श्रीराम के मिथिला गमन की कथा सुन प्रसन्नचित हुए भक्त
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पर श्रीराम कथा का खनांव में चल रहा है आयोजन कथावाचक से श्रीरामचरितमानस की कथा को सुनकर आनंदित हो रहे हैं लोग

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पर श्रीराम कथा का खनांव में चल रहा है आयोजन कथावाचक से श्रीरामचरितमानस की कथा को सुनकर आनंदित हो रहे हैं लोग (पेज चार) भभुआ, एक प्रतिनिधि। सदर प्रखंड के खनांव गांव में चल रहे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव एवं श्रीराम कथा में काशी से पधारे डॉ. चंद्रकांत चतुर्वेदी ने सोमवार को भगवान श्री राम की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए भगवान के मिथिला गमन प्रसंग की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम के जीवन की यह पहली यात्रा थी और इस यात्रा में भगवान को तीन ्त्रिरयों, तीन पुरुष और तीन धनुष मिले। कहा कि तीन पुरुष में विश्वामित्र, परशुराम और जनक मिले।
तीन ्त्रिरयों में तड़का, अहिल्या और माता जानकी का दर्शन हुआ, जिसमें भगवान श्रीराम ने ताड़का को मारा। अहिल्या को उबारा और सीता को स्वीकार किया। मिथिला प्रसंग का वर्णन करते हुए कथावाचक ने बताया कि मानस में चार भूमि है। भगवान को मिथिला में प्रवेश करने के पूर्व गुरु की कृपा की अत्यंत आवश्यकता पड़ी थी, जिसे उन्होंने लिया। उन्होंने बताया कि गुरु की कृपा से ही मानव का कल्याण और भक्ति की प्राप्ति होती है। दूसरे कथावाचक काशी से पधारे आचार्य सच्चिदानंद त्रिपाठी ने कहा कि सत्संग का क्षण और अन्न का कण जो समझ लिया, वही महान है। परमात्मा आपको मनुष्य बना सकता है। परंतु मनुष्यत्व गुरु कृपा से ही संभव है। मानव जीवन में पूर्ण मानवता की प्राप्ति सत्संग से ही संभव है। गुरुदेव की कृपा जब तक नहीं होगी, तब तक ज्ञान और वैराग्य के नेत्र खोलना बड़ा मुश्किल है। मौके पर डॉ. पुंडरीक शास्त्री, विनोद सिंह, दाऊजी तिवारी, अशोक तिवारी, इंदल सिंह, हृदय नारायण पाण्डेय, रामचंद्र सिंह, उमेश पांडेय, कमलेश सिंह आदि थे। फोटो 13 अगस्त भभुआ- 15 कैप्शन- भभुआ प्रखंड के खनांव में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान बुधवार को मौजूद भक्त श्रोता।
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