
रामपुर में महिला और कॉलेज के मुद्दे पर प्रत्याशियों को घेरेंगे
रामपुर प्रखंड में महिलाओं के लिए कॉलेज की कमी पर चिंता जताई गई है। यहां हर साल एक हजार से ज्यादा छात्राएं इंटर पास करती हैं लेकिन उच्च शिक्षा के लिए उन्हें भभुआ या चेनारी जाना पड़ता है। स्थानीय लोग...
कोई जनप्रतिनिधि महाविद्यालय स्थापित करने के लिए ठोस पहल नहीं किए न मगध और न वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय ने एक भी कॉलेज खोलवाया (सत्ता संग्राम) रामपुर, एक संवाददाता। विधानसभा चुनाव में मतदाता विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था, शिक्षा जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए अपने प्रतिनिधियों का चयन करेंगे। इस बार के चुनाव में महागठबंधन, एनडीए, बसपा, जन सुराज आदि पार्टियों के प्रत्याशी मैदान में होंगे। यह चुनाव जिले की राजनीतिक दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। संभावित प्रत्याशियों का दौर शुरू हो गया है। हालांकि बसपा ने अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है और उसके संभावित उम्मीदवार ने चहलकदमी बढ़ा दी है।
भभुआ विधानसभा क्षेत्र के मतदाता एक बार फिर लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार हैं। प्रखंड का दर्जा प्राप्त करने के वर्षों बाद भी रामपुर प्रखंड में एक भी महिला या कॉलेज नहीं खुला। ऐसे में खासकर छात्राओं को ज्यादा परेशानी होती है। उन्हें उच्च शिक्षा के लिए चेनारी या भभुआ जाना पड़ता है। हालांकि बेलांव में इंद्रा परशुराम डिग्री कॉलेज है। लेकिन, वह संबद्धता प्राप्त कॉलेज है, अंगीभूत नहीं। ऐसे में यहां के लोग इस बार प्रखंड मुख्यालय बेलांव में महिला या डिग्री कॉलेज स्थापित करने के मुद्दे पर वोट मांगने आनेवाले प्रत्याशियों को घेरने की चर्चा करते सुने जा रहे हैं। गम्हरिया के विनोद सिंह और बड़कागांव गांव के पुष्कर पांडेय कहते हैं कि गांव की बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने व उनका भविष्य संवारने के लिए प्रखंड में महिला या सरकारी डिग्री कॉलेज जरूरी है। लेकिन, इस दिशा में अभी तक किसी जनप्रतिनिधि ने ठोस पहल नहीं की है। दो साल पहले उच्च विद्यालयों को अपग्रेड कर प्लस टू का दर्जा दिया गया है, जिससे छात्राएं इंटर तक ही शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। लेकिन, इंटर करने के बाद छात्राओं को स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने के लिए भभुआ या फिर चेनारी जाना पड़ता है। एक हजार से ज्यादा छात्राएं इंटर पास करती हैं रामपुर प्रखंड में हर वर्ष एक हजार से भी ज्यादा छात्राएं इंटर पास करती हैं। इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्नातक में दाखिला लेने को लेकर छात्राएं और उनके अभिभावकों की चिंताएं बढ़ जाती हैं। छात्रा तब्बसुम खातून कहती हैं कि संबद्ध कॉलेज में दाखिला लेने पर शिक्षण व अन्य शुल्क ज्यादा भुगतान करना पड़ता है। जबकि अंगीभूत कॉलेज में दाखिला लेने पर हर तरह के शुल्क कम लगते हैं, जिससे उनके अभिभावक की जेब पर बोझ कम पड़ता है। आर्थिक तंगी आती है आड़े छात्राएं राधिका कुमारी व प्रेमलता कुमारी ने बताया कि वह वर्ष 2025 में इंटर की परीक्षा पास की हैं। पिताजी मजदूरी के साथ जमीन के छोटे टुकड़े में खेती करते हैं, जिससे घर-परिवार का खर्च चलता है। राधिका ने बताया कि उसने भभुआ के कॉलेज में स्नातक में दाखिला लिया है। भभुआ में कमरे का किराया, शिक्षण व अन्य शुल्क, खानपान खर्च आदि का प्रबंध करने में दिक्कत होती है। उसके साथ में परिवार के एक साथ को भी रहना पड़ता है। गांव से पढ़ने जाने में दिक्कत होती है पुष्पा कुमारी, खुशी कुमारी, सोना कुमारी ने बताया कि वह स्नातक की छात्रा हैं। वह बस से पढ़ने के लिए भभुआ जाती हैं। किराया 60 रुपया लग जाता है। रोजाना बस किराया भुगतान करना पड़ता है। गांव से बेलांव और वहां से सोनहन बस पड़ाव जाती हैं। फिर वहां से पैदल शहीद संजय सिंह महिला कॉलेज में पढ़ने जाती हैं। सोना ने बताया कि कभी-कभी किराए का पैसा नहीं रहता है, तो वह कॉलेज नहीं जा पाती है। अगर अपने प्रखंड में कॉलेज होता, तो यह खर्च बच जाता और उसे पढ़ाई पूरी करने में सहूलियत मिलती। फोटो- 3 सितंबर भभुआ- 6 कैप्शन- रामपुर प्रखंड के नौहट्टा स्थित श्री नेहरू प्लस टू विद्यालय में पढ़तीं छात्राएं (फाइल फोटो)।

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