खेती के संसाधन व लागत दोनों बढ़े, मुनाफा में खास बढ्ढोत्तरी नहीं

हिन्दुस्तान, भभुआ
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भारत में कृषि के साधनों में बदलाव आ रहा है, जिसमें ट्रैक्टर, पावर वीडर, टिलर और कंबाइन हार्वेस्टर का उपयोग बढ़ रहा है। हालाँकि, कृषि लागत और मजदूरी में भी वृद्धि हो रही है। किसान अब आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, जैसे ड्रिप सिचाई और ड्रोन से छिड़काव। सही मूल्य न मिलने के कारण मुनाफा कम हो रहा है।

खेती के संसाधन व लागत दोनों बढ़े, मुनाफा में खास बढ्ढोत्तरी नहीं

खेतीबारी में ट्रैक्टर के बाद अब पावर वीडर, टिलर, कंबाइन हार्वेस्टर, ड्रिप, ्प्रिरंकलर, बुआई की आधुनिक मशीनों का उपयोग बढ़ा है आधुनिक दौर में खेती के लिए मार्केट में हर साल आ रहा नया-नया कृषि यंत्र खाद-बीज, किटनाशनक दवा के दाम व सिचाई के खर्च में भी हो रही बढ्ढोत्तरी पावर वीडर का बाजार मूल्य छोटे मॉडल 25000-35000 रुपए सात-दस एचपी गियर ड्राइव मॉडल 40000-60000 रुपए टिलर का बाजार मूल्य तीन-पांच एचपी 25000-40,000 रुपया आठ-दस एचपी पावर टिलर 48000-100000 रुपया कंबाइन हार्वेस्टर का बाजार मूल्य ट्रैक्टर चालित हार्वेस्टर 12-16 लाख सेल्फ-प्रोपेल्ड हार्वेस्टर 20-36 लाख मिनी हार्वेस्टर 5.35-10 लाख ड्रिप ्प्रिरंकलर का बाजार मूल्य 11500 से लेकर 30000-50000 रुपया महिला-पुरुष मजदूरी पहले और अब में अंतर कार्य महिला/पुरुष पहले मजदूरी अब मजदूरी रोपनी करने महिला 100-120 200 बिचड़ा उखाड़ने पुरुष 150 250-300 धान का बोझा ढोने पुरुष 200-250 350-400 कुल 450-520 800-900 धान की खेती पर पहले और अब लागत व आमद लागत 13900-17300 बिक्री 22000-2500 मुनाफा 8100-7700 गेहूं की खेती में लागत और आमद वर्ष 2025 12500 रुपया प्रति एकड़ लागत खर्च 29100 रुपया समर्थन मूल्य पर बिक्री 30000 रुपया बाजार मूल्य पर बिक्री 16600 रुपया समर्थन मूल्य पर लाभ 17500 रुपया बाजार मूल्य पर मुनाफा वर्ष 2026 21300 रुपया प्रति एकड़ लागत खर्च 31020 रुपया समर्थन मूल्य पर बिक्री 27600 रुपया बाजार मूल्य पर बिक्री 9720 रुपया समर्थन मूल्य पर लाभ 6300 रुपया बाजार मूल्य पर मुनाफा मक्का की खेती पर लागत व आमद वर्ष 2024 कुल 11060-13800 रुपया बिक्री 16000-20000 रुपया मुनाफा 4940-6200 रुपया वर्ष 2025 कुल 7060-8800 रुपया बिक्री 8000-10000 रुपया मुनाफा 940-1200 रुपया ग्राफिक्स 1.41 लाख हेक्टेयर भूमि में कैमूर जिले में होती है धान की रोपनी 1.04 लाख हेक्टेयर भूमि में गेहूं की खेती करते हैं जिले के किसान (पटना का टास्क) भभुआ, हिन्दुस्तान संवाददाता।

कैमूर में खेती के साधन और लागत पहले की तुलना में बहुत अधिक बढ़े हैं, लेकिन उसी अनुपात में किसानों को फसलों का उचित मूल्य मिलना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी है। कृषि वैज्ञानिक कहते हैं कि 2007-08 के बाद से खेती की लागत में हर साल औसतन 8-10% की वृद्धि देखी गई है। अब हल-बैल की जगह ट्रैक्टर के बाद पावर वीडर, टिलर, कंबाइन हार्वेस्टर और बुआई की आधुनिक मशीनों का उपयोग बढ़ा है। कुछ किसान सिंचाई के लिए ड्रिप (टपक) और ्प्रिरंकलर (फव्वारा) प्रणाली को अपना रहे हैं। इस विधि से पानी की खपत कम होती है। कैमूर के कुछ किसान अब बीज व खाद का छिड़काव ड्रोन से कर रहे हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड और मौसम की पूर्व जानकारी जैसी तकनीकी मदद किसानों को मिल रही है। वैज्ञानिकों द्वारा उपज बढ़ाने के लिए दिए जा रहे प्रशिक्षण के बाद जिले के किसान विभिन्न प्रभेद के उपचारित बीज का उपयोग कर रहे हैं। जैविक व प्राकृतिक खाद को बढ़ावा दे रहे हैं। कीटनाशक की जगह नीम की खल्ली व उसके पानी का छिड़काव कर रहे हैं। नहर में समय पर पानी नहीं आने और बारिश नहीं होने की स्थिति में किसान 200 रुपये घंटा फसल की सिंचाई करते हैं। किसानों की उपज के भंडारण के लिए पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज नहीं है। किसानों का कहना है कि लागत के अनुरूप सही कीमत नहीं मिल पाने से उन्हें बहुत ज्यादा मुनाफा नहीं हो रहा है। किसान मनोहर दुबे, मनोज साह, महेन्द्र गोंड, संत पांडेय, शंकर शर्मा व अनिल दुबे ने बताया कि अब खेती का पैटर्न बदल गया है। खेती के संसाधन के साथ लागत में वृद्धि हुई है। स्पर्धा के इस दौर में हर किसान आगे निकलने की कोशिश करते हैं। इसलिए कृषि यंत्रों का उपयोग बढ़ा है। पहले खेती-किसानी के लिए समय पर मजदूर मिल जाते थे, अब खेत तैयार रहने के बाद भी मजदूर काफी तलाशने पर मिल रहे है। गांव के अधिकतर मजदूर दिल्ली, बम्बे, गुजरात, पंजाब, हरियाणा आदि शहरों में जाकर काम कर रहे हैं। इस कारण मजदूर नहीं मिल पाते हैं। दो गुना बढ़ी कृषि मजदूरों की मजदूरी भभुआ। पहले की अपेक्षा अब कृषि मजदूरों की मजदूरी दोगुना बढ़ गई है। किसान तारकेश्वर पाण्डेय, बगेदु गोंड, जमुना सिंह, अलियार सिंह व संजय बिन्द ने बताया कि पहले धान की रोपनी करने वाली महिला मजदूर को 100-120 रुपये, धान का बिचड़ा उखाड़ने वाले मजदूरों को 150 रुपये और बोझा ढोने वाले मजदूरों को 200-250 रुपये तक मजदूरी दी जाती थी। अब रोपनी करने वाली महिला को 200 रुपये, बिचड़ा उखाड़ने वाले मजदूरों को 250-300 तथा बोझा ढोने वाले वाले मजदूरों की 350-400 रुपये मजदूरी हो गई है। ऐसे मं खेती की लागत भी बढ़ गयी है। खाद-बीज के दाम में भी हुई वृद्धि भभुआ। किसान राजवंश दुबे, कमला दुबे, रामाशंकर सिंह, सत्येन्द्र सिंह व कैलाश बिन्द ने बताया कि पहले 125-150 रुपये बोरी यूरिया व लगभग 200-250 रुपये बोरी भसवा खाद बाजार में मिल जाती थी। अब यूरिया खाद का दाम करीब 276 रुपये हो गया है। जबकि भसवा की जगह बाजार में डीएपी खाद आ गयी है। डीएपी खाद का दाम 1300-1500 रुपये बोरी हो गया है। किसानों ने बताया कि पहले की अपेक्षा अब धान, गेहूं, दलहन एवं तेलहन फसल के बीज के साथ-साथ कीटनाशक दवा के दामों में भी दोगुना वृद्धि हुई है। किसानों को अनाज भंडारण के लिए प्रबंध करने पर भी खर्च हो रहे हैं। कोट पहले की अपेक्षा इधर खेती के संसाधन बढ़े हैं। सरकार कृषि को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं संचालित कर रही है। सरकार व विभाग द्वारा संचालित की जा रही योजनाओं को धरातल पर उतारकर ससमय किसानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। विकास कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी (भभुआ से श्रीकांत पांडेय) फोटो-17 अप्रैल भभुआ- 6 कैप्शन- भभुआ प्रखंड के सोनहन बाईपास नहर पथ के पास हार्वेस्टर से गेहूं की कटनी करता चालक।

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