Hindi NewsBihar NewsBhabua NewsNOTA Emerges Strong in 2020 Bihar Assembly Elections Secures 2 1 Votes
नोटा ने भभुआ के 10 प्रत्याशियों को किया था पराजित

नोटा ने भभुआ के 10 प्रत्याशियों को किया था पराजित

संक्षेप: 2020 में भभुआ विधानसभा चुनाव में 14 प्रत्याशियों में से नोटा ने 3671 मत प्राप्त किए, जो कुल मतों का 2.1% है। नोटा ने 10 अन्य प्रत्याशियों को पीछे छोड़ते हुए 5वें स्थान पर कब्जा किया। यह विकल्प 2014 से लागू है और इसका उपयोग बढ़ रहा है।

Tue, 4 Nov 2025 08:43 PMNewswrap हिन्दुस्तान, भभुआ
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वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में 14 प्रत्याशी थे मैदान में, सिर्फ चार प्रत्याशी ही मत पाने में नोटा से निकले थे आगे नोटा को ईवीएम से 3660 व पोस्टल बैलेट से 11 मत मिले थे पंद्रहवें नंबर वाले नोटा को 3671 यानी 2.1% मत मिले थे मत सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रयोग के लिए विकल्प बना नोटा वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार हुआ था इस्तेमाल वर्ष 2020 के चुनाव में किसे कितने मत मिले प्रत्याशी दल मत प्रतिशत भरत बिंद राजद 47516 32.98 रिंकी रानी पांडेय भाजपा 47516 27.22 वीरेंद्र कुमार सिंह रालोसपा 37014 21.21 डॉ. प्रमोद कु. सिंह निर्दल 20639 11.83 सत्येंद्र कुमार दुबे निर्दल 1390 0.80 रामचंद्र सिंह यादव जाप 1173 0.67 नरेंद्र प्रताप सिंह निर्दल 1133 0.65 दिवाकर चौबे राजपा 1046 0.63 छठु गोंड आंपाइं 724 0.41 उज्जवल कु. चौबे निर्दल 719 0.41 कृष्णकांत तिवारी निर्दल 669 0.38 संजय कुमार सिन्हा एनसीपी 640 0.37 पूनम सिंह बमुपा 314 0.18 मुख्तार अंसारी पीस पार्टी 275 0.16 नोटा 3671 2.1 भभुआ, कार्यालय संवाददाता।

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वर्ष 2020 में संपन्न विधानसभा चुनाव के दौरान भभुआ सीट से नोटा ने 10 प्रत्याशियों से जीतकर आगे निकल गया था। इस क्षेत्र से कुल 14 प्रत्याशी चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे थे। नोटा की क्रम संख्या 15 थी। लेकिन, इसने 10 प्रत्याशियों को पीछे धकेलकर 5वें स्थान पर पहुंच गया। वैसे तो नोटा को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से 3660 और पोस्टल बैलेट से 11 मत मिले थे। इसने कुल 3671 मत प्राप्त किया, जो कुल पड़े मत का 2.1 प्रतिशत था। हालांकि वर्ष 2015 में हुए मतदान में भभुआ में नोटा को सिर्फ 605 मत ही मिल सके थे। क्योंकि नोटा का प्रावधान वर्ष 2014 में लागू हुआ। इस कारण इसके बारे में बहुत कम लोग जानते थे। प्रावधान लागू होने के बाद पहली बार वर्ष 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में नोटा का प्रयोग हुआ था, जिसमें इसे चैनपुर में सबसे अधिक 3074 और सबसे कम 605 मत भभुआ से मिले थे। जबकि मोहनियां में 2419 और रोगढ़ में 2065 मत मिले थे। वर्ष 2025 के चुनाव में नोटा को कितना वोट मिलेगा, इसके बारे में 14 नवंबर को मतगणना के बाद ही पता चलेगा। बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद चुनाव आयोग द्वारा वर्ष 2013 में शुरू किए गए नोटा विकल्प वर्ष 2014 में सासाराम संसदीय क्षेत्र के चुनाव के दौरान लागू हुआ, जिसमें नोटा को 13 हजार 379 मतदाताओं ने तरजीह दी थी। इन मतदाताओं ने ‘इनमें से कोई नहीं’ या नोटा विकल्प के पक्ष में मतदान किया था। जबकि लोकसभा चुनाव के बाद वर्ष 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में 6163 लोगों ने नोटा बटन का इस्तेमाल किया था। आखिरी विकल्प है नोटा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में सबसे आखिरी विकल्प के तौर नोटा का बटन होता है। हालांकि लोगों का मानना है कि जहां तक परिणामों को प्रभावित करने की बात है तो नोटा उसमें बहुत प्रभावी भूमिका में नहीं रहा है। नोटा का अर्थ है नन ऑफ द एबव यानी इनमें से कोई नहीं। तब एक कविता प्रचलित हुई थी ‘अपराधी हो यदि खड़ा, मत करिए स्वीकार-नोटा बटन दबाइए, खुद करिए उपचार’। लोस चुनाव में भी पांचवें स्थान पर था नोटा नोटा विकल्प लागू होने के बाद पहली बार सासाराम संसदीय क्षेत्र के 13379 मतदाताओं ने नोटा बटन दबाया था, जो प्रत्याशियों को मिले मतों में पांचवें नंबर पर था। इस सीट पर ‘आप’ की गीता आर्य को 11005 वोट मिले थे। इन्हें मिले वोट से नोटा के बटन को 2374 अधिक लोगों ने इस्तेमाल किया था। जबकि तेतरी देवी को 7486, सुरेंद्र राम को 6144, राजनारायण राव को 4395, रविकांत चौधरी को 3980, सरोज राम को 3906 एवं नंदलाल राम को 2808 मत मिले थे। यानी उक्त तमाम प्रत्याशियों को मिले वोट पर नोटा का बटन भारी पड़ा था।