
राजनीति आउर सबुर के सौ धार ना त दुधारी तलवार
सपना में सिंहासन लउकल आ गोटी लाल करा लिहलीं सपना में सिंहासन लउकल आ गोटी लाल करा लिहलीं
सपना में सिंहासन लउकल आ गोटी लाल करा लिहलीं (नुक्कड़ पर चुनाव) अखिलेश श्रीवास्तव रामगढ़। रामगढ़ दक्षिणी के सुपर बाजार में चाय दुकान पर बैठकी लगी है। मोनू ने एन्ने-ओन्ने वाला खेला का प्रसंग छेड़ दिया। बोला, सभे चिहाइल बा कि पाला बदल त रोजे रफ्तारे धइले जात बा। सोमनाथ कहले कि ई खेला अब खूबे चलत बा। पहिलवा अइसन न रहे। टिकट लहावो मन मोहिनी पार्टी से, आउर जीतला के बाद घुस जा मशरफ पाटी में। पांच साल पहिले एही फरमूला से 'साहेब जी' दोसरा दल के दामन थाम लिहलन। तब कैबिनेट में कैमूर के हिस्सा मिल गइल। मंगल शर्मा बोले, लेकिन बवाल भी मचल बा।

सियासी हलका में कि ई ठीक बात नइखे। चुनाव लड़अ कौनो पार्टी से आउर जीतला के बाद पाला बदल ल। बाकी आपन कैमूर में अइसन उदाहरण कई गो बा। एतना सुन के ताव में आए बुधराम चच्चा पूछे कि ए गुरुचरण ई का माजरा बा हो। हमेशा अइसन खेला हो जात बा। हम त नदान ठहरलीं। बस एक्के वाक्य में जवन बुझाइल बक देहलीं- 'सपना में सिंहासन लउकल आ गोटी लाल करा लेहलीं'। मंडली बुधराम चच्चा क बात सुन के गदगद। अब बेंच पर बइठल परमुख साहेब के ना रह गइल त लगे हाथ भगवान कृष्ण के एगो परसंग सुना देहलन। जेम्मा भगवान कहले बाड़ें कि राजनीत के सांच से लगाव ना होखे। झूठ से दुराव ना होखे। मंजिल कुरसी होले। कुरसी खातिर ऊ कुछ 'भी' करेले। अब चर्चा आगे बढ़ चली। इतिहास खंगाले में बुधराम चच्चा के कवनो जवाब नाहीं। इयाद आइल पुरनका जमाना में मोहनियां आउर चैनपुर से एक्के संगे दो विधायक आपन पाटी छोड़ दोसरा पाटी के अंगना में सरगम गावे लगले। चर्चा एहू भइल कि कइसे टिकस गड़बड़इला के सनहा पर भभुआ से एक बार जीतल विधायक जी धड़ाधड़ दुई-दुई गो पार्टी में एंट्री मार दिहलन। हाले फिलहाल मोहनियां भी ई खेला में आपन नाम दर्ज करा लिहलस। भभुआ भी पीछे नइखे। आखिर में गुरुचरण एह बात से बैठकी के धन्यवाद ज्ञापन किए कि रजनीति आउर सबुर के सौ धार ना त दुधारी तलवार।

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