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Hindi News बिहार भभुआपहले कोरोना और अब सत्र सुधारने में अधूरे रह जा रहे हैं कोर्स (पड़ताल/युवा पेज की लीड खबर)

पहले कोरोना और अब सत्र सुधारने में अधूरे रह जा रहे हैं कोर्स (पड़ताल/युवा पेज की लीड खबर)

स्नातक के प्रत्येक सेमेस्टर में छात्रों को पढ़ने के लिए मिलना चाहिए 10 से 11 महीने का समय, तीन से पांच महीने तक कर रहे...

पहले कोरोना और अब सत्र सुधारने में अधूरे रह जा रहे हैं कोर्स (पड़ताल/युवा पेज की लीड खबर)
हिन्दुस्तान टीम,भभुआTue, 14 May 2024 08:00 PM
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स्नातक के प्रत्येक सेमेस्टर में छात्रों को पढ़ने के लिए मिलना चाहिए 10 से 11 महीने का समय, तीन से पांच महीने तक कर रहे पढ़ाई
वर्ष 2020 से ही जिले की छात्र-छात्राओं की लड़खड़ाई है शिक्षा व्यवस्था

सत्र सुधारने से कॉलेज में दाखिला लेना होगा आसान, बचेगी आयु सीमा

भभुआ, एक प्रतिनिधि। पहले कोरोना काल में और अब शैक्षणिक सत्र सुधारने में छात्रों के कोर्स अधूरे रह जा रहे हैं। छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होने व कोर्स पूरा नहीं होने से उन्हें कई तरह की चिंताएं सता रही है। छात्रों का कहना है कि कोरोना काल के दौरान कॉलेज में शिक्षण कार्य बंद थे। कुछ छात्रों को ऑनलाइन शिक्षण कार्य की सुविधा मिल रही थी। तब छात्रों को बिना पढ़े ही परीक्षा में शामिल होना पड़ता था।

छात्रों ने यह भी बताया कि अब विश्वविद्यालय की ओर से सत्र सुधारने को लेकर नामांकन एवं परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया इतनी तेजी से पूरी कर दी जा रही है कि उनका कोर्स पूरा नहीं हो पा रहे है। उन्हें आधी-अधूरी पढ़ाई कर परीक्षा में शामिल होना पड़ रहा है। यह स्थिति वर्ष 2020 से बनी हुई है। जिन छात्रों ने सत्र 2021-24 में स्नातक में नामांकन कराया था, उनका स्नातक पार्ट थर्ड में दिसंबर 2023 में नामांकन हुआ और अप्रैल एवं मई माह के बीच परीक्षा ले ली गई।

जबकि सत्र 2022-25 के छात्र का नामांकन फरवरी में हुआ और अभी मई में परीक्षा पार्ट टू की परीक्षा चल रही है। सत्र 2023-26 के छात्रों का नामांकन जून-जुलाई 2023 में हुआ। इस सत्र के छात्रों की फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षा जनवरी माह में ली गई। शिक्षाविद् का मानना है कि कोर्स पूरा करने के लिए छात्रों को 10-11 माह तक कॉलेजों में पढ़ाया जाना जरूरी है। लेकिन, विश्वविद्यालय की ओर से शैक्षणिक सत्र नियमित करने के लिए उन्हें तीन से पांच महीने तक ही पढ़ने का समय मिल रहा है। ऐसे में छात्रों का कोर्स पूरा नहीं हो रहा है और उन्हें परीक्षा में शामिल होना पड़ रहा है।

कम समय में कोर्स पूरा कराने की कोशिश

महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि नामांकन एवं परीक्षा की प्रक्रिया विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित की जाती है। हमलोगों को किसी भी शैक्षणिक सत्र में पढ़ाने की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में जो समय मिलता है, हमलोग तीनों सत्र की अलग-अलग कक्षाओं का संचालन करते हैं और कम समय में कोर्स को पूरा करने का प्रयास करते हैं। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय की ओर से कोर्स पूरा करने के लिए निर्देश मिलता है, जिसका पालन किया जाता है।

एक-दो साल में सत्र समय पर हो जाएगा

महाविद्यालय प्रशासन का कहना था कि अभी सत्र को लगभग एक-दो साल में पूरी तरह से नियमित कर लिया जाएगा। इसके बाद छात्रों को शैक्षणिक समय मिलने लगेगा। हालांकि शैक्षणिक सत्र में सुधार होने के बाद छात्रों को अपने विश्वविद्यालय के अलावा अन्य किसी भी देश के विश्वविद्यालय में नामांकन कराना काफी आसान हो जाएगा। क्योंकि समय से परीक्षा व परीक्षा परिणाम आएगा, जिससे उन्हें नामांकन कराने में दिक्कत नहीं होगी।

कुछ माह पढ़ाकर ले रहे परीक्षा

स्नातक पार्ट टू के छात्र आशुतोष कुमार व मनोज कुमार ने बताया कि नामांकन कराने के बाद तीन-चार माह पढ़ाया जाता है। इसके बाद परीक्षा शुरू हो जाती है। इस कारण कोर्स पूरा नहीं हो पाता है। स्नातक पार्ट थ्री की पिंकी कुमारी व विश्वजीत चौबे का कहना था कि नामांकन कराने के दो माह बाद परीक्षा फॉर्म भरने का निर्देश मिल गया था। परीक्षा फॉर्म भरने के बाद घर पर पढ़ाई करने लगे। कोर्स पूरा नहीं हुआ और परीक्षा में बैठना पड़ा।

कोट

महाविद्यालय में पढ़ने वाले सभी पार्ट व सेमेस्टर के छात्रों को नामांकन की बाद नियमित रूप से क्लास में पढ़ाई कराई जाती है। जो समय पढ़ाई के लिए मिलता है उसमें कोर्स पूरा कराने का प्रयास किया जाता है। एक सत्र में नामांकन और परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया के बाद लगभग 10 महीने का समय चाहिए, जो अभी नहीं मिल पा रहा है। हालांकि जो समय मिल रहा है, उसमें कोर्स पूरा कराया जा रहा है।

डॉ. महेश प्रसाद, परीक्षा नियंत्रक, एसबीपी कॉलेज

फोटो 14 मई भभुआ- 5

कैप्शन- भभुआ शहर के शहीद संजय सिंह महिला कॉलेज में पढ़ाई करतीं छात्राएं।

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