
खेतों में गिरे तैयार फसल को नहीं काट पा रहे हैं किसान
संक्षेप: मोंथा तूफान के बाद किसानों के खेतों में बारिश का पानी जमा है, जिससे धान की फसल की कटाई नहीं हो पा रही है। गीली मिट्टी और गिरा हुआ धान हार्वेस्टर के संचालन में बाधा डाल रहे हैं। किसान हाथ से फसल काटने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन स्थिति चिंताजनक है। सरकार से सहायता की मांग की जा रही है।
मोंथा तूफान के दौरान हुई बारिश का अभी तक नहीं सूख सका है पानी फसल को काटने के लिए ले जाने पर हार्वेस्टर का फंस जा रहा चक्का (बोले भभुआ) भभुआ, नगर संवाददाता। किसानों के खेतों में धान की फसल तैयार है, पर वह उसकी कटनी नहीं करा पा रहे हैं। क्योंकि पिछले माह मोंथा तूफान की वजह से हुई बारिश का पानी अभी भी खेतों में जमा है। धान की फसल गिरी है और खेतों की मिट्टी गिली है। ऐसे में धान काटने के लिए चालक भी अपना हार्वेस्टर लेकर खेत में नहीं उतर रहे हैं। क्योंकि गिली मिट्टी में हार्वेस्टर ले जाने पर उसका चक्का फंस जा रहा है।

हालांकि कुछ किसान ऐसी फसल की कटनी हाथ से काटकर खाट पर रख रहे हैं। धान की पकी हुई फसल की कटनी करने के लिए किसान पानी और गिली मिट्टी सूखने का इंतजार कर रहे हैं। किसानों राधेश्याम सिंह व पुष्पेंद्र पांडेय बताते हैं कि तेज हवा और लगातार बारिश ने धान को खेत में गिरा दिया। ऐसे में वह समय से फसल की कटनी नहीं कर पा रहे हैं, जिससे रबी फसल की बुआई में भी देर होगी। पानी जमा रहने व मिट्टी गिली होने की वजह से कटनीहार भी कटनी करने के लिए तैयार नहीं हो पा रहे हैं। रतवार, नीबीं, सोनडिहरा, बारे, सिमरिया, हरिहरपुर, रूपपुर, रामपुर सहित आसपास के गांवों के किसान इससे प्रभावित हैं। प्रभावित किसानों रोशन सिंह, दलसिंगार सिंह, बेचन प्रजापति, रघुवीर यादव, शिवपाल मौर्य, गेंदा तिवारी, राजवंश ठाकुर सहित अन्य ने बताया कि इस वर्ष की स्थिति बेहद चिंताजनक है। रोज खेत देखने के बावजूद कोई उपाय उनके हाथ में नहीं है। खेत में मौजूद नमी और धान का गिरा होनेा कटाई में सबसे बड़ी बाधा बन गया है। फिलहाल मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में मौसम सामान्य रहने की उम्मीद जताई है, जिससे किसानों को राहत मिलने की संभावना है। धान के खेतों में गिरने से कटाई की बढ़ी लागत किसानों का कहना है कि तूफान हवा ने धान की फसल को खेत में गिरा दिया। धान गिरने से कटाई की लागत भी बढ़ जाएगी। हार्वेस्टर से कटाई मुश्किल है। खेत सूखने में जितनी देर होगी, फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर उतना ही प्रतिकूल असर पड़ेगा। हालांकि उच्च स्थान वाले खेतों में पानी जल्दी सूख गया है। वहां के किसान हाथ से फसल काटने में जुटे हैं, ताकि अगली फसल की बुआई कर सकें। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि तूफान के बाद खेतों में पानी जमा रहने से धान की कटाई में देर होना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में किसान जल्दबाज़ी में हार्वेस्टर चलवाने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे खेत और फसल दोनों को नुकसान हो सकता है। खेत के पर्याप्त सूखने पर ही मशीनें फसल कटाई कर सकती हैं। किसानों की बढ़ती चिंताएं और बर्बाद हुई फसल को देखकर कृषि विभाग की टीमों को भी सक्रिय होना चाहिए। किसानों को फसल की क्षति का आंकलन कर सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी लगातार उठ रही है। फोटो- 18 नवंबर भभुआ- 1 कैप्शन- भभुआ प्रखंड के सोनडिहरा व बारे के बीच बधार में मंगलवार को गिरा दिखते धान के पौधे।

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