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23 सितम्बर, 2020|2:37|IST

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दशहरा, दिवाली व छठ के बाजार की तैयारी धीमी

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रामनवमी, ईद, बकरीद, रक्षाबंधन, मुहर्रम पर नहीं चला बाजार

शादी-विवाह के लग्न में भी बाजार के बंद रहने से हुई परेशानी

24 अक्टूबर को नवरात्र की होगी पूजा

12 नवंबर को धनतेरस की करेंगे खरीद

14 नवंबर को मनाई जाएगी दीपावली

20 नवंबर को छठ पर व्रती देंगे अर्घ्य

भभुआ। कार्यालय संवाददाता

कोरोना काल में मार्च माह के बाद से कई पर्व में बाजार की चहलपहल फीकी रही। केवल जरूरत की चीजें मिल रही थीं। रामनवमी, रक्षाबंधन, ईद, बकरीद, मुहर्रम में कारोबार प्रभावित रहा। अब दशहरा, धनतेरस, दीपावली और छठ पर्व पर भी बाजार के प्रभावित रहने की संभावना जताई जा रही है। यही कारण है कि शहर के कारोबारी उक्त पर्वों के लिए बाहर से अभी माल नहीं मंगा रहे हैं। जबकि पहले ऐसा नहीं था। दो माह पहले से ही ग्राहकों की पसंद की चीजों को मंगाने का ऑर्डर देने का काम व्यवसाई देने लगते थे।

रेडीमेड कारोबारी गोपाल गुप्ता बताते हैं कि अभी बाजार के मजबूत होने में देर लगेगी। चूंकि आमजनों की आमदनी अभी बहुत अच्छी नहीं हो सकी है। शहर का बाजार ग्रामीण क्षेत्र के लोगों पर निर्भर है। बाजार में सोशल डिस्टेंसिंग के पालन करने के सख्त नियम को देखते हुए दुकानों पर भीड़ रोकी जा रही है। दशहरा में अगर प्रतिमा स्थापित करने व पूजा करने की छूट मिलती है तो मेला घूमने या पर्व को लेकर कपड़ों की खरीदारी हो सकती है। लेकिन, यह सब कोरोना की स्थिति पर निर्भर करता है। अगर कोरोना का प्रभाव बढ़ेगा तो पर्वों में भीड़ पर पाबंदी लगेगी। बाजार में भीड़ पर सख्ती लागू होगी। तब बाजार मंदा हो सकता है।

मालूम हो कि नवरात्र की शुरुआत 17 अक्टूबर को होगी और 24 अक्टूबर को नवरात्री की पूजा तथा 25 को विजयादशमी मनाई जाएगी। इस पर्व पर लोग कपड़ों की खरीदारी करते हैं। इसके बाद 12 नवंबर को धनतेरस होगा। इस दिन लोग शुभ मुहूर्त में विभिन्न द्रव्यों के बर्तन व आभूषण की खरीदारी की जाती है। इसको लेकर व्यवसाई पहले से ही बर्तन मंगाने लगते हैं। आभूषण व्यवसाई आकर्षक लुक वाले आभूषण मंगाते हैं और ऑर्डर पर कारीगर से ग्राहकों की पसंद पर तैयार कराते हैं। दीपावली का बाजार भी खूब सजता है। घर-आंगन, प्रतिष्ठान को सजाया जाता है। छठ पर्व में भी व्रती व उनके परिवार के लोग पूजा सामग्री, फल, कपड़ा आदि की खरीदारी करते हैं।

पूजा सामग्री का सजता है बाजार

नवरात्र शुरू होने से पहले भक्तजन पूजा सामग्री की खरीदारी कर लेते हैं। इसको लेकर भी बाजार में खूब भीड़ रहती है। प्रतिमा व चित्र से लेकर पूजा स्थल व सजावट सामग्री तक की खरीदारी करते हैं। श्रद्धालु लाल चुनरी, चावल, लाल कलावा, गंगा जल, चंदन, नारियल, कपूर, जौ के बीज, मिट्टी का बर्तन, गुलाल, सुपारी, पान के पत्ते, लौंग, इलायची, दुर्गा सप्तशती की किताब आदि पूजा सामग्री की खरीदारी करते हैं। इसके अलावा अन्य सामग्री का भी प्रबंध करना होता है।

मां दुर्गा के नौ रूपों का करते हैं दर्शन

शारदीय नवरात्र में भक्तजन मां दुर्गा के नौ रूपों का दर्शन करते हैं। कुछ लोग अपने घरों पर कलश स्थापित कर पूजा-अर्चना करते हैं। पूजा कमेटियां भी प्रतिमा स्थापित करती हैं। भक्त जगन मां दुर्गा के शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंद माता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी, मां सिद्धिदात्री के रूपों की आराधना करते हैं। वेद-पुराणों में मां दुर्गा को शक्ति का रूप माना गया है, जो असुरों से इस संसार की रक्षा करती हैं। नवरात्र के समय मां के भक्त उनसे अपने सुखी जीवन और समृद्धि की कामना करते हैं।

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कैप्शन- शहर के एकता चौक के पास स्थित एक दुकान से मंगलवार को साड़ी की खरीदारी करतीं महिलाएं।

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  • Web Title:Preparations for Dussehra Diwali and Chhath market slow