आंधी में पेड़ से झड़ गए 30-40 प्रतिशत आम के फल

Newswrap हिन्दुस्तान, भभुआ
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इस वर्ष आम की मिठास में महंगाई की कड़वाहट घुल गई है। आंधी के कारण आम का उत्पादन 30-40 प्रतिशत कम हुआ है, जिससे दाम में 10-15 रुपए प्रति किलो की वृद्धि होने की संभावना है। कैमूर में आम के पेड़ों में टिकोले कम लगे हैं, और किसानों का कहना है कि लागत भी नहीं निकल पाएगी।

आंधी में पेड़ से झड़ गए 30-40 प्रतिशत आम के फल

मौसम ने आम की मिठास में महंगाई की घोली कड़वाहट, इस वर्ष आम के दाम में 10-15 रुपए प्रति किलो की हो सकती है वृद्धि एक एकड़ में 25-30 टन होता आम का उत्पादन, पर अब 15-20 टन ही होगा कैमूर के बागीचों में लगे हैं लंगड़ा, मालदह, बीजु, सिपिया, शुकुल प्रजाति के आम (पटना का टास्क) भभुआ, हिन्दुस्तान संवाददाता। इस वर्ष की आंधी ने न सिर्फ आम के उत्पादन को 30-40 प्रतिशत कम किया है, बल्कि आम की मिठास में महंगाई की कड़वाहट भी घोली है। इससे लोकल आम सामान्य लोगों की पहुंच से जहां दूर होगा, वहीं इसके दाम में 10-15 रुपए प्रति किलो की वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। कैमूर में 800 एकड़ में आम की खेती हुई है। इससे प्रति एकड़ 25-30 टन आम का उत्पादन होता, पर आंधी की मार से 15-20 टन ही उपज होगी। पिछले वर्ष आम का उत्पादन 35-40 टन हुआ था। लेकिन, इस वर्ष पेड़ में मंजर व टिकोले कम आए। किसान बताते हैं कि एक साल बीच करके आम की उपज आधी हो जाती है। किसानों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार आम के पेड़ों पर टिकोले काफी कम लगे थे। इस वर्ष बीच-बीच में तीन बार आई आंधी ने 30-40 प्रतिशत फल झड़ गए। यह प्रकृति की देन है कि एक वर्ष अच्छी उपज होने के बाद अगले वर्ष उत्पादन कम होता है। ऐसे में जब बाजार में लोकल आम की आवक कम होगी, तो जाहिर है व्यापारी इसकी भरपाई दूसरी मंडियों से करेंगे। इस कारण आम के दामों में बढ़ोतरी होगी।

किसानों की बातें

जिले के रामपुर प्रखंड स्थित खरेंदा गांव के आम उत्पादक किसान अशोक कुमार पांडेय बताया कि उन्होंने करीब 40-50 एकड़ भूमि में आम का बगीचा लगाया है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल कम आम आया है। शुरूआती दौर में आंधी आने से करीब 30 प्रतिशत आम के टिकोले पहले ही झड़ गए थे। बाद में दो बार आई आंधी से 10 प्रतिशत आम के फल पेड़ से गिर गए। जिले के आम उत्पादक किसानों ओमप्रकाश तिवारी, सुनील कुमार सिंह, संतोष सिंह व नरेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि लगता है इस बार अचार व पका हुआ आम खाने के लिए तो मिल जाएगा, पर सिंचाई, निराई, देखरेख, दवा पर हुए खर्च की राशि भी नहीं निकल पाएगी। 800 एकड़ में है आम का बगीचा भभुआ। जिला उद्यान कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, कैमूर जिले में करीब 800 एकड़ भूमि में किसानों द्वारा आम का बागीचा लगाया गया है। जिला उद्यान पदाधिकारी डॉ. अभय कुमार गौरव ने बताया कि इस बार आम के पेड़ों में मंजर और टिकोले कम लगे थे। जो दिख रहे थे, उसमें से कुछ हवा के झोंका के कारण पहले ही झड़ गए। हालांकि उन्होंने बताया कि अब जो फल पेड़ में लगे हैं वह बड़े हो गए हैं। हल्की आंधी से बहुत नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि एक एकड़ भूमि में लगे आम के पौधों में 15 से 20 टन आम का उत्पादन होने की संभावना है।

बागीचों की देखभाल

किसान इस प्रजाति के लगाए हैं आम भभुआ। कैमूर जिला के किसान खरीफ व रबी फसल के अलावा खाने एवं व्यवसाय के ख्याल से कुछ भूमि में आम का बागीचा लगाए हैं। किसान विजय दुबे व गुड्डू सिंह ने बताया कि हमलोग बागीचे में लंगड़ा, मालदह, बीजु, सिपिया, शुकुल सहित अन्य प्रजाति के आम की खेती किए हुए हैं। उक्त किसानों ने बताया कि बेहतर उपज के लिए प्रत्येक वर्ष बागीचे की जुताई करते हैं। उसमें लगी घास की सफाई कर दवा का छिड़काव तथा सिंचाई करते हैं, जिसपर हजारों रुपए खर्च करना पड़ता है।

बाजार की स्थिति

बाजार में कम आ रहा लोकल कच्चा आम भभुआ। शहर व ग्रामीण बाजारों में अभी कच्चा व पका हुआ आम कम आ रहा है। फल विक्रेता सरफराज आलम, सोनू कुमार व मुन्ना कुमार ने बताया कि इस साल आम के पेड़ों में फल कम लगे हैं। फिलहाल चटनी, शरबत बनाने व लग्न के मौसम में बाहर से थोड़ा सा कच्चा व पका हुआ आम हमलोग मंगा रहे हैं। दुकानदारों ने यह भी बताया कि पिछले साल लोकल कच्चा आम अब तक बाजार में आने लगा था।

लंगड़ा आम की विशेषता

कैमूर में विशेष रूप से लंगड़ा आम होता है। यह अपनी मिठास, रसीलेपन और गूदे के लिए प्रसिद्ध है। इस आम की खासियत यह है कि पकने के बाद भी हरा ही दिखता है। कहते हैं कि यह आम बहुत मीठा, मुलायम और रसीला होता है। यही कारण है कि बाजार में इसकी मांग ज्यादा होती है। इसकी महक भी मीठी होती है। यह खाने के साथ-साथ जूस, शेक और विभिन्न मिठाइयां बनाने के लिए भी बेहतरीन है। जब कैमूर के बाजार में लंगड़ा आम की कम पड़ने लगता है, तब व्यापारी पड़ोसी यूपी के बनारस से मंगाकर लोगों की मांग पूरी करते हैं। आम मंडी या दुकान पर आनेवाले ग्राहक सबसे पहले लंगड़ा आम की ही मांग करते हैं। कोट कैमूर जिले में करीब 800 एकड़ भूमि में किसानों ने आम का बगीचा लगाया है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार पेड़ों में आम के फल कम लगे हैं। शुरूआती दौर में आधी के कारण आम के टिकोले झड़कर गिर गये थे। जिले में इस बार आम का उत्पादन कम होने की संभावना है। डॉ. अभय कुमार गौरव, जिला उद्यान पदाधिकारी फोटो- 05 मई भभुआ- 4 कैप्शन- भभुआ शहर के नगर थाना परिसर में स्थित पेड़ में लगे आम के फल।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस वर्ष आम का उत्पादन कितना कम हुआ है?
इस वर्ष आम का उत्पादन 30-40 प्रतिशत कम हुआ है।
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