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30 सितम्बर, 2020|1:58|IST

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कैमूर जिले में नहाय-खाय के साथ महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान शुरू, अब खरना के लिए उत्साह

कैमूर जिले में नहाय-खाय के साथ महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान शुरू, अब खरना के लिए उत्साह

नहाय-खाय के साथ व्रतियों ने गुरुवार से महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान शुरू किया। छठ व्रतियों ने स्नान कर पूजा-अर्चना की। फिर शुद्ध घी व सेन्हा नमक से कद्दू की सब्जी, चने की दाल तथा साठी चावल के भात को पकाया। उसका भोग लगाकर व्रतियों ने ग्रहण किया। इनके द्वारा प्रसाद खाने के बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने उसे ग्रहण किया। नहाय-खाय की प्रक्रिया पूरी करने के बाद व्रती खरना की तैयारी में जुट गए हैं। खरना को लेकर व्रतियों के अलावा उनके परिजनों में उत्साह देखा जा रहा है। लोकपर्व छठ के शुरू होते ही व्रतियों का उत्साह देखते बन रहा है। घर का हर एक सदस्य पूजा की तैयारी में जुटा है। कोई पूजा सामग्री खरीदने के लिए बाजार पहुंच रहा है तो कोई व्रती महिलाओं के लिए शृंगार की सामग्री की खरीद कर रहा है और कोई नाते-रिश्तेदार की महिलाओं को लाने के लिए गया है। महिला व्रतियों को किचेन के काम से मुक्त कर दिया गया है। परिवार व रिश्तेदार के घर से आईं महिलाएं रसोईघर का काम संभाल रही हैं। परिवार के सभी सदस्य एक ही जगह बैठकर खाना खा रहे हैं और उनके खाने के बाद उस स्थल की पानी से धुलाई कर दी जा रही है, ताकि पवित्रता बरकरार रहे। कहते हैं कि छठ लोकपर्व भारतीय परंपरा का एक वैज्ञानिक आरोग्यपूर्ण अनुष्ठान है। हमारे पूर्वजों ने विज्ञान और धर्म का समन्वय करके जीवन को समृद्ध करने के लिए अनेक अद्भुत प्रयोग किया है। प्रकृति की दृष्टि से नदी, तालाब, झील तथा पोखर के जल जीवन के आधार हैं। सामाजिक दृष्टि से छठ पर्व में ऊंच-नीच सबका भेद मिट जाता है। इस तरह से सामाजिक सद्भाव की भावना पनपती है। नैतिक व आध्यात्मिक दृष्टि से इसमें नैतिक सहयोग और सहचर्य के भाव का संचार होता है। वहीं इस पर्व में बेटियों और बेटों को समान महत्व दिया गया है। पारंपरिक गीत इसके प्रमाण हैं।

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  • Web Title:Four-day ritual of Mahaparva Chhath begins with Nahai-Khay in Kaimur district now enthusiasm for Kharna