Hindi NewsBihar NewsBhabua NewsElection Predictions and Bihar s Future A Political Discussion at Durga Chowk
केके पकड़ीं केके छोड़ीं ई मसला बड़ी बरियार बा ए भाई

केके पकड़ीं केके छोड़ीं ई मसला बड़ी बरियार बा ए भाई

संक्षेप: (नुक्कड़ पर चुनाव/दुर्गा चौक) बकवास छोड़िए और तनिक सोचिए कि मुद्दा किसका सही हैबकवास छोड़िए और तनिक सोचिए कि मुद्दा किसका सही हैबकवास छोड़िए और तनिक सोचिए कि मुद्दा किसका सही है

Mon, 3 Nov 2025 08:07 PMNewswrap हिन्दुस्तान, भभुआ
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(नुक्कड़ पर चुनाव/दुर्गा चौक) रामगढ़। दुर्गा चौक पर मुराहू पान घुलाकर तैयार बैठे हैं। थोड़ी देर में बैठकी होगी। किस टॉपिक पर चर्चा होगी, तय कर रहे हैं। भावनाथ सफेद कुर्ता पायजामा वाली टोली के साथ पंहुचे। बेंच पर दुआ-सलाम होते ही बोले- चुनावी महाभारत में का बुझात बा हो मुराहू भइया। केकर सरकार बनी। यह सुन मुराहू हांकने लगे, हमरा दुलरूवा के मुख्यमंत्री बने के चांस हंड्रेड परसेंट फिक्स बा। जनता मन बना चुकी है। लड़ाई किलियर है। काहें मुगालता में पड़े हुए हो। देख रहे हो न सभवा में केतना भीड़ उमड़ रही है। विरोधियन के दिमाग का कलपूर्जा ठिकाने लगने लगा है।

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तभी ताल ठोंककर भावनाथ बोले- हमार भविष्यवाणी भी सुन लो। हम तो कह रहे हैं कि लिखकर हमसे ले लो। एहिजा के सीटिया जीतबा तब्बे, जब तोहार दुलरूवा बिहार के मुख्यमंत्री बनीहें। अगर एहिजा हार हो गइल त बिहार भी मुट्ठी से फिसल जाई। बटोही बाबा बोले कि एह चुनाव में जाति के गवनई गजबे बा ए भाई। सरकार के मुखिया भी जाति के चाही। विधायक भी जाति के चाही। ई चित-पट दुन्नो ओर से बाजा बजावे के कसरत कब तक चली। तभी दिल्ली से आए रणधीर ने तंज कसा। चुनावी महाभारत का दृश्य गौर से देखो मुराहू। सबके घोषणापत्र में सत्ता के लिए बिहार को बहार से पाट देने का ऐलान है। ऐसे में कल्पना करो कि चुनाव बाद अपना बिहार कैसा होगा। राम लड्डू ने तंज के नहले पर दहला फेंक दिया। बदहाली-बेरोजगारी नेताओं से ऐसी शरण मांगेगी जैसे महाभारत काल में कलयुग ने राजा परीक्षित से शरण मांगी थी। कमोवेश हर युवा सरकारी नौकर होगा। नौकरी से जो चुकेंगे, उन्हें रोजगार के बंधन से बांधा जाएगा। सबके जेब में हर महीने मोटी पगार होगी। बिहार स्वर्णयुग में लौट जाएगा। कल कारखानों की भरमार होगी। जैसे नालंदा विश्वविद्यालय का गौरव गान ह्वेनसांग ने किया था, वैसे ही विदेशी यात्री आएंगे। चौंधियाए आंखों से बिहार को निहारेंगे। अब मुरली बोले, और इतिहास में लिखेंगे कि जनता चुनाव में हर जख्म भूलकर हुलस पड़ी थी। ईवीएम पर दनादन बटन दबाया। फिर सरकार बन गई। कुछ हीं दिन बीते कि जनता फिलिम वाला गाना 'दिल के अरमां आंसुओं में बह गए...' गाकर मौन साध ली। डिस्को बाबू बोले कि दल के दलदल को धो डाला भाई तुने, पर एक बात बताओ। कोई ऐलान कर रहा तो कोई प्रतिज्ञा ले रहा। मसला तो ई बरियार है। किसको पकड़ें किसको छोड़ें बुझाई नहीं रहा। बटोही बाबा बोले कि चुपचाप परचार करो और स्मार्टफोन खरीद लो। तुम्हरे असमंजस का ई सबसे मुफीद हल है। डिस्को बाबू पूछ बैठे, समझे नहीं आपका आशय। बटोही बाबा बोले एक दिन परचार के हजार रुपैया मिल रहा। करना कुछ नहीं। लग्जरी गाड़ी से उतरो और नेताजी के पीछे जिंदाबाद नारा लगाओ। तर माल छक कर उड़ाने को मिल रहा अलग से। दो हफ्ता प्रचार में माथा खपाओ और 15 हजार पाओ। फिर एंड्रॉयड मोबाइल हाथ में। पार्ट टाइम जॉब की तरह। हमरे घराने का 'पांचों बेरोजगार पांडव' सुबहे निकल जाते हैं तो देर शाम को नगद-नारायण के साथ लौटते हैं। अब दीपचंद से बर्दाश्त नहीं हुआ। बोले कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जिम्मेदार नागरिक बनना होगा तब बिहार का भला होगा। बकवास छोड़िए और तनिक सोचिए कि मुद्दा किसका सही है।