
पहाड़ की घाटी वाले अंधा मोड़ पर संकेतक बोर्ड तक नहीं
संक्षेप: अधौरा की घाटियों में खतरनाक मोड़ों के कारण अंजान चालकों के लिए यात्रा करना जोखिम भरा हो गया है। सड़क निर्माण एजेंसी द्वारा संकेतक बोर्ड नहीं लगाने से कई हादसे हो चुके हैं, जिसमें कई लोगों की जान गई है और कई लोग घायल हुए हैं। स्थानीय निवासियों ने संकेतक लगाने की मांग की है।
खतरनाक अंधा मोड़ और पहाड़ी घाटी में अक्सर होते रहते हैं हादसे, कई लोगों की चली गई है जान, कई हाथ-पैर से हो चुके हैं दिव्यांग सड़क निर्माण करानेवाली एजेंसी की है संकेतक बोर्ड लगाने की जिम्मेदारी घाटी में अंजान चालकों के वाहन अक्सर होते रहते हैं दुर्घटना के शिकार 47 किमी. की दूरी करनी पड़ेगी तय (पेज चार की लीड खबर) भभुआ, कार्यालय संवाददाता। जंगल व पहाड़ से घिरे अधौरा की घाटियों और अंधा मोड़ से सफर करना अंजान चालकों के लिए खतरनाक साबित होता है। भगवानपुर से अधौरा की दूरी 47 किमी. है। इतनी दूरी की सड़क में कहीं भी संकेतक चिन्ह का बोर्ड नहीं लगाया गया है।

इसकी जिम्मेदारी सड़क निर्माण एजेंसी की है। इस सड़क में अक्सर हादसे होते रहते हैं। इन हादसों में कुछ लोगों की मौत हो गई है और कुछ लोगों के हाथ-पैर हड्डी टूट गई है। शनिवार को भी ओखरगाड़ा घाटी में बाइक व पिकअप वैन की टक्कर में सिकरी गांव का युवक विशाल कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस पथ में जिला मुख्यालय भभुआ, अधौरा तथा भगवानपुर से कई यात्री वाहनों का परिचालन होता है। निजी वाहन तो अनगिनत आते-जाते हैं। यह सड़क उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ को भी जोड़ती है। सबसे खतरनाक दृश्य तब दिखता है, जब यात्री बस, टेकर, पिकअप की छत पर भी सवार होकर यात्रा करते हैं। इससे हादसे की आशंका बनी रहती है। सबसे ज्यादा परेशानी उन चालकों को होती है, जिनके लिए यह रास्ता नया होता है। अगर चालक वाहनों का परिचालन संभलकर नहीं किए तो हादसे के शिकार हो सकते हैं। अधौरा प्रखंड के गड़के गांव के कमता प्रसाद, सिकरी के महेंद्र साह, करर के बनवारी यादव, ताला के असलम अंसारी, अधौरा के शिवमूरत सिंह कहते हैं कि भगवानपुर से अधौरा के बीच कई ऐसी घाटी व मोड़ है जो काफी खतरनाक है और वहां अक्सर हादसे होते रहते हैं। ऐसी जगहों पर संकेतक चिन्ह लगाया जाना जरूरी है, ताकि वाहन चालक सावधान हो जाएं और कोई हादसा न हो सके। मुख्य सड़क से सटे हैं यह गांव अधौरा के पथ में कुछ ऐसे भी गांव हैं, जो सड़क से सटे हैं। कहीं-कहीं तो सड़क के दोनों ओर गांव हैं। बच्चे घर के सामने खेलते रहते हैं। ग्रामीण भी सड़क पार करते हैं। इस दौरान भी हादसे की आशंका बनी रहती है। अधौरा प्रखंड के ताला, गम्हरिया, गड़के, ओखरगाड़ा, झड़पा आदि ऐसे गांव हैं, जो सड़क से सटे हैं। इन जगहों पर हादसे भी होते रहते हैं। यह है खतरनाक मोड़ भभुआ-अधौरा पथ में अधौरा प्रखंड के मूरतिया मोड़, कुशहवा मोड़, हनुमान घाटी में जलेबिया मोड़, ओखरगाड़ा मोड़, गड़के मोड़, तेल्हाड़ मोड़, धरती माई स्थान मोड़ काफी खतरनाक है। इन जगहों पर अक्सर हादसे होते रहते हैं। इसी पथ में करर व झड़पा में स्कूल हैं। रास्ते में कहीं भी आगे स्कूल-गांव है धीरे जाएं या खतरनाक मोड़ है संभलकर यात्रा करें, वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात नहीं करें, शराब पीकर वाहन न चलाएं जैसे बोर्ड नहीं दिखाई पड़ते हैं। तीन तीर्थयात्रियों की हो चुकी थी मौत खतरनाक मोड़ पर हादसे में कई लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं। ओखरगाड़ा में तीन साल पहले गुप्ताधाम में लगे महाशिवरात्रि मेला से लौट रहे यूपी के राबर्टसगंज के तीर्थयात्रियों का ट्रैक्टर पलट गया, जिससे उसपर सवार दो महिला सहित तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 19 लोग घायल हो गए थे। चार अन्य लोगों की भी चली गई है जान ताला मोड़ पर करर के दो युवकों की मौत बाइक व बस की टक्कर में हो गई थी। पिछले साल करर में ट्रैक्टर के पलट जाने से चालक सहित दो लोगों की मौत हुई थी। कुशहवा मोड़ पर पिछले साल सड़क हादसे में प्रखंड कार्यालय के प्रधान लिपिक के अलावा अधौरा की मीरा देवी व उसका पति भोला सेठ जख्मी हो गए थे। फोटो- 18 नवंबर भभुआ- 4 कैप्शन- भगवानपुर-अधौरा मुख्य पथ में बिना संकेतक बोर्ड के दिखती हनुमान घाटी की सड़क।

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