कैमूर जिले में लिवर के इलाज के लिए विशेषज्ञ डाक्टर नहीं

हिन्दुस्तान, भभुआ
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कैमूर जिले में जनवरी से 17 अप्रैल के बीच 18 लोग हेपेटाइटिस बी से संक्रमित पाए गए हैं। सदर अस्पताल में हर महीने तीन हजार लिवर जांच होती हैं, लेकिन यहां लिवर विशेषज्ञ नहीं हैं। सामान्य चिकित्सक मरीजों का इलाज करते हैं और गंभीर मामलों को रेफर किया जाता है। डॉक्टर्स ने लिवर रोग के लक्षणों और बचाव के उपायों पर भी जानकारी दी।

कैमूर जिले में लिवर के इलाज के लिए विशेषज्ञ डाक्टर नहीं

लिवर की जांच में जनवरी से 17 अप्रैल तक 18 व्यक्ति हेपेटाइटिस बी से संक्रमित पाए गए, सामान्य चिकित्सक करते हैं इलाज पैथोलॉजी सेंटर में हर माह औसतन तीन हजार लोगों की लिवर जांच होती है जनवरी में छह, फरवरी, मार्च, अप्रैल में अबतक चार-चार संक्रमित पाए गए (लिवर दिवस-पटना का टास्क) भभुआ,हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। कैमूर जिले में लिवर विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। ऐसे में सदर, अनुमंडल, रेफरल, सीएचसी, पीएचसी में आनेवाले लिवर के मरीजों के लिवर की जांच कराकर सामान्य चिकित्सक इलाज करते हैं। लिवर के गंभीर मरीजों को यहां के चिकित्सक द्वारा हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है, जिससे न सिर्फ मरीजों व उनके परिजनों की परेशानी बढ़ती है बल्कि जेब भी ढीली होती है।

अगर यहां लिवर विशेषज्ञ होते तो मरीजों हो रेफर करने की नौबत नहीं आती। जिला मुख्यालय के सदर अस्पताल स्थित पैथोलॉजी केन्द्र में प्रत्येक माह औसतन तीन हजार मरीजों की लिवर जांच के लिए ब्लड सैपल लिए जाते हैं। जांच में हर माह चार-पांच व्यक्ति लिवर फंक्सन से संक्रमित पाए जाते हैं। सदर अस्पताल में जनवरी माह से अबतक 18 व्यक्ति हेपेटाइटिस बी से संक्रमित पाए गए हैं। जनवरी में छह, फरवरी में चार, मार्च में चार व 17 अप्रैल तक चार मरीज हेपेटाइटिस बी से संक्रमित मिले हैं। संक्रमित पाए गए मरीजों में हर उम्र के शामिल हैं। सदर अस्पताल के डाक्टरों ने बताया कि जांच में हेपेटाइटिस ए,बी, सी, सीरोसिस, लिवर कैंसर, पीलिया, फैटी लिवर के मरीज मिले हैं। लिवर फंक्सन टेस्ट में सिरम, बिलीरुबीन, एसजीओटी, एसजीपीटी सहित अन्य जांच होती हैं। पैथोलॉजी सेंटर में कीट व ऑटो एनलाइजर मशीन से हेपेटाइटिस जांच होने के बाद कंफर्म होने के लिए ट्रूनेट मशीन से वायरल लोड किया जाता है। ट्रूनेट मशीन से हेपेटाइटिस बी जांच में कंफर्म होने पर मरीज का डाक्टरों द्वारा दवा देते हुए इलाज किया जाता है। कैमूर में जनवरी से शुरू हुई है लिवर जांच ज्ञात हो कि ट्रूनेट मशीन से हेपेटाइटिस बी का वायरल लोड जांच जनवरी माह से ही सदर अस्पताल में शुरू हुई है। पहले यह जांच पटना व अन्य बड़े अस्पतालों में करानी पड़ती थी। सदर अस्पताल के डाक्टरों ने बताया कि हेपेटाइटिस बी वायरल इंफेक्सन से बीमारी फैलती है। हेपेटाइटिस बी से संक्रमित व्यक्ति से दूषित खून लेने से अधिकांश लोगों में यह बीमारी फैलती है। डाक्टरों ने यह सलाह दी कि खून चढ़वाने से पहले ब्लड की जांच अवश्य करा लें, अन्यथा परेशानी बढ़ सकती है। लिवर रोग के लक्षण और संकेत चिकित्सक के अनुसार, त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया), पेट फूलना और पेट में दर्द, पैरों और टखनों में सूजन, त्वचा में खुजली, गहरे रंग का मूत्र, मल का रंग हल्का पीला, दीर्घकालिक थकान, मतली या उलटी, भूख में कमी, आसानी से चोट लगने की प्रवृत्ति आदि लिवर रोग के लक्ष्य हैं। इन चीजों से परहेज करें सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि लिवर की बीमारी होने पर शराब का सेवन बंद कर देना चाहिए। कार्बोहाइड्रेट में साधारण और परिष्कृत शर्करा, शर्करा युक्त शीतल पेय पदार्थ पीने से परहेज करें। ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट भी लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ट्रांस फैट सबसे ज्यादा हानिकारक हो सकते हैं। यह मक्खन और जल्दी खाने के लिए पैक किए गए उत्पादों में पाए जाते हैं। फ्रेंच फ्राइज, पिज्जा, पेस्ट्री आदि में भी यह मौजूद होते हैं। कोट कैमूर जिले के सरकारी अस्पतालों में लिवर रोग के इलाज के लिए विशेषज्ञ डाक्टर नहीं हैं। अस्पतालों में आने वाले मरीजों के ब्लड सैंपल का टेस्ट कराते हुए सामान्य डाक्टरों द्वारा इलाज किया जाता है। डॉ. विंदेश्वरी रजक, सिविल सर्जन (भभुआ से उदय प्रकाश) फोटो- 18 अप्रैल भभुआ- 4 कैप्शन- सदर अस्पताल के पैथोलॉजी केन्द्र में शनिवार को ट्रूनेट मशीन से हेपेटाइटिस बी की जांच करते माइक्रोबायोजिस्ट व टेक्निशियन।

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