चुनाव खर्च की निगरानी और कार्यक्रम स्थल पर खर्च का आंकलन हो
संक्षेप: (1 मिनट) निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित राशि और दर के अनुसार ही देते हैंनिर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित राशि और दर के अनुसार ही देते हैंनिर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित राशि और दर के अनुसार ही देते हैं

(1 मिनट) भभुआ। चुनाव महंगे होते जा रहे हैं। इसका कारण महंगाई और संसाधन है। पहले के चुनाव में उम्मीदवार बैलगाड़ी, घोड़ागाड़ी, पैदल गांवों में जाकर प्रचार करते और वोट देने के लिए मतदाताओं का मनुहार करते थे। पहले प्रचार सामग्री का उपयोग भी कम होता था। लेकिन, अब वाहन, सार्वजनिक सभा, रैली, पोस्टर, बैनर, वाहन, विज्ञापन, अन्य प्रचार सामग्री, कार्यकर्ताओं के लिए नाश्ता, भोजन, आवासन के प्रबंध, टेक्निकल हैंडस आदि पर खर्च हो रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव में एक प्रत्याशी को 40 लाख रुपया खर्च करने की सीमा तय की है। विभिन्न मद में खर्च होनेवाली राशि के लिए दर भी निर्धारित की गई है।
प्रत्याशी खर्च ज्यादा करते हैं, लेकिन जब खर्च का हिसाब देना होता है, तब निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित राशि और दर के अनुसार ही देते हैं। चुनाव खर्च की निगरानी और कार्यक्रम स्थल पर खर्च का आंकलन किया जाना जरूरी है। यह बातें मंगलवार को आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान द्वारा आयोजित एक मिनट कॉलम में आमजनों ने कही। फोटो- 14 अक्टूबर भभुआ- 1 कैप्शन- भभुआ शहर के समाहरणालय पथ में मंगलवार को आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान की ओर से आयोजित चाय चौपाल में भाग लेते लोग। किसने क्या कहा 1. चुनाव में रैली, सभा, टेक्निकल हैंडस पर ज्यादा खर्च किए जाते हैं। इसकी निगरानी जरूरी है। कुछ प्रत्याशी गलत मद में राशि खर्च करते हैं, जो आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। फिजूल खर्च पर पाबंदी लगाया जाना जरूरी है। फोटो- शिवम कुमार 2. निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनाव में किसी भी प्रत्याशी के लिए अधिकतम 40 लाख रुपये खर्च करने की सीमा तय की है। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है, ताकि सभी उम्मीदवार समान स्तर पर चुनाव लड़ें। लेकिन, धनबल का प्रभाव दिखता है। फोटो- मनोज कुमार 3. प्रत्याशी अपने चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक सभा, रैली, पोस्टर, बैनर, वाहन, विज्ञापन और प्रचार सामग्री पर खर्च करते हैं। इन मदों में खर्च हुई राशि कानूनी व्यय की श्रेणी में आता है। प्रत्याशी खर्च ज्यादा करते हैं, पर शो कम होता है। फोटो- प्रदीप कुमार 4. मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए पैसे, शराब या अन्रू वस्तुओं का वितरण करना गैरकानूनी है। ऐसा कोई भी खर्च अवैध व्यय की श्रेणी में आता है। लेकिन, कुछ प्रत्याशी ऐसा आचरण अपनाते हैं। ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। फोटो- सरजू प्रसाद चौरसिया 5. चुनाव में खर्च किया जाने वाला पैसा उम्मीदवार के व्यक्तिगत संसाधनों, राजनीतिक दल से प्राप्त सहयोग या समर्थकों द्वारा दिए गए वैध दान से प्राप्त होता है। उम्मीदवार द्वारा खर्च की जानेवाली राशि का प्रबंध कहां से हो रहा है की मॉनिटरिंग जरूरी है। फोटो- देवेंद्र कुमार सिंह 6. चुनाव में खर्च की जानेवाली राशि की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निर्वाचन आयोग हिसाब मांगता है। इससे चुनाव में अवैध खर्च पर रोक लगती है। लेकिन, समीक्षा करने पर यह पता चलेगा कि चुनाव में निर्धारित राशि से ज्यादा खर्च की गई है। फोटो- अनिल कुमार दुबे 7. जिस स्रोत से उम्मीदवार को राशि प्राप्त हो रही है, इसकी जानकारी उम्मीदवार को निर्वाचन आयोग के समक्ष घोषित करना होता है। बावजूद कुछ मद में आयोग से छुपाकर खर्च किया जाता है। अवैध वित्तीय गतिविधियों पर रोक लगना चाहिए। फोटो- विंध्याचल यादव 8. निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित दर के अनुसार चुनाव में खर्च किया जा रहा है या नहीं इसकी जांच होनी चाहिए। व्यय कोषांग के अधिकारी को कार्यक्रम स्थल पर उनकी नजर में दिखने वाले खर्च और जारी दर सूची से मिलान करना जरूरी है। फोटो- पप्पू सिंह 9. चुनाव में किसी भी प्रत्याशी को प्रचार के लिए तीन वाहन रखने की अनुमति होती है। इसके लिए निर्वाचन आयोग से परमिट लेना है। गाड़ी पर प्रत्याशी का नाम व निर्वाचन क्षेत्र लिखना है। कुछ वाहन बिना परमिट के भी परिचालन किए जाते हैं। फोटो- शिवपूजन तिवारी 10. चुनाव के एक दिन पहले की रात मतदाताओं को लुभाने के लिए प्रत्याशी खूब जोर देते हैं। इसके लिए वह हर हथकंडा अपनाते हैं। इस रात में टीम बनाकर निगरानी करनी चाहिए। जो पकड़े जाएं उनके खिलाफ मुकदमा किया जाना जरूरी है। फोटो- जयशंकर दुबे

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