रखने के लिए 17 रेडियंट वार्मर, ऑक्सीजन देने के लिए सात ऑक्सीजन कांस्टेटर व ऑक्सीजन सिलेंडर, पीलिया के इलाज के लिए पांच फोटोथेरेपी मशीन, सही मात्रा व सही अंतराल पर दवा देने के लिए दस इंफ्यूजन पंप, नवजात के शरीर के पल्स व ऑक्सीजन स्तर का पता करने के पांच पल्स ऑक्सीमीटर, बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए सात इंकुवेटर व बच्चों को सांस लेने में वाली तकलीफ दूर करने के लिए नेबुलाइजर मशीन उपलब्ध है। एसएनसीयू वार्ड में यह सुविधा होनी चाहिए एसएनसीयू में 20 शिशुओं के इलाज के लिए एक यूनिट में 20 वार्मर, 6 फोटोथैरेपी, 2 बबल सी पैप, आठ सेक्शन मशीन, सेंट्रल ऑक्सीजन और वेंटीलेटर की सुविधा होनी चाहिए। यूनिट संचालन के ये हैं मानक विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक एक यूनिट के संचालन के लिए 4 डॉक्टर, 11 स्टाफ नर्स, चार वार्ड ब्वॉय, तीन वार्ड आया, एक लैब टेक्नीशियन, दो स्वीपर, तीन गार्ड और एक डाटा एंट्री ऑपरेटर होने चाहिए। हाइपर थर्मिया क्या है? जब शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है और इससे बच्चे की सेहत को खतरा होने की आशंका रहती है, तो इस स्थिति को हाइपर थर्मिया कहा जाता है। कई स्थितियों के कारण हाइपर थर्मिया हो सकता है। बच्चों से लेकर बड़ों और महिलाओं को यह दिक्कत हो सकती है। हाइपर थर्मिया एक खतरनाक बुखार है गर्मी और चिलचिलाती धूप बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी को बीमार कर रही है। इस मौसम में तेज धूप और गर्मी के कारण आने वाला फीवर हाइपरथर्मिया भी हो सकता है, जिसकी चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे और बूढ़े आते हैं। जिले में बढ़ रही गर्मी में अपना ध्यान रखना हर किसी के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि हाइपर थर्मिया घातक भी हो सकता है। हाइपरथर्मिया के लक्षण हाइपरथर्मिया के कई चरण हैं, जिसमें सबसे गंभीर हीट स्ट्रोक है। यह घातक हो सकता है। यदि हीट से संबंधित स्थितियों का प्रभावी ढंग से व जल्दी इलाज नहीं किया गया तो हीट स्ट्रोक हो सकता है। हीट स्ट्रोक अक्सर तब होता है जब शरीर का तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता है। यह भी हैं लक्षण - बेहोश होना। - चिड़चिड़ापन - उलझन में रहना - पसीना कम आना - पल्स का धीमा या तेज होना यह करें - ठंडे वातावरण में रहने की कोशिश करें - पानी या इलेक्ट्रोलाइट से युक्त स्पोर्ट्स ड्रिंक पीएं - जल्दी ठीक होने के लिए ठंडे पानी से स्नान करें - अपनी बाहों के नीचे और कमर के आसपास बर्फ की सिकाई करें कोट इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी में अधिक नवजात हाइपर थर्मिया बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। इन्हें धूप व गर्मी से बचाना और सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। एसएनसीयू में आने वाले बीमार नवजातों को भर्ती कर बेहतर इलाज किया जा रहा है। डॉ. त्रिभुवन नारायण, बाल रोग विशेषज्ञ (भभुआ से उदय प्रकाश) फोटो- 21 अप्रैल भभुआ- 3 कैप्शन- सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू में मंगलवार को भर्ती नवजातो ंका इलाज करते बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक।

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