‘भगवान से प्रेम अनुभव का विषय है, वाणी का नहीं’

Jan 22, 2026 10:44 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भभुआ
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श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन, मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने भगवान के प्रेम और भक्ति की महत्ता को बताया। कथा के दौरान प्रेम की आकुलता और जीवन की यात्रा का उदाहरण प्रस्तुत किया। भक्तों ने कथा में भाग लेकर आनंदित महसूस किया।

‘भगवान से प्रेम अनुभव का विषय है, वाणी का नहीं’

यज्ञ में चौथे दिन मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी से कथा सुन भाव-विह्वल हुए श्रद्धालु यूपी-बिहार की सीमा चौबाह बाबा वराह भगवान स्थान पर बह रही भक्ति रस की धारा (पेज चार की फ्लायर) रामगढ़, एक संवाददाता। श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ में चौथे दिन गुरुवार को मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने कथा के विभिन्न उद्धरणों व आध्यात्मिक प्रसंगों से भक्ति के कैनवास पर ऐसा चित्र उकेरा कि श्रद्धालु भावविभोर हो गए। काशी की कथावाचिका ने कहा कि भगवान से प्रेम अनुभव का विषय है, वाणी का नहीं। प्रेम की भाषा मौन होती है। इसीलिए भगवान प्रेम की विह्वलता को परखते हैं। वे भाव के भूखे होते हैं।

मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम कथा करुणा, कृपा, भाव व प्रेम के घाट पहुंची तो जीवन संवारने का सूत्र पाकर श्रद्धालु निहाल हो गए। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी को याद करते हुए कहा कि भगवान की करुणा हुई तो नर तन मिला। नर तन का बेहतरीन दायित्व कीर्तन है। कीर्तन काया के कलूष को दूर कर मन को भक्ति से जोड़ता है। भगवान की कृपा हो गई तो समझो जीवन संवर गया। उन्होंने एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए भगवान के प्रति भाव की व्याख्या की। कहा कि एक संत अपने कन्हैया के प्रेम में आह्लादित हो यात्रा पर निकले। इस दौरान ट्रेन से उतरे तो झोला सहित कन्हैया बिछड़ गये। उन्होंने बताया कि कन्हैया को पाने की व्यग्रता में विभिन्न प्लेटफॉर्म पर तलाश की और जब तक उनके कन्हैया मिले नहीं गए, तब तक इंजीनियरों का दल ट्रेन को आगे बढ़ाने में विफल रहा। ये है प्रेम की आकुलता व भाव की विह्वलता। सुश्री त्रिपाठी ने कहा कि जीवन अगर भवसागर है तो श्रीराम कथा नाव है। कथा सुनाने वाला नाविक है, जिसके पास मझधार पार करने को पतवार है। सुननेवाले नाव के सवारी है। भवसागर पार करने की जिम्मेदारी दोनों की कथा श्रवण कराते हुए मानस मयूरी ने कहा कि भवसागर पार करने की जिम्मेदारी नाविक और सवारी दोनों की है। बीच मझधार में नाविक चाहे जितने धैर्य से नाव को खेये, यदि सवार का संतुलन बिगड़ेगा तो नाव डोलेगी और डूब जाएगी। उन्होंने कहा कि भगवान के शरणागति से सब कुछ सुलभ है। कलाकारों ने की संगत कथा के दौरान हारमोनियम पर बबलु तिवारी, तबला पर दीपक यादव और आर्गन पर सतीश कुमार संगत कर रहे थे। कथा को सफल बनाने में अशोक तिवारी, दयाशंकर तिवारी, सुखैन तिवारी, अरुण तिवारी, पशुपति तिवारी, कमला तिवारी, गुपुत तिवारी, हरिओम तिवारी, अखिलेश तिवारी सहित कई लोग लगे रहे। फोटो- 22 जनवरी भभुआ- 13 कैप्शन- रामगढ़ प्रखंड के चौबाह बाबा वराह भगवान स्थान पर गुरुवार को कथा सुनातीं विदूषी शालिनी त्रिपाठी।

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