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बाढ़ की त्रास्दी के मंजर को याद कर दहल उठते हैं किसान (पेज चार की बॉटम खबर)

हिन्दुस्तान टीम,भभुआPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 07:50 PM
बाढ़ की त्रास्दी के मंजर को याद कर दहल उठते हैं किसान (पेज चार की बॉटम खबर)

दुर्गावती, कर्मनाशा, कोहिरा व गेहुवनवा नदी जब उफान पर होती हैं उसके पानी से घिर जाते हैं जीटी रोड के दक्षिणी क्षेत्र के कई गांव व बधार

बाढ़ से प्रतिवर्ष किसानों की हजारों हेक्टेयर की फसल हो जाती है बर्बाद

मवेशियों के लिए चारा प्रबंध करने में पशुपालकों के छूट जाते हैं पसीने

11 सौ हेक्टेयर में लगी फसल डूब जाती है बाढ़ में

दुर्गावती। एक संवाददाता

दुर्गावती, कर्मनाशा, कोहिरा व गेहुवनवा नदी की त्रासदी के मंजर को याद कर किसान और ग्रामीण दहल उठते हैं। गांव-घर पानी से घिर जाते हैं और फसल डूब जाती है। तब लोगों को लाखों का नुकसान होता है। पीड़ितों की आंखें हर साल जो मंजर देखती है, वह लोग ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि ऐसी नौबत न आए, जिससे पेट पर आफत आ जाए। दुर्गावती प्रखंड के जीटी रोड से दक्षिण का इलाका तब-तब जलमग्न हो जाता है, जब नदियों उफान पर होती हैं।

दुर्गावती प्रखंड के सरियांव, गोरार, मच्छनहटा, दहला, खामिदौरा, चेहरिया, चोगड़ा, उदपुरा गांव के किसानों की लगभग 400 हेक्टेयर व बभनपुरा, जनार्दनपुर, माधोपुर, मनोहरपुर, इसड़ी, बहेरा, कस्थरी, रोहुआ, गंगापुर, अवहरियां, मचखिया, इसीपुर इलाके की 700 हेक्टेयर भूमि बाढ़ प्रभावित है। इन गांवों के खेतों में लगी धान, अरहर, मूंग, मक्का, बजड़ा, सब्जी की फसल बाढ़ के पानी से डूबकर नष्ट हो जाती है, जिससे किसानों की आर्थिक कमर हर साल टूटती है। फिर भी जल संसाधन विभाग ऐसी क्षति से उन्हें मुक्त करने की दिशा में ठोस पहल नहीं की जा सकी है।

बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित नदी का तटवर्ती इलाका ही होता है। वैसे प्रभावित क्षेत्र के लोग फसल तो नहीं बचा पात हैं, लेकिन बाढ़ आने से पहले ही खुद के बचाव की पूरी तैयारी कर लेते हैं। हालांकि सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाकों को चिन्हित कर बचाव व राहत कार्य का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। पहाड़ी इलाकों में पांच-छह दिनों से हो रही बारिश के बाद नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

इन गांवों व बधार में बाढ़ मचाती है तबाही

दुर्गावती, कोहिरा व गेहुअनवा नदियों का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के सरियाव, गोरार,मछनहटा, डहला, खामिदौरा, चेहरियां, चोगड़ा आदि गांव घिर जाते हैं। फसल डूब जाती है। गोरार व सरियांव गांव जाने वाला संपर्क पथ पानी में डूब जाता है, जिससे गांव के लोगों को बाहर आने-जाने में परेशानी होती है। बभनपुरा, जनार्दनपुर, माधोपुर, मनोहरपुर, इसड़ी, बहेरा, उदपुरा, कस्थरी, रोहुआ आदि गांव के बधार में लगी फसल डूब जाती है। पहाड़ी इलाकों में बारिश तेज हाने पर दुर्गावती-चैनपुर पथ, दुर्गावती-हाटा पथ व दुर्गावती-ककरैत घाट पथ के ऊपर से पानी चलने लगता है, जिससे लोगों को आवागमन में असुविधा होती है।

तब बंद कर देना पड़ता है विद्यालय

नदियों के उफान पर होने पर बाढ़ आ जाती है। बाढ़ का पानी दुर्गावती प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय व अपग्रेड प्लस टू स्कूल गोरार, प्राथमिक विद्यालय मछनहटा, दुर्गावती अपग्रेड कन्या हाई स्कूल आदि के परिसर में घुस जाता है, जिससे स्कूलों को बाढ़ का असर कम होने तक बंद रखना पड़ता है। जब इन नदियों मे बाढ़ आता है तो दुर्गावती- चैनपुर पथ व दुर्गावती-हाटा पथ के बीच वाला इलाका चार किलोमीटर वर्ग क्षेत्र जो जीटी रोड के दक्षिण है में जलमग्न हो जाता है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों ने सुनाई पीड़ा

सरियाव के मुरारी पासवान का कहना है कि हमलोग बाढ़ की विभीषिका झेलने के आदि हो गए हैं। जब बाढ़ आता है मेरा गांव पानी से घिर जाता है। गोरार के सूबेदार राम कहते हैं कि जब बाढ़ आता है तब गांव के संपर्क पथ पर दो से तीन फीट पानी चलने लगता है। दहला के रमेश सिंह यादव का कहना है कि जब नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगता है तब सबसे ज्यादा परेशानी मवेशियों को बांधने व हरा चारा की होती है। कई बार बाढ़ आने पर मवेशियों को जीटी रोड के किनारे बांधना पड़ा है। चेहरिया के रामशृंगार राम ने बताया कि दुर्गावती-ककरैत घाट पथ में चेहरिया के पास नदी का पानी सड़क के ऊपर बहने लगता है, जिससे आवागमन ठप हो जाता है।

कोट

पिछले साल चिन्हित पांच जगहों पर कटावरोधी उपाय किए गए थे। इस साल कोई योजना नहीं है। वैसे फोटोग्राफी व विडियोग्राफी कराकर 12 गांवों की रिपोर्ट पटना मुख्यालय को भेजी गई है।

बृजेश कुमार सिंह, सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण

फोटो- 17 जून भभुआ- 9

कैप्शन- दुर्गावती-चैनपुर पथ में चोगड़ा पुलिया के उपर चढ़े पानी से होकर आते-जाते लोग (फाइल फोटो)।

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