
दस्तावेज के लिए 31 वर्षों से 10 किमी. की सैर कर रहे किसान
भगवानपुर प्रखंड के किसान 31 वर्षों से चकबंदी कार्यालय के लिए रामपुर जाने पर मजबूर हैं। हालांकि पंचायत समिति ने प्रस्ताव पास किया है, लेकिन कार्यालय नहीं खोला गया है। इससे किसानों को समय और धन की बर्बादी का सामना करना पड़ रहा है। वृद्ध और दिव्यांग जनों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्ष 1994 में जब प्रखंड का दर्जा मिला तब चकबंदी कार्यालय को रामपुर से भगवानपुर में शिफ्ट नहीं जा सका, झेल रहे हैं परेशानी प्रखंड पंचायत समिति की बैठक में प्रस्ताव पास करने के बाद भी नहीं खुला कार्यालय अधिकारी या कर्मी से भेंट नहीं होने पर वाहन किराया और समय की होती है बर्बादी (पेज चार की बॉटम खबर) भगवानपुर, एक संवाददाता। चक से जुड़ी जमीन के कागजात के लिए भगवानपुर प्रखंड के किसानों को 10 किमी. की सैर करनी पड़ रही है। इस समस्या से वह 31 वर्षों से जूझते आ रहे हैं। चकबंदी कार्यालय रामपुर है, जहां चक से जुड़े काम कराने के लिए भगवानपुर के किसानों को रामपुर जाना पड़ता है।
भगवानपुर भी प्रखंड मुख्यालय है, पर चहां चकबंदी कार्यालय नहीं खुला है। किसान बताते हैं कि अफसर व कर्मी से भेंट नहीं होने पर उन्हें अप-डाउन 40 रुपया भाड़ा, उनके इंतजार में बैठने पर 10-20 रुपए का नाश्ता और पूरे दिन का समय नष्ट हो जाता है। शारीरिक परेशानी अलग होती है। बताया गया है कि वर्ष 1994 से पहले तक भगवानपुर व रामपुर एक ही प्रखंड था। तब इस प्रखंड में 22 पंचायतें थीं और प्रखंड मुख्यालय भगवानपुर में था। लेकिन, वर्ष 1990 में प्रखंड मुख्यालय को भगवानपुर से रामपुर में शिफ्ट कर दिया गया। वर्ष 1994 में रामपुर को प्रखंड का दर्जा मिल गया। तब दोनों प्रखंडों को 11-11 पंचायतों में बांटकर अलग-अलग प्रखंड बनाया गया। किसान अभिषेक कुमार सिंह और अंशु सिंह ने बताया कि भगवानपुर में चकबंदी कार्यालय नहीं होने से चक भूमि का नक्शा, खतियान व अन्य दस्तावेज प्राप्त करने रामपुर जाने में खासकर वृद्ध, दिव्यांगजन व शरीर से कमजोर व्यक्तियों को परेशानी होती है। जेपी आंदोलन संगठन के प्रखंड संयोजक योगेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि वर्ष 1994 से ही चकबंदी कार्यालय रामपुर में कार्यरत है। भगवानपुर से रामपुर की दूरी 10 किमी. है। उक्त कार्यालय में अभी भी प्रखंड के हजारों किसानों को चकबंदी का नक्शा व अन्य दस्तावेज प्राप्त करने के लिए रामपुर जाना पड़ता है। किसान दिलबाग सिंह व डॉ. शिवबचन सिंह ने कहा कि चकबंदी कार्यालय दूर रहने से सारा काम छोड़कर जाना पड़ता है। वाहन किराया व समय लगता है। अगर अधिकारी से मुलाकात नहीं हुई तो यात्रा बेकार हो जाती है। चक हो चुके गांव के किसान ज्यादा परेशान भगवानपुर प्रखंड के चक का काम पूर्ण हो चुके गांव के किसानों को मुख्यालय में चकबंदी कार्यालय नहीं होने से कुछ ज्यादा ही परेशानी हो रही है। चकबंदी में शामिल खीरी, भगवानपुर, घोसां गांव के किसानों ने बताया कि चकबंदी से जुड़े कई तरह के दस्तावेज लाने के लिए रामपुर जाना जाना पड़ता है, जिससे आवागमन में काफी समय लग जाता है। क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि जैतपुर कला के मुखिया राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि पंचायत समिति की बैठक में चकबंदी कार्यालय को रामपुर से भगवानपुर में शिफ्ट करने का मुद्दा उठाया गया था। प्रस्ताव भी पास हुआ था। लेकिन, अब तक कुछ नहीं हो सका। प्रखंड प्रमुख राधिका कुंवर के प्रतिनिधि रामकेश्वर सिंह से पूछने पर बताया कि पंचायत समिति की बैठक में प्रस्ताव पास कर जिला प्रशासन व सरकार को फिर से भेजा जाएगा, ताकि भगवानपुर प्रखंड के किसानों को परेशानी नहीं झेलनी पड़े। फोटो- 06 फरवरी भभुआ- 5 कैप्शन- रामपुर प्रखंड मुख्यालय बेलांव में स्थित भगवानपुर प्रखंड के चकबंदी कार्यालय में कामकाज करते कर्मी।

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