Bhabua News: धर्म वही, जो गलत राह छोड़कर सत्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे
Bhabua News: भभुआ के परसियां गांव में चल रहे चातुर्मास महायज्ञ में जीयर स्वामी महाराज ने धर्म का सही अर्थ बताया। उन्होंने कहा कि जीवन में गलतियों को छोड़कर अच्छे कर्म करना ही धर्म का उद्देश्य है। भागवत कथा को मानव कल्याण का साधन मानते हुए, उन्होंने श्रद्धा और भक्ति के साथ कथा सुनने का महत्व भी बताया।

Bhabua News: धर्म वही, जो गलत राह छोड़कर सत्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे भभुआ के एनएच 219 के किनारे परसियां गांव के पास चल रहे चातुर्मास महायज्ञ में प्रवचन के दौरान जीयर स्वामी महाराज ने कहा बोले, कलियुग में मानव कल्याण का सबसे सरल साधन है भागवत कथा आत्मदेव-धुंधकारी की कथा से समझाया कर्म, संयम और भक्ति का महत्व भभुआ, नगर संवाददाता।
धर्म का अर्थ
धर्म का अर्थ केवल पूजा-पाठ, मंत्र-जाप और बाहरी आडंबर नहीं है। धर्म वह है, जो मनुष्य को गलत रास्ते से हटाकर सत्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे। जीवन में जाने-अनजाने हुई गलतियों को छोड़कर अच्छे कर्म करने का संकल्प लेना ही धर्म का वास्तविक उद्देश्य है। यह बातें जीयर स्वामी जी महाराज ने परसियां में चल रहे चातुर्मास महायज्ञ में भागवत कथा के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन बहुत अल्पकाल का है।
जीवन के चरण
बचपन के करीब 25 वर्ष पढ़ाई-लिखाई और खेलकूद में बीत जाते हैं। इसके बाद के 25 वर्ष गृहस्थ जीवन, परिवार, मकान, खेती, व्यापार और सामाजिक प्रतिष्ठा बनाने में निकल जाते हैं। जब तक मनुष्य इन जिम्मेदारियों से मुक्त होता है, तब तक शरीर वृद्धावस्था और बीमारियों से घिरने लगता है। इसलिए यह सोचकर नहीं बैठना चाहिए कि बुढ़ापे में भगवान का नाम लेंगे। जीवन रहते ही धर्म, भक्ति और सत्कर्म के लिए समय निकालना चाहिए। स्वामी जी ने कहा कि कलियुग में मानव कल्याण का सबसे सरल और सहज साधन भागवत कथा और हरि कीर्तन है।
भागवत कथा का महत्व
श्रद्धा और निष्ठा से कथा सुनने से मनुष्य के विचार शुद्ध होते हैं और वह बुराइयों से दूर होकर सदाचार की ओर बढ़ता है। कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि उसके संदेश को जीवन में उतारने का माध्यम है। आत्मदेव-धुंधकारी की कथा से कर्मों का फल समझाया प्रवचन के दौरान आत्मदेव, धुंधुली, गोकर्ण और धुंधकारी की कथा सुनाते हुए संत ने कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है।
कथा और उद्धार
धुंधकारी गलत संगति, व्यसन और बुरे कर्मों के कारण पतन की ओर चला गया। मृत्यु के बाद उसके उद्धार के लिए गोकर्ण ने श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। कथा श्रवण के प्रभाव से धुंधकारी का उद्धार हुआ। कथा के माध्यम से संत ने संदेश दिया कि मनुष्य चाहे कितनी भी बुरी स्थिति में क्यों न पहुंच जाए, भक्ति और सद्मार्ग की ओर लौटने का रास्ता हमेशा खुला रहता है।
जीवन में संयम
इंद्रियों को बस में कर जीवन को कृतार्थ करें जीयर स्वामी ने कहा कि मनुष्य को इंद्रियों के विषयों और गलत संगति से सावधान रहना चाहिए। जिस प्रकार हिरण मधुर ध्वनि, हाथी स्पर्श और पतंगा प्रकाश के आकर्षण में फंसकर अपना जीवन गंवा देते हैं, उसी प्रकार मनुष्य भी विषय-वासनाओं में फंसकर अपना जीवन बर्बाद कर देता है। संयमित जीवन ही सच्चे सुख का आधार है।
कथा का सही लाभ
स्वामी जी ने कहा कि कथा का वास्तविक लाभ तभी मिलता है, जब उसे श्रद्धा, एकाग्रता और निष्ठा के साथ सुना जाए। केवल कथा स्थल पर बैठना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कथा में बताए गए संदेश को अपने आचरण में उतारना जरूरी है। सदाचार, भक्ति, संयम और अच्छे कर्मों के साथ जीवन जीना ही धर्म का वास्तविक स्वरूप है। कैप्शन: भभुआ प्रखंड के परसियां में चल रहे चातुर्मास महायज्ञ में प्रवचन करते जीयर स्वामी जी महाराज और प्रवचन सुनते श्रद्धालु।


