जलवायु परिवर्तन के दौर में लागत व मेहनत बढ़ी, मुनाफा घटा
किसानों को जलवायु परिवर्तन के कारण खेती में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बेमौसम बारिश और सूखे से फसलें प्रभावित हो रही हैं, जिससे उपज में कमी आ रही है। किसानों को उपज बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, और उन्हें बिचौलियों पर निर्भर होना पड़ रहा है।

ठंढ़ में खुली जगह पर धान की रखवाली करने में कांप जाते है किसान, व्यापारी व मिलर से कम मिलती है उपज की कीमत बेमौसम बारिश से डूब जाती है फसल, पहाड़ी क्षेत्र में सुखाड़ देता है किसानों को तखलीफ किसानों को उपज बेचने के लिए झेलनी पड़ती है जलालत, बिचौलिए से बेचना मजबूरी ग्राफिक्स 1.41 लाख हेक्टेयर में कैमूर जिले में होती है धान की रोपनी 1.04 लाख हेक्टेयर में गेंहू की खेती के लिए निर्धारित है लक्ष्य (पटना का टास्क) भभुआ, हिन्दुस्तान संवाददाता। जलवायु परिवर्तन के इसदौर में खेती की लागत व मेहनत दोनों बढ़ गई है, जबकि किसानों का मुनाफा घट गया है।
जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित वर्षा, सूखा, भीषण गर्मी, कीटों के प्रकोप से फसलों की उपज में गिरावट आई है। कृषि विभाग की माने तो कुछ वर्षों में प्रमुख फसलों की उपज में 7-8% की गिरावट आ सकती है, जिससे किसानों की कृषि आय में 15-25% प्रतिशत तक कमी हो सकती है। कृषि विभाग का कहना है कि जलवायु परिवर्तन का कृषि पर आर्थिक प्रभाव तथा बदलते मौसम के कारण किसानों को अधिक सिंचाई, कीटनाशक और सूखे को सहने वाली प्रजाति के बीज पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। अत्यधिक गर्मी और बेमौसम बारिश से धान और गेहूं जैसी मुख्य फसलों की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। विभागीय अफसरों द्वारा यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि तापमान में वृद्धि से गेहूं की उपज में भी भारी कमी हो सकती है। नावागांव गांव के अग्रणी किसान धीरेन्द्र चौबे, निमी के अरुण सिंह व संजय सिंह, सुखारीपुर के श्रीकांत पाण्डेय, दसौती के अलबेला सिंह, चांद के भरुहियां के मिथिलेश दुबे व परमानन्द सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण प्रतिकूल मौसम में खेती के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ रहा है। मजदूरी का खर्च काफी बढ़ गया है। किसान राधेश्याम सिंह ने बताया कि दो साल पहले बेमौसम बारिश की वजह से चांद के किसानों को भारी क्षति झेलनी पड़ी थी। खेत में काटकर रखी धान की फसल वर्षा के पानी में डूब गई। किसानों ने यह भी बताया कि कैमूर जिले के करीब 80 प्रतिशत किसानों के पास रबी व खरीफ दोनों सीजन में अनाज का भंडारण करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। ठंढ़ के मौसम में खुली जगह पर रखे गए धान की रखवाली करने में किसान कांप जाते है। वहीं गर्मी के मौसम में गेहृ, चना व मसूर की देख-भाल करने में किसानों को लू व भीषण गर्मी का शिकार होना पड़ता है। उपज बेचने के लिए भटकते हैं किसान भभुआ। किसानों सत्येन्द्र सिंह, मनोज तिवारी व महेन्द्र सिंह ने बताया कि धान क्रय करने के लिए सरकार 15 नवंबर की तिथि तय करती है। लेकिन, कैमूर में अक्सर विलंब से खरीद शुरू होती है। तब हम किसान धान का ढेर खलिहान में रखकर क्रय करने का इंतजार करना पड़ता है। कभी धान में नमी बताकर तो कभी कुछ कमी बता धान लेने से मना कर दिया जाता है। तब वह शहर के व्यापारियों के हाथों धान बेचते हैं या खलिहान में आए कारोबारियों व मिलर से बेचते हैं। इस वर्ष सीसी नहीं होने, पैक्स अध्यक्षों द्वारा धान क्रय स्थगित करने और सहकारिता पदाधिकारियों की हड़ताल की वजह से भी किसानों को क्रय केंद्र पर धान बेचने में परेशानी हुई। नये लक्ष्य को भी इसलिए पूरा नहीं किया गया, क्योंकि पैक्सों को लक्ष्य देर से मिला था। मौसम की अनिश्चितता से आय में कमी किसान कामेश्वर कुशवाहा व संतोष सिंह कहते हैं कि पहले बरसात, ठंड और गर्मी के मौसम का तय समय होता था, अब उसमें अनियमितता आ गई है। इससे बुआई और कटाई के समय में फसल को क्षति होती है। अधिक तापमान, सूखा, अधिक बारिश और आंधी से फसलों की उपज पर असर पड़ता है। गर्म तापमान में कीट और फसल रोग तेजी से फैलते हैं, जिससे किसानों को रासायनिक दवाओं पर ज्यादा निर्भर होना पड़ता है। अत्यधिक वर्षा या सूखे की वजह से मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है, जिससे फसलें कमजोर हो रही हैं। जोखिम कम उठाने की पहल करें किसान कृषि वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से खेतीबारी और किसानों की आय प्रभावित हुई है। जलवायु अनुकूल खेती जरूरी है। एक ही फसल पर निर्भर न रहकर किसान को अलग-अलग फसलों की खेती करनी चाहिए। ड्रिप इरिगेशन, ्प्रिरंकलर सिस्टम जैसे आधुनिक सिंचाई तरीकों से पानी की बचत की जा सकती है। रासायनिक की जगह जैविक व प्राकृतिक खाद, नीम आधारित कीटनाशक का उपयोग फायदेमंद होगा। खेत की मेड़ पर फलदार और छायादार पौधे लगाने से सूक्ष्म जलवायु संतुलन बनता है और मृदा क्षरण रुकता है। (भभुआ से श्रीकांत पांडेय) फोटो-11 नवम्बर भभुआ- 4 कैप्शन- भगवानपुर प्रखंड के खेत में रोपी गई धान की फसल में खाद का छिड़काव करता किसान (फाइल फोटो)।
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