
दिलचस्प मोड़ पर पहुंची रामगढ़ सीट की चुनावी जंग
संक्षेप: रामगढ़ में 151599 पुरुष और 134211 महिला मतदाता कर सकेंगे मतदान चुनावी बिसात पर शह और मात के खेल में कई दांव आजमा रहे हैं प्रत्याशी
रामगढ़ में 151599 पुरुष और 134211 महिला मतदाता कर सकेंगे मतदान चुनावी बिसात पर शह और मात के खेल में कई दांव आजमा रहे हैं प्रत्याशी (पेज चार की बॉटम खबर) रामगढ़, एक संवाददाता। बक्सर संसदीय क्षेत्र के रामगढ़ विधानसभा में चुनाव की जंग दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। एक साल पहले हुए उपचुनाव के नतीजे ने फाइनल चुनाव को रोचक बना दिया है। यहां के प्रत्याशी चुनावी बिसात पर शह और मात के खेल में कई दांव आजमा रहे हैं। मतदान 11 नवंबर को होगा। इससे पहले कई समीकरण बनेंगे-बिगड़ेंगे। यहां के 2 लाख 86 हजार 876 मतदाता मतदान करेंगे।

इस सीट पर 151599 पुरुष व 134211 महिला मतदाता हैं। इनके अलावा 1063 सेवा मतदाता और तीन थर्ड जेंडर वोटर हैं। चुनावी अखाड़े के पहलवान प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक चुके हैं। बक्सर संसदीय क्षेत्र की यह हॉट पॉलिटिकल सीट पर एनडीए व महागठबंधन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। जबकि बसपा जीत का खाता खोलने को बेताब है। उपचुनाव में इस सीट पर भाजपा ने बसपा को मामूली मतों से मात देकर जीत दर्ज की थी। राजद तीसरे स्थान पर खिसक गया। ऐसे में आखिरी दम तक अपने किले की रक्षा कर औरों में सेंधमारी की जुगत ही हर तरफ से होती दिख रही है। राजद से प्रदेश अध्यक्ष रहे जगदानंद सिंह के पुत्र व बक्सर सांसद सुधाकर सिंह के छोटे भाई अजीत कुमार सिंह, भाजपा से निवर्तमान विधायक अशोक सिंह, बसपा से पूर्व विधायक अंबिका सिंह के भतीजे सतीश कुमार सिंह, जन सुराज पार्टी से आनंद कुमार सिंह समेत छह प्रत्याशी मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। इन प्रत्याशियों की किस्मत 11 नवंबर को मतदाता ईवीएम में लॉक करेंगे। चुनाव परिणाम 14 नवंबर को आएगा। वर्ष 2020 में 189 मतों से हुई थी जीत-हार गौरतलब है कि वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में रामगढ़ सीट से राजद के सुधाकर सिंह ने जीत दर्ज की थी। तब इन्होंने बसपा के अंबिका सिंह को 189 मत से पराजित किया था। सुधाकर सिंह को 58083 व अंबिका सिंह को 57894 मत मिले थे। जबकि भाजपा के अशोक सिंह ने 56084 मत प्राप्त किया था। जीत का आंकड़ा पार करने में अशोक करीब 2000 मतों से पिछड़ गए थे। लेकिन, वर्ष 2015 के चुनाव व 2024 के उपचुनाव में इन्होंने जीत हासिल की थी। मतदाताओं के बीच चल रहा जोड़-तोड़ वैसे तो हर गठबंधन का अपना समीकरण है। बीते उपचुनाव की ही तरह इस चुनाव में भी जाति का जोड़-तोड़ देखा जा रहा है। लेकिन, कौन सी बिरादरी किस ओर करवट लेगी, अभी कहना मुश्किल है। राजद, भाजपा व जनसुराज प्रत्याशी क्षत्रिय समाज से आते हैं, जबकि बसपा उम्मीदवार यादव बिरादरी से हैं। कौन कितने लोगों को अपने पक्ष में गोलबंद करने में सफल होंगे, यह तो 14 नवंबर को पता चलेगा, पर चुनाव मजेदार साबित होगा। दस बार जीता है सहुका परिवार रामगढ़ सीट राजद का मजबूत किला रहा है। यहां से अकेले जगदानंद सिंह की बात करें, तो तीन बार राजद, एक बार लोकदल और दो बार जनता दल के टिकट पर वह जीते। जगदानंद सिंह के परिवार के सच्चिदानंद सिंह तीन बार और सुधाकर सिंह भी जीते। यानी दस बार इस सीट पर सहुका परिवार ने जीत दर्ज की। राजद प्रत्याशी अजीत के भाई सुधाकर सिंह यहां से विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में बक्सर संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं। वर्ष 2015 में भाजपा के अशोक ने जीती थी बाजी अशोक सिंह वर्ष 2015 में भाजपा के टिकट पर यहां से जीते थे। भाजपा की यह पहली जीत थी। बीते साल उपचुनाव में भी इतिहास दोहराने में भाजपा कामयाब हुई। इस चुनाव में तीसरी जीत के लिए एनडीए एड़ी-चोटी का जोर लगाया है। वर्ष 2020 के चुनाव में भी भाजपा ने अशोक सिंह को प्रत्याशी बनाया था। इन्होंने 56084 मत प्राप्त किया था। यह 2000 मतों से पिछड़ गए थे। दो बार से जीत से चूक रही बसपा ने लगाया जोर बसपा को जीत का खाता खोलने की प्रतीक्षा है। बसपा लगातार दो बार से मामूली मतों से जीत से चूक रही है। ऐसे में पार्टी ने इस चुनाव में मैदान मारने के लिए पूरा जोर लगाया है। बता दें कि वर्ष 2020 के चुनाव में पूर्व विधायक अंबिका यादव राजद के सुधाकर सिंह से महज 189 मतों से हारे थे तो बीते साल हुए उपचुनाव में अंबिका के भतीजे सतीश भाजपा के अशोक से 1362 मतों से हार गए। फोटो- 01 नवंबर भभुआ- 1 कैप्शन- रामगढ़ के दुर्गा चौक पर स्थित एक दुकान पर शनिवार को चुनाव पर चर्चा करते लोग।

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