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केंद्र की घाषणों से बुनकरों और कारीगरों को मिल सकेगा लाभ

केंद्र की घाषणों से बुनकरों और कारीगरों को मिल सकेगा लाभ

संक्षेप:

कैमूर जिले के दो दर्जन गांवों में करीब पांच हजार बुनकर तैयार करते हैं कालीन आजीविका सुनिश्चित करने का असवर मिलने से माली हालत में सुधार की उम्मीद

Feb 01, 2026 08:58 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भभुआ
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कैमूर जिले के दो दर्जन गांवों में करीब पांच हजार बुनकर तैयार करते हैं कालीन आजीविका सुनिश्चित करने का असवर मिलने से माली हालत में सुधार की उम्मीद (बजट) भभुआ, कार्यालय संवाददाता। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में बुनकरों और कारीगरों को आजीविका सुनिश्चित करने के लिए बेहतर अवसर दिए जाने की घोषणा की है। इससे कैमूर के बुनकरों में नई उम्मीद जगी है। जिले के दो दर्जन गांवों में करीब पांच हजार बुनकर कालीन की बुनाई करते हैं। हालांकि राज्य सरकार द्वारा इनके लिए शेड का निर्माण कराया गया है। लेकिन, बुनकरों का कहना है कि इसका विस्तार किए जाने, सस्ते ऋण पर आधुनिक मशीन और कच्चा माल उपलब्ध कराने की जरूरत है।

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कोचाड़ी के कारीगर अमजद अंसारी, आबिर अंसारी व मोबिन अंसारी कहते हैं कि उनके गांव में छोटा शेड है। कच्चा माल का प्रबंध हो जाए और बड़ा शेड बनाकर आधुनिक मशीन मिल जाए तो उनका कारोबार काफी आगे निकल जाएगा। यहां के बुनकर भदोही व मिर्जापुर से कच्चा माल लाकर कालीन तैयार करते हैं। उन्हें तो सिर्फ पारिश्रमिक मिलता है, लेकिन अपने जिले में सुविधा मिलेगी तो वह खुद रोजगार करते हुए दूसरे को भी रोजगार देते और बाजार भी खड़ा करते। मुख्तार अंसारी बताते हैं कि जिले के कोचाड़ी, मरची, सैंथा, ददरा, बसंतपुर, परमालपुर, अवसान, टोड़ी, भगवानपुर, मेढ़, लखमनपुर, मींव, दुमदुम, कसेर, रमावतपुर, किन्नरचोला, चैनपुर, दतियांव, रघुवीर गढ़, डीह, बिउर, सदौली, इचांव, पाढ़ी, अमांव आदि गांवों में पांच हजार से भी अधिक कारीगर कालीन की बुनाई दूसरे के लिए करते हैं। फोटो- 01 फरवरी भभुआ- 11 कैप्शन- भगवानपुर प्रखंड के कोचाड़ी गांव में हाथ से कालीन तैयार करते कारीगर।