सिर में साफा बांधकर होली गीत गाने की रही है परंपरा

Feb 28, 2026 08:53 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भभुआ
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रामगढ़ में होली परंपरागत फाग गीतों के साथ मनाई गई। गांव में होरी, चहका और धमार के साथ अबीर-गुलाल उड़ाए गए। युवा डीजे की धुन पर मस्ती तो करेंगे, लेकिन परंपरा को निभाते हुए गांव के लोग साफा बांधकर फाग गीत गाते हैं। यह परंपरा अब भी बरकरार है, जिसमें प्रेम और शृंगार का समावेश है।

सिर में साफा बांधकर होली गीत गाने की रही है परंपरा

फाग गीत संग छलकेंगे मस्ती के रंग, ढोल की थाप पर होरी, चहका, धमार भी ग्रामीण क्षेत्र में उड़त गुलाल लाल भयो बादल, रंग से भूमि भई भारी... की शोर रामगढ़, एक संवाददाता। कैमूर की होली परंपरागत फाग गीतों के साथ मनती रही है। काशी की संस्कृति को समेटे रामगढ़ की आबोहवा में बदलते जमाने के साथ बहुत कुछ बदल गया, पर फगुआ की परंपरा नहीं बदली। बदलाव के दौर में डीजे की धुन पर युवा दिन की पहली पाली में हुड़दंग जरुर मचाएंगे, लेकिन दूसरी पाली में होरी, चहका व धमार के संग खूब अबीर-गुलाल उड़ेंगे। शाम की बेला में झकास कुर्ता-पायजामा के पहनावे के साथ सिर पर पगड़ी या साफा बांधे ढोलक की थाप तथा झाल व झांझ की झंकार पर जब गूंजेगा 'उड़त गुलाल लाल भयो बादल, रंग से भूमि भई भारी.. भल आज भई रंग के वश राधा अरुझि रहे बनवारी... तो हर दिल झूम उठेगा।

बदलाव में भी शृंगार गीतों में रिश्ते की खुशबू गांव की चौपालों में गायकों की टोली कई दिनों से रियाज कर रही है। खोरहरा के बसावन सिंह, गोड़सरा के रघुवंश सिंह, रामगढ़ के मनोज सिंह, नोनार के लक्ष्मण तिवारी ने बताया कि भोजपुरी के अश्लील फाग गीतों से हटकर परंपरागत होली गीतों में प्रेम, शृंगार, लालित्य व हुड़दंग की मधुर प्रस्तुति बेजोड़ होती है। ‘गोरिया कइके सिंगार अंगना में पीसे ली हरदिया, मेहर भइली जिउवा के हो जवाल, गवन हमरो नियराना हो करबो मो कवन बहाना...’ जैसे शृंगार गीतों में रिश्ते की खुशबू बिखर उठती है। इन फाग गीतों का मुकाबला आज के फुहड़ गीत कदापि नहीं कर सकते। खुशी है कि गांवों में अब भी यह परंपरा बदलाव के बीच भी बरकरार है। बड़ौरा गांव में तो होली के दिन हर ग्रामीण साफा बांधकर होली गाते हैं। कवि, साहित्यकार व गायकों के विचार जिले के युवा कवि रत्नेश चंचल बताते हैं कि होली की मस्ती में उल्लास का रंग परंपरागत फाग गीतों में समाहित है। परंपरागत होरी गीत में शृंगार, आध्यात्मिक ऊर्जा, सामाजिक सरोकार व रिश्तों में प्रेम से पगे गीतों की बड़ी शृंखला है। अश्लीलता का नामोनिशान नहीं। साहित्यकार डॉ. विनोद कैमूरी कहते हैं कि पुराना जमाना लौट रहा है और होली में भोजपुरी के फुहड़ गीत आ रहे हैं। लेकिन, चौपाल में तो परंपरागत फाग गीतों का ही जलवा है। शास्त्रीय संगीत की गायिका व कैमूर की सुर परी तनु श्री ने कहा कि मैंने मिथिला में राम खेलत होरी..., सिया मांगेली अयोध्या के राज..., होलिया में उड़ेले गुलाल... समेत दर्जनभर गीत का एलबम अपलोड किया है। सोशल मीडिया पर काफी सराहना मिल रही है। मेरा मानना है कि लोग अच्छे गीत सुनना पसंद करते हैं। फोटो- 28 फरवरी भभुआ- 4 कैप्शन- होली को लेकर सिर पर साफा बांधे इस अंदाज में फाग गीतों से धमाल मचाते हैं बड़ौरा के ग्रामीण।

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