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30 नवंबर, 2020|11:40|IST

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जुआ खेलने में आज भी कर रहे कौड़ी का इस्तेमाल

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कुड़ासन से गिरफ्तार पांच जुआरियों के पास मिले 15 कौड़ी से हुआ खुलासा

जुआ खेलना है सामाजिक बुराई, सरकार ने भी इसपर लगा रखी है पाबंदी

भभुआ। कार्यालय संवाददाता

जुआ खेलने में कैमूर के जुआरी आज भी कौड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि अधिकांश लोग तास से ही जुआ खेलते हैं। कहते हैं कि कौड़ी से माहिर खिलाड़ी जुआ खेलते हैं। कौड़ी से जुआ खेलने का खुलासा शनिवार को तब हुआ, जब सदर थाने की पुलिस ने कुड़ासन से 15 कौड़ी के साथ पांच जुआरियों को गिरफ्तार किया। यह जुआरी जुआ खेलने वक्त शराब भी पीते हैं। वहां बरामद शराब की बोतलें व नशे की हालत में गिरफ्तार एक जुआरी से इसकी पुष्टि होती है।

नगर थाने की पुलिस ने जिन जुआरियों को कुड़ासन गांव से शनिवार को गिरफ्तार किया है, उनमें उसी गांव के विजय पटेल, सुधीर पटेल, प्रमोद सिंह, राजा राम व मदन सिंह शामिल हैं। पुलिस ने इन जुआरियों के पास से पांच बोतल शराब, जुआ खेलने में प्रयोग होने वाली 15 कौड़ी, 5390 रुपया, पांच मोबाइल व पांच मोमबत्ती बरामद किया है। मेडिकल चेकअप व पूछताछ और न्यायालय में पेशी के बाद पुलिस ने उन्हें मंडल कारा में भेज दिया।

जुआ खेलना सामाजिक बुराई मानी जाती है। सरकार ने भी इसपर पाबंदी लगा रखी है। लेकिन, ज्योति पर्व पर जुआ खेलने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस पर्व पर लोग जुआ शगुन के रूप में खेलते हैं। ऐसा देखा जाता है कि लोगों ने दीपावली में शौक या शगुन के रूप में जुआ खेलता है और उसमें हारने पर हारी हुई रकम हासिल करने के लिए आगे भी जुआ खेला और उसे इसकी लत लग गई। यदि जुआ खेलने वाला व्यक्ति दीपावली को जीतता है और जीतने की लालसा में अगले दिन भी खेलता है तो वह जुए की लत का शिकार हो जाता है।

जुए के कारण हुई थी महाभारत

महाभारत में उल्लेख है कि दुर्योधन ने पांडवों का राज्य हड़पने के लिए युधिष्ठिर को जुए के शिकंजे में फंसा दिया था। युधिष्ठिर ने जुए में अपना सब कुछ लुटाने के बाद पत्नी द्रौपदी को भी दांव पर लगा दिया और उसे भी हार गए। यह जुआ भीषण संग्राम का कारण बना था। मनोरंजन के लिए भी जुआ खेलने का प्रचलन रहा है। लेकिन, यह मनोरंजन तक ही सीमित नहीं रह जाता। जब कोई व्यक्ति इसकी गिरफ्त में फंस जाता है तो वह घर की संपत्ति को भी दांव पर लगाना शुरू कर देता है।

पड़ोसी जिला में मां को चढ़ाते हैं कौड़ी

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में एक मंदिर ऐसा भी है जहां प्रसाद के रूप में कौड़ी चढ़ती है और कौड़ी ही मिलती है। इसे कौड़ी माता का मन्दिर कहा जाता है। यही नहीं कौड़ी माता का स्नान भी कौड़ी से ही कराया जाता है। कहते हैं कि अगर उन्हें प्रसन्न करना है तो रुपयों से कौड़ी खरीदें और उनके चरणों में समर्पित करके आर्शीवाद के भागी बनें।

फोटो- 01 नवंबर भभुआ- 12

भभुआ- कुड़ासन गांव में जुआ खेलने के दौरान शराब आपूर्ति करने वाला गिरफ्तार धंधेबाज रविवार को सदर थाना में।

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  • Web Title:Kauri is still used in gambling today