मस्जिदों में अकीदत के साथ पढ़ी गई पहले जुमे की नमाज
कैमूर में रोजेदारों ने रमजान के पहले जुमा की नमाज अकीदत के साथ अदा की। मस्जिदों में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और अल्लाह से दुआएं मांगी। मदरसा असराफुल उलूम के हाफिज अकबर अली ने रमजान की विशेषताओं पर प्रकाश डाला और लोगों को नेक काम करने की सलाह दी।

रोजेदारों ने हाफिज-ए-कुरान के साथ देर रात तक कुरान की तिलावत की जिले के ग्रामीण व शहर के मस्जिदों में पढ़ी जा रही पांच पहर की नमाज (पेज चार की फ्लायर खबर) भभुआ, कार्यालय संवाददाता। कैमूर में रोजेदारों ने मुकद्दस रमजान के पहले जुमा की नमाज अकीदत के साथ अदा की। इस दौरान रोजेदारों ने अल्लाह से रहमत फरमाने, गुनाहों को माफ करने, देश-दुनिया में अमन कायम रखने, आम-अवाम की भलाई करने, मुल्क की तरक्की व खुशहाली की दुआएं मांगी। जिले के ग्रामीण व शहर क्षेत्र के मस्जिदों में नमाज पढ़ने को लेकर अकीदतमंदों की काफी भीड़ दिखी। कैमूर के जामा, ईदगाह, एकरा, कैनाती, दखिन मोहल्ला पठान टोली, सराय, खैरा, सोनहन, कोचारी, सादे कवई, मिरियां, उजारी सिकठी, कुंज, रूपपुर, मोकरी, चैनपुर, बिउर, डड़वा, सिकंदरपुर, नौघड़ा, पतेरी, करवंदिया, कुड्डी, भिट्टी, बेलौड़ी, मोहनियां, कुदरा, नेवरास, गंगवलिया, कटरा, नटेया, सरियांव, मुजान, रामगढ़, डहरक, डरवन, देवहलिया, नुआंव, मुखरांव, अखिनी, सिसौढ़ा, दुर्गावती, डुरमी, आदर्श नुआंव, चेहरियां, कल्याणपुर, छाता, करारी, तेनुआ, कुड़ारी, भवपोखर, अमांव, सबार, झाली आदि मस्जिदों में दूसरे जुमे की नमाज पढ़ी गई।
मोहनियां के मदरसा असराफुल उलूम के हाफिज अकबर अली ने पाक महीना रमजान की विशेषताओं पर उल्लेख करते हुए फरमाया कि माहे रमजान का पहला अशरा शुरू हुआ है, जो 10 दिनों का होता है। अल्लाह ने इस पाक महीने को दुआओं का जरिया बनाया है। इस महीने में गलतियों से तौबा करने को अल्लाह कबूल करता है। साथ ही एक नेकी करने का 10 गुना अधिक सवाब मिलता है। मजबूरों की मदद व इबादत करें वार्ड 16 के 86 वर्षीय रमजान अंसारी ने कहा कि माह-ए-रमजान में अधिक से अधिक लोगों की मदद करनी चाहिए। गरीब व मजबूर लोगों की हर तरह से मदद करें। इस माह में ज्यादा से ज्यादा इबादत करनी चाहिए। यह भी कहा कि अधिक से अधिक खुद को बुराई से बचाएं। नेक काम करें। खुद के गुस्से पर काबू रखना जरूरी है। इफ्तार कराने का रोजेदारों को काफी फायदा होता है। तीन अशरा में बंटा है पाक रमजान माह माहे रमजान तीन अशरा में बंटा है। हर अशरा दस रोज का होता है। पहला अशरा चल रहा है। इस अशरे में बंदों पर अल्लाह की रहमत बरसती है। दूसरा अशरा 11 से 20 रोजे के लिए होता है। दूसरे अशरे में लोग अल्लाह की इबादत कर अपनी मगफिरत के लिए दुआ करते हैं। तीसरा अशरा जो 21वें रोजे से शुरू होगा। यह अशरा माफी का होता है। इसमें बंदे अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। फोटो- 20 फरवरी भभुआ- 4 कैप्शन- शहर के ब्लॉक गेट के पास स्थित मस्जिद के पास रमजान के दूसरे जुमे को नमाज अदा करते अकीदतमंद।
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