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सदर अस्पताल से जलनिकासी के लिए नहीं बना नया प्लान (पेज तीन)

मुख्य नाले का लेबल उंचा व अस्पताल का ढाल होने से डूबता है रास्ता मुख्य नाले का लेबल उंचा व अस्पताल का ढाल होने से डूबता है...

सदर अस्पताल से जलनिकासी के लिए नहीं बना नया प्लान (पेज तीन)
हिन्दुस्तान टीम,भभुआMon, 27 May 2024 08:45 PM
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मुख्य नाले का लेबल उंचा व अस्पताल का ढाल होने से डूबता है रास्ता
बारिश होने पर अस्पताल आने-जाने में मरीज, परिजन, स्टॉफ होते हैं परेशान

भभुआ, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। स्वास्थ्य विभाग ने सदर अस्पताल से जलनिकासी के लिए चालू वित्तीय वर्ष में अब तक कोई नया प्लान नहीं बना सका है। इससे यह आशंका बढ़ गई है कि इस वर्ष भी बारिश होने पर अस्पताल परिसर में जलभराव की समस्या उत्पन्न होगी, जिससे न सिर्फ मरीज व उनके परिजनों, बल्कि चिकित्सक व स्टॉफ को भी ड्यूटी करने आने-जाने में परेशानी होगी। विकल्प के तौर पर अस्पताल प्रबंधन ने पंप का प्रबंध किया है, जिसके सहारे परिसर में जमा पानी को निकाला निकाला जाता है। लेकिन, यह अस्थाई व्यवस्था है।

शहर के गंदे पानी की निकासी के लिए बनाए गए नाले का लेबल उंचा है। जबकि सदर अस्पताल का नाला ढाल में है। इस कारण अस्पताल परिसर में जमा पानी सीधे मुख्य नाले में नहीं पहुंच पाता है, जिससे अस्पताल में जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। मिशन 60 डे के तहत अस्पताल के चारों ओर नाले का निर्माण कराया गया है। फिर भी समस्या यथावत है। जब शहर में मूसलाधार बारिश होती है, तब परेशानी बढ़ जाती है। जमा पानी के बीच से दो चक्का की गाड़ी से आने-जानेवाले लोगों में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

एक नर्स ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जब तेज बारिश होती है, तब अस्पताल परिसर में झील सा नजारा दिखता है। दो से तीन फुट पानी जमा हो जाता है। पानी के उपर काला व सफेद रंग के कीड़े के अलावा मेडिकल कचरा, कागज आदि तैरते दिखते हैं, जिसमें प्रवेश करने से मन भन्ना जाता है। मरीजों संजय बैठा व कौशल्या देवी ने कहा कि इस समस्या का स्थाई समाधान स्वास्थ्य महकमा या नगर परिषद प्रशासन द्वारा नहीं किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा समरसेबल पंप से जलनिकासी का अस्थाई प्रबंध किया गया है।

रोजाना औसतन 700 मरीज आते हैं अस्पताल

भभुआ। सदर अस्पताल में रोजाना औसतन 700 मरीज अपने स्वास्थ्य की जांच व इलाज कराने आते हैं। इनमें ट्रूनेट मशीन, सीटी स्कैन, डिजिटल एक्स-रे, पैथोलॉजी जांच, आयुष्मान कार्ड बनवाने, फिजियोथेरेपी कराने के लिए भी मरीज आते हैं। एसएनसीयू में नवजात को इलाज कराने के लिए अभिभावक लाते हैं। दीदी की रसोई से मरीजों को मुफ्त व उनकी सेवा में आए परिजनों को भोजन-नाश्ता का प्रबंध किया जाता है। उक्त सेवाएं लेने के लिए मरीजों व उनके परिजनों को इसी गंदे पानी से होकर आना-जाना पड़ता है। हि.प्र.

मिशन 60 डे से हुआ है नाले का निर्माण

भभुआ। सदर अस्पताल परिसर में पहले से नाला बना था। लेकिन, एकसिरे से जलनिकासी नहीं हो पाती थी। तब मिशन 60 डे के तहत परिसर में नाले का निर्माण कराया गया। लेकिन, इस नाले के निर्माण के बाद भी जलभराव की समस्या का समाधान नहीं हो सका। अस्पताल के सौंदर्यीकरण पर मिशन 60 डे के तहत करीब एक करोड़ रुपया खर्च किया गया है। मरीज के परिजनों रामचंद्र सिंह व प्यारे लाल ने कहा कि अस्पताल में जमा होनेवाला पानी तभी निकलेगा, जब मुख्य नाले की खुदाई कर और गहरा नहीं बनाया जाएगा। हि.प्र.

मोटर से पानी की करते हैं निकासी

भभुआ। स्वास्थ्य प्रबंधन का कहना है कि सदर अस्पताल परिसर में जमा पानी की निकासी के लिए मुख्य द्वार पर दो एचपी का मोटर लगाया गया है। इस मोटर के पानी को पाइप के सहारे मुख्य नाले तक पहुंचाया जाता है। इसके अलावा अस्पताल परिसर में चार जगहों पर सोख्ता का निर्माण कराया गया है। हालांकि आमजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने जलनिकासी का जो प्रबंध किया है, वह स्थाई नहीं है। हि.प्र.

कोट

सदर अस्पताल परिसर से वर्षा के पानी को मोटर के सहारे मुख्य नाले तक पहुंचाया जाता है। अस्पताल परिसर में चार जगहों पर सोख्ता बनवाया गया है। बारिश होने पर मोटर स्टार्ट कर पानी निकलवाने का काम शुरू करा दिया जाता है।

डॉ. विनोद कुमार सिंह, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल

फोटो- 27 मई भभुआ- 9

कैप्शन- सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के पास स्थित नाले का ओवरफ्लो कर पसरा गंदा पानी।

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