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1 दिसंबर, 2020|2:45|IST

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अब चौक-चौराहों पर सरकार बनाने लगे हैं मतदाता

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रोजगार, विकास, सिंचाई पर काम होने की सरकार से बंधी लोगों की उम्मीदें

पार्टीजन कर रहे अपनी सरकार का दावा, वोटर बोल रहे 10 का करिए इंतजार

58 उम्मीदवारों के भाग्य का होना है फैसला

10 नवंबर को हार-जीत का चल जाएगा पता

भभुआ। कार्यालय संवाददाता

किसानों को अब खेतों की सिंचाई तो युवा उम्मीदों को पंख देने के सपने बुनने लगे हैं। हो भी क्यों नहीं? प्रत्याशियों ने विकास का तो शीर्ष नेताओं ने इन्हें रोजगार का सपना जो दिखाया है। अब चंद दिनों में सरकार बननी है, तो सभी को अपने सपने साकार होने की उम्मीद दिखने लगी है। लेकिन, वादा तो हर वर्ष होता है, पूरा कितना हो पाता है यह मतदाता भी भली-भांति जानते हैं। फिर भी उन्हें उम्मीद की किरण दिख रही है। तभी को वह चर्चा के दौरान इन बातों को पूरी मजबूती के साथ रख रहे हैं।

चुनाव के समय और बाद में भी, जब तक चुनाव परिणाम नहीं आ जाते हैं शहर का एकता चौक चौपाल में तब्दील हो जाता है। कभी प्रत्याशियों की जीत-हार का तो कभी सरकार बनने-बिगड़ने की चर्चा का यह चौक गवाह बनते रहा है। अब मतदान हो चुका है। मतों की गिनती 10 नवंबर को होगी। इसी दिन यह पता चल सकेगा कि जिले की चार सीटों पर चुनाव लड़ रहे 58 प्रत्याशियों में से किसे कितना मत मिलेगा? बहरहाल, मतगणना में कोई रनर होगा तो कोई विनर। अभी जो चर्चा चल रही है वह हार-जीत के साथ सरकार बनने-बनाने की।

रविवार होने की वजह से कामकाजी लोग भी फुर्सत में थे। दफ्तर बंद थे इसलिए कर्मी भी काम के बोझ से हल्का महसूस कर रहे थे। घर पर विलंब से भी पहुंचें तो कोई बात नहीं। एकता चौक पर पश्चिम तरफ चाय की दुकान है, जहां मॉर्निंग वाक कर लौटने वाले, सब्जी की खरीदारी करने आने वाले व अन्य लोग चाय की चुस्की ले रहे थे। इनमें कुछ सरकारी कर्मी और बिजनेसमैन थे तो कुछ नेता व कार्यकर्ता भी शामिल थे।

सरकार बनाने का समझाया गणित

रामपूजन सिंह चाय की चुस्की लेते हुए अपने साथी दिवाकर प्रसाद से बोले लगता है इस बार भी एनडीए की सरकार बनेगी। पास में बैठे खद्दरधारी अरविंद ने पूछा वह कैसे बाबा? रामपूजन ने पूरा हिसाब समझाया। बिहार में 243 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी गठबंधन को 122 विधायकों का समर्थन चाहिए। अगर एनडीए को सरकार बनाने में कुछ संख्या कम होगी तो वह लोजपा का समर्थन प्राप्त कर लेगी या फिर निर्दलीय विधायक साथ में हो सकते हैं। काम के आधार पर वोट मिला भी है।

फिर टुकड़े-टुकड़े में बंट क्यों गए

अरविंद ने कहा ऐसा नहीं हो सकता है कि नीतीश को रोकने के लिए महागठबंधन को अन्य सेक्यूलर पार्टी समर्थन कर दे। चाय पीते हुए उनकी बातों को सुन रामराज तपाक से बोल उठे जरूरत पड़ी तो चिराग पासवान भी ऐसा निर्णय ले सकते हैं। हो सकता है बसपा-रालोसपा व ओवैसी की पार्टी भी समर्थन में खड़ा हो जाए। लेकिन, वृद्ध कामेश्वर पासवान ने कहा कि जब इन्हें नीतीश कुमार को सत्ता पर काबिज होने से रोकना ही था तो एक साथ चुनाव क्यों नहीं लड़े? टुकड़े-टुकड़े में बंट क्यों गए? इसीलिए न कि हम ज्यादा सीट लाएंगे तो मुख्यमंत्री के दावेदार होंगे। यहां तो हर गठबंधन मुख्यमंत्री का चेहरा परोसकर चुनाव लड़ रहा है।

इन मुद्दों पर लोगों ने दिया है वोट

शहर के नारायण प्रसाद व ज्वाला सिंह बताते हैं कि जिले के लोग सिंचाई, विकास, पेयजल, शिक्षा, रोजगार, सड़क, जलनिकासी का बेहतर प्रबंध करने के लिए वोट दिया है। छात्र-छात्राओं के लिए महिला-पुरुष अंगीभूत कॉलेज, गर्ल्स हॉस्टल, कॉमन रूम, खेल प्रबंधन, बेहतर लैब, लाइब्रेरी, किसानों को सिंचाई, समय पर खाद, बीज, कृषि यंत्र, उपज का समर्थन मूल्य, पहाड़ी क्षेत्र में पेयजल, शिक्षा, सड़क तो शहर में जलनिकासी का प्रबंध करने आदि को लेकर मतदाताओं ने वोट दिया है।

फोटो- 01 नवंबर भभुआ- 2

भभुआ- शहर के एकता चौक के पास स्थित चाय दुकान पर रविवार को सरकार बनने व बिगड़ने पर चर्चा करते लोग।

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  • Web Title:Now voters are starting to form government at square-intersections