फूलों की खेती से मुंह मोड़ रहे किसान, मौसम व बाजार भाव ने किया निराश
बोले भभुआ,बोले भभुआ, फूलों की खेती से मुंह मोड़ रहे किसान, मौसम व बाजार भाव ने किया निराश लागत बढ़ी, दाम घटे पर

बोले भभुआ, फूलों की खेती से मुंह मोड़ रहे किसान, मौसम व बाजार भाव ने किया निराश लागत बढ़ी, दाम घटे पर मेहनत के बावजूद नहीं मिल रहा उचित मूल्य स्थानीय फूलों की जगह बाहर से आ रहे फूल, परंपरागत खेती पर संकट भभुआ, नगर संवाददाता। जिले में फूलों की खेती करने वाले किसान इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और बाजार में उचित भाव नहीं मिलने से किसान इस पारंपरिक खेती से दूरी बनाने लगे हैं। कभी जिले के ग्रामीण इलाकों में गेंदा, गुलाब, रजनीगंधा समेत कई किस्मों के फूलों की भरपूर खेती होती थी, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी मिलती थी।
लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि मेहनत और पूंजी लगाने के बाद भी उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा। अनिल पटेल, ब्रम्हा मौर्य, गिरधारी मालाकार, सोहन माली आदि किसानों का कहना है कि फूलों की खेती में नियमित देखभाल, सिंचाई और मजदूरी की जरूरत होती है। जरा सी मौसम की मार अधिक बारिश, ठंड या तेज धूप पूरी फसल को प्रभावित कर देती है। इसके बाद जब किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचते हैं तो व्यापारी मनमाने भाव लगाते हैं। खराब होने के डर से किसान औने-पौने दाम पर फूल बेचने को मजबूर हो जाते हैं। इससे उनकी लागत भी नहीं निकल पाती और कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। इसका असर जिले की धार्मिक और सामाजिक जरूरतों पर भी साफ दिख रहा है। हरसु ब्रम्ह धाम, मां मुंडेश्वरी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में अब स्थानीय फूल कम और बाहर से मंगाए गए फूल ज्यादा दिखाई देते हैं। शादी-विवाह, पूजा-पाठ और उत्सवों में सजावट के लिए भी बनारस व अन्य शहरों से फूल लाने पड़ रहे हैं। इससे स्थानीय बाजार की पहचान कमजोर हुई है और रोजगार के अवसर भी घटे हैं। फुलो की खेती की परंपरा खत्म होने की कगार पर भभुआ। पूर्व के दशक में कैमूर के कई इलाके में फूलों की खेती होती थी। कई परिवार पीढीयों से इस खेती से जुड़े थे और यही उनकी मुख्य आजीविका थी। यहां के बाजारों में स्थानीय फूलों की अलग पहचान थी। लेकिन लगातार घाटा झेलने के कारण नई पीढ़ी इस खेती में रुचि नहीं ले रही। किसान अब धान, गेहूं या सब्जी जैसी अपेक्षाकृत सुरक्षित फसलों की ओर जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि सरकार बाजार व्यवस्था मजबूत करे, फूलों के लिए अलग मंडी या समर्थन मूल्य जैसी व्यवस्था हो, साथ ही भंडारण और परिवहन की सुविधा मिले तो वे दोबारा इस खेती को अपनाने को तैयार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फूलों की खेती को प्रोत्साहन देकर जिले में रोजगार और पर्यटन दोनों को बढ़ावा दिया जा सकता है। फिलहाल उपेक्षा के कारण यहां की परंपरागत फूल की खेती धीरे-धीरे समाप्त होने की कगार पर पहुंच गई है। फोटो- 08 फरवरी भभुआ-01 कैप्शन- भभुआ प्रखंड के एक बधार में की गई गेंदा फूल की खेती बोले भभुआ, स्कूल वाहनों के लाउडस्पीकर से प्रचार, कॉलोनियों के लोगों का जीना दुश्वार सुबह से दोपहर तक गूंजती कानफाड़ू आवाज से बीमार, बुजुर्ग और बच्चों की सेहत पर पड़ रहा बुरा असर ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए प्रशासन से सख्त कार्रवाई, प्रतिबंध और जुर्माना लगाने की उठी मांग भभुआ, नगर संवाददाता। भभुआ शहर में निजी स्कूलों की प्रचार पद्धति अब आम लोगों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनती जा रही है। बच्चों को लाने-ले जाने वाले स्कूल वाहन खुलेआम प्रचार गाडियों में तब्दील हो चुके हैं। वाहनों की छत पर लाउडस्पीकर बांधकर चालक कॉलोनियों में तेज आवाज में स्कूल का प्रचार करते हुए घूमते हैं। सुबह से लेकर दोपहर तक गूंजती कानफाड़ू आवाज से स्थानीय लोगों का जीना मुहाल हो गया है। कॉलोनियों में रहने वाले बुजुर्ग, बीमार व्यक्ति और छोटे बच्चे इस शोर से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि रोजाना होने वाला यह शोर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है। शिवनारायण सिंह, प्रसिद्ध चौबे, रघुवीर प्रसाद आदि कई बुजुर्गों ने शिकायत की है कि तेज आवाज के कारण उनका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और आराम करना मुश्किल हो जाता है। वहीं घरों में पढ़ाई करने वाले बच्चों की पढ़ाई भी लगातार बाधित हो रही है। लोगों ने इसे खुला ध्वनि प्रदूषण बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा संस्थानों को प्रचार के लिए जिम्मेदार और शालीन तरीका अपनाना चाहिए। लाउडस्पीकर के जरिए रोज प्रचार करना नियमों का उल्लंघन है और इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। शहरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सामूहिक शिकायत दर्ज कराएंगे। नागरिकों की मांग है कि स्कूल वाहनों पर लगे लाउडस्पीकर जब्त किए जाएं और संबंधित संस्थानों पर जुर्माना लगाया जाए, ताकि शहर को ध्वनि प्रदूषण से राहत मिल सके। फोटो- 08 फरवरी भभुआ-02 कैप्शन- शहर के एक स्कूल के खड़े वाहन की छत पर लगा लाउडस्पीकर
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