790 का निबंधन व 2810 का ई-केवाईसी
भभुआ में मंगलवार को आयोजित पंचायत शिविर में 790 किसानों का निबंधन और 2810 का ई-केवाईसी किया गया। डीएम ने किसानों से शिविर में पहुंचकर निबंधन कराने की अपील की। जिला प्रशासन ने कृषि योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और बैंकों की सुस्ती पर नाराजगी जताई। ठंड में काम कर रहे निर्माण मजदूरों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

भभुआ। पंचायतों में अभियान के तहत मंगलवार को आयोजित शिविर में 790 किसानों का निबंधन और 2810 का ई-केवाईसी किया गया। डीएम की अध्यक्षता में सीओ व बीएओ की बैठक भी हुई। इस कार्य के लिए 9 जनवरी तक पंचायतों विशेष कैंप लगाए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक किसान लाभान्वित हो सकें। डीएम ने शिविर में कृषि समन्वयक, अंचलाधिकारी, हल्का कर्मचारी, कृषि सलाहकार सहित संबंधित कर्मी सक्रिय रूप से भाग लेते हुए किसानों को सहयोग करने का निर्देश दिया। डीएओ द्वारा बताया गया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए निबंधन जरूरी है। जिला प्रशासन द्वारा सभी किसानों से शिविर में पहुंचकर निबंधन और ई-केवाईसी कराने की अपील की है।
बैंकों की सुस्ती पर डीडीसी ने जताई नाराजगी भभुआ। कैमूर जिले में स्वरोजगार योजनाओं की धीमी प्रगति पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया गया है। डीडीसी सूर्य प्रताप सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में पीएमईजीपी, पीएमएफएमई और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में बिना सूचना अनुपस्थित रहने वाले कई बैंक शाखा प्रबंधकों के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की बात कही गई। जिला अग्रणी प्रबंधक, ग्रामीण बैंक की अधौरा, देवहलिया, कर्मनाशा, लहुरीबारी, पानापुर, रुपपुर, चांद, आदर्श नुआंव, नटेया, फकराबाद शाखाओं और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की भभुआ एवं मोहनियां शाखा के प्रबंधक अनुपस्थित पाए गए। सभी बैंकों को लक्ष्य पूरा करने और लंबित आवेदन निष्पादित करने का निर्देश दिया गया। जोड़ ठंड में काम के दौरान हाथ-पैर कांप रहे भवन निर्माण मजदूरों गुलाब बिंद, बूटन प्रसाद, अजय गोंड ने कहा कि जब कभी काम मिल रहा है, तो मसाला बनाने, पानी डालने, ईंट ढोने के दौरान हाथ-पैर कांप रहे हैं। कार्य स्थल पर अलाव का प्रबंध भी नहीं किया जा रहा है, जिससे परेशानी हो रही है। वह लोग सुबह से शाम तक काम कर रहे हैं। घर लौटने में विलंब हो जा रहा है। हालांकि ठंड के इस मौसम में किसी-किसी दिन ही काम मिल रहा है, जिसके पैसे से पेट भरने की चीजें खरीद रहे हैं। हालांकि अनाज डीलर के पास से मिला ज रहा है।
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