
प्रथम चुनाव में सिर्फ 1808 मतों से हुआ था हार-जीत का फैसला
रामगढ़ में 19 चुनावों में से 7 बार जीत-हार का अंतर 3 हजार मतों के अंदर रहा है। पहले चुनाव में रामचंद्र राय ने 1808 मतों से जीत दर्ज की थी। 2015 में भाजपा की जीत हुई, जबकि 2020 में आरजेडी ने भी प्रयास...
कांग्रेस के टिकट पर रामचंद्र राय बने थे विधायक, दूसरे चुनाव में पगड़िया बाबा ने दर्ज की थी जीत रामगढ़ में अब तक हुए 19 चुनावों में 7 बार तीन हजार मतों से कम का रहा है जीत-हार का अंतर (पेज चार) रामगढ़, एक संवाददाता। रामगढ़ के सियासी अखाड़े में कांटे की टक्कर पहले चुनाव से ही शुरू है। अब तक हुए 19 चुनावों में 7 बार जीत-हार का अंतर 3 हजार मतों के अंदर में रहा है। पहले विधानसभा में चुनाव में भी रामचंद्र राय और दशरथ तिवारी के बीच घमासान हुआ था। तब 1808 मतों से आईएनसी के टिकट पर चुनाव लड़े रामचंद्र राय ने जीत दर्ज की थी।

इन्हें 8784 मत मिले थे। निकटतम प्रतिद्वंद्वी सोशलिस्ट पार्टी के दशरथ तिवारी को 6976 मत मिले थे। पहले चुनाव में रामगढ़ विधानसभा में 73638 मतदाताओं में से 36846 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। कुल 10 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, जिसमें 5 निर्दलीय शामिल थे। वर्ष 1957 के चुनाव में प्रसोपा के टिकट पर दशरथ तिवारी ने 16996 मत पाकर आईएनसी के रामचंद्र राय को 2317 मतों से हराया। वर्ष 1962 में आईएनसी के टिकट पर विश्वनाथ राय ने 16374 मत पाकर प्रसोपा के दशरथ तिवारी को 5177 मत से शिकस्त दी। फिर 1967 के चुनाव में संसोपा के टिकट पर सच्चिदानंद सिंह को 25881 मत मिले। इन्होंने आईएनसी के विश्वनाथ राय को 6987 मत से मात दी। वर्ष 1969 में आईएनसी के विश्वनाथ राय ने 21143 मत पाकर सच्चिदानंद सिंह को 6787 मतों से हराया। वर्ष 1972 में संसोपा के सच्चिदानंद सिंह ने 25966 मत पाकर 5606 मतों से जीत दर्ज की। बीच के कालखंड में एक बार सच्चिदानंद सिंह और लगातार छह बार जगदानंद सिंह के जीत का अंतर पांच अंको में रहा। वर्ष 1977 में विधानसभा चुनाव हुए तो पहली बार जनता पार्टी के टिकट पर पूर्व सिंचाई मंत्री सच्चिदानंद सिंह ने पांच अंकों के फासले से जीत दर्ज की। तब उन्होंने आईएनसी की डॉ. प्रभावती सिंह को 12857 मतों से हराया था। इसके बाद 1985 से 2005 तक हुए चुनाव में जगदानंद सिंह ने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की। इसके बाद के चुनावों में इतिहास ने खुद को दोहराया और जीत का अंतर लगातार घटता गया। वर्ष 2015 में पहली बार भाजपा जीती वर्ष 2015 में पहली बार समाजवादी गढ़ में भगवा परचम लहराया। जीत का अंतर चार अंकों में ही रहा। तब भाजपा के अशोक सिंह ने राजद के अंबिका यादव को 8011 मतों से शिकस्त दी। वर्ष 2020 में आरजेडी ने सुधाकर सिंह पर दांव लगाया तो अंबिका यादव ने राजद से नाता तोड़ बसपा के टिकट पर अपनी किस्मत को आजमाया। हालांकि बसपा प्रत्याशी मामूली मतों से चूक गए। सुधाकर सिंह ने सबसे कम मात्र 189 मतों से जीत दर्ज करने का रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद सुधाकर सिंह वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में बक्सर सीट से सांसद चुने गए तो रामगढ़ की इस रिक्त सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा के अशोक सिंह ने दोबारा जीत हासिल की। अशोक सिंह ने बसपा प्रत्याशी सतीश यादव को 1362 मतों के अंतर से हराया।

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