अनुसंधानकर्ताओं की सुस्ती से लटके 500 आपराधिक मुकदमे
भभुआ अनुमंडल में 500 आपराधिक मुकदमे लंबित हैं, जिनका निष्पादन सुस्त अनुसंधानकर्ताओं के कारण रुका हुआ है। एसडीपीओ ने 12 अधिकारियों की सूची तैयार की है, जो कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। डीआईजी ने अनुसंधानकर्ता पुलिस अधिकारियों को सक्रियता दिखाने की सलाह दी है। हर महीने औसतन 250 मामले निष्पादित किए जा रहे हैं।

कम आपराधिक मुकदमों का निष्पादन करने वाले भभुआ अनुमंडल के 22 अनुसंधान करनेवाले अफसरों की एसपी को भेजी रिपोर्ट अनुसंधान में सुस्ती बरतनेवाले दर्जनभर अफसरों की तैयार हो रही सूची कार्रवाई के भय से सक्रियता दिखाने लगे अनुमंडल के अनुसंधानकर्ता कैमूर आए डीआईजी ने सुस्त अफसरों की सूची बनाने का दिया है निर्देश (पेज तीन की लीड खबर) भभुआ, कार्यालय संवाददाता। अनुसंधानकर्ता पुलिस अधिकारियों की सुस्ती की वजह से भभुआ अनुमंडल के विभिन्न थानों में 500 आपराधिक मुकदमों का निष्पादन लटक गया है। जानकार बताते हैं कि हत्या, लूट, दंगा, चोरी, शराब, डकैती, अपहरण आदि से जुड़े मामले लंबित हैं। एसडीपीओ ने ऐसे करीब 12 अनुसंधानकर्ता अफसरों को चिन्हित किया है, जिनकी सूची तैयार की जा रही है।
यह सूची पुलिस अधीक्षक को सौंपी जाएगी। एसपी के माध्यम से डीआईजी को सूची भेजी जाएगी, जिसपर कार्रवाई का निर्णय उनके स्तर से लिया जाएगा। हालांकि कुछ दिनों पूर्व भी एसडीपीओ ने 22 अनुसंधानकर्ता अफसरों की सूची एसपी को सौंपी है, जिसपर कार्रवाई की दिशा में पहल शुरू की गई है। हालांकि पुलिस सूत्र बताते हैं कि जिनके नाम सुस्त अधिकारियों की सूची में शामिल है या शामिल होनेवाला है, उनके द्वारा अपने कामकाज में सक्रियता बढ़ा दी गई है, ताकि वह कार्रवाई की जद में नहीं आ सके। लेकिन, जानकार बताते हैं कि जिनके नाम की सूची के आगे लंबित कांडों की संख्या अंकित होगी और यह संख्या ज्यादा होगी उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी डॉ. सत्य प्रकाश 5 फरवरी को भभुआ आए थे। उन्होंने लंबित मुकदमों की सूची की फाइल का अवलोकन किया था। इसके बाद उन्होंने एसडीपीओ मनोरंजन भारती को मुकदमों का कम निष्पादन करनेवाले अनुसंधानकर्ताओं की सूची तैयार करने का निर्देश दिया था। डीआईजी के निर्देश पर सुस्त आईओ को चिन्हित कर एसडीपीओ द्वारा उनकी सूची तैयार की जा रही है। हालांकि डीआईजी द्वारा मुकदमों, पंजी, कार्यशैली, गिरफ्तारी, अपराध व अपराधियों को लेकर भी दिशा-निर्देश दिया गया है। इस दौरान एसपी हरिमोहन शुक्ला भी थे। हर माह 250 मामले किए जा रहे निष्पादित एसडीपीओ मनोरंजन भारती ने बताया कि भभुआ अनुमंडल के विभिन्न थानों द्वारा सक्रियता बढ़ाई गई है। इस कारण हर माह औसतन 250 आपरािाक मामलों का निष्पादन किया जा रहा है। वर्ष 2025 में 750 मुकदमों का निष्पादन किया गया है। उन्होंने बताया कि एसडीपीओ व सर्किल स्तर पर यह समीक्षा की जा रही है कि किस थाना के स्तर पर कितने आपराधिक मामलों के निष्पादन किया गया है। अभी भी भभुआ अनुमंडल में 500 आपराधिक मामले लंबित हैं। डीआईजी ने इन बिंदुओं पर ली है जानकारी डीआईजी ने भभुआ अनुमंडल में सक्रिय अपराधियों, सक्रिय गिरोह, शराब तस्कर, मादक पदार्थ, अवैध हथियार की तस्करी करने वाले, पुलिस को आधुनिकीकरण करने की कवायद, सीसीटीएनएस, दर्पण एवं ई-साक्ष्य, अनुसंधान के वैज्ञानिक तरीके, विधि-व्यवस्था, हत्या, लूट, डकैती, अपरहण सहित अन्य आपराधिक मामले के बनाए गए डेटा की जानकारी गुरुवार को समीक्षा के दौरान ली है। इस दौरान उन्होंने अपराध नियंत्रण, कांडों के उद्भेदन, आरोपितों की गिरफ्तारी का निर्देश दिया। कोट भभुआ अनुमंडल के थानों में अनुुसंधान पूर्ण नहीं होने की वजह से 500 आपराधिक मामले लंबित हैं। कम मामले निष्पादित करनेवाले दर्जनभर पुलिस अफसरों की सूची तैयार कर कार्रवाई के लिए भेजी जा रही है। 22 पुलिस अफसरों की सूची पहले भेजी जा चुकी है। मनोरंजन भारती, एसडीपीओ, भभुआ फोटो- 06 फरवरी भभुआ- 3 कैप्शन- भभुआ एसडीपीओ कार्यालय में शनिवार को कामकाज निष्पादित करते पुलिस कर्मी।
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